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रक्षा तकनिकियों पर नई-नई रिसर्च करेंगे आईआईटी के वैज्ञानिक।

संवाददाता।
कानपुर। नगर मे आईआईटी कानपुर ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सहयोग से मंगलवार को डीआरडीओ-उद्योग-अकादमिया उत्कृष्टता केंद्र (डीआईए सीओई) की स्थापना की है। अब डीआरडीओ और आईआईटी के वैज्ञानिक यहां पर रक्षा की तकनिकियों पर नई-नई रिसर्च करेंगे। आईआईटी कानपुर में डीआईए सीओई की स्थापना को लेकर 2022 में गांधीनगर में डिफेंस एक्सपो-2022 के दौरान दोनों संस्थान के बीच हुई थी। इसके बाद एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ। इस एमओयू के तहत ही यहां पर केंद्र की स्थापना का काम शुरू किया गया था। यह केंद्र अनुसंधान और विकास क्षेत्रों में केंद्रित अनुसंधान का नेतृत्व करेगा। पतली फिल्मों पर उपकरणों और प्रणालियों के निर्माण के लिए फ्लेक्सिबल सबस्ट्रेट्स पर प्रिंटिंग, सामग्री चयन और डिजाइन में मौलिक योगदान प्रदान करने के लिए उन्नत नैनोमटेरियल्स, उच्च प्रदर्शन वाले विस्फोटकों के धातुयुक्त विस्फोटकों के प्रदर्शन की भविष्यवाणी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए उच्च ऊर्जा सामग्री और खतरनाक अपशिष्ट को पहचानने से लेकर घाव भरने तक के अनुप्रयोगों के लिए प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए बायो-इंजीनियरिंग शामिल हैं। डीआईए सीओई का उद्घाटन रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. समीर वी कामत और आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने किया। प्रो. अग्रवाल ने कहा कि बदलते समय के साथ, सही अर्थों में आत्मनिर्भर भारत बनने के लिए रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी की उन्नति की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। इसके लिए डीआरडीओ, शिक्षा जगत और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा। डॉ. समीर वी कामत ने कहा, ‘यह केंद्र लंबी अवधि में विभिन्न महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के स्वदेशीकरण का मार्ग प्रशस्त करेगा, जिससे रक्षा क्षेत्र आत्मनिर्भर और टिकाऊ बनेगा। इससे भविष्य की रक्षा प्रणालियों के लिए नई सामग्रियों के विकास में तेजी आएगी। इसमें 10-15 साल लग सकते थे।’ इस मौके पर डॉ. सुब्रत रक्षित, प्रो. तरुण गुप्ता, संजय टंडन, प्रोफेसर कांतेश बलानी, एलसी मंगल, डॉ. मयंक द्विवेदी और डॉ. एन रंजना मौजूद रहीं।

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