June 22, 2024

संवाददाता।
कानपुर।
नगर में स्थित उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौद्योगिकी संस्थान में अब छात्र-छात्राएं नई शिक्षा नीति के तहत सिंथेटिक की जगह नेचुरल कलर का प्रयोग करना सीखेंगे। यह प्रयोग इंडस्ट्रीज में बड़ा बदलाव लाएगा। इसके लिए हाल ही में संस्थान में आयोजित एक संगोष्ठी में दूर-दूर से आए विशेषज्ञों ने भी जोर दिया था। उन्होंने कहा कि यदि नेचुरल कलर का प्रयोग किया गया तो सबसे बड़ा असर अपने पर्यावरण में देखने को मिलेगा। टैक्सटाइल केमेस्ट्री के प्रोफेसर एंड हेड डॉ. अरुण कुमार पात्रा ने बताया कि अभी तक कपड़ों में सिंथेटिक कलर का प्रयोग किया जा रहा है। यह कलर आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं, जब यह कपड़े आप लगातार पहनते हैं तो इसका शरीर पर असर देखने को मिलता है। एलर्जी भी हो सकती है और इससे कैंसर जैसे खतरे भी हो सकते हैं, लेकिन जब कपड़ों में नेचुरल कलर को प्रयोग किया जाएगा तो इन सब चीजों से बचा जा सकता है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री में पानी का सबसे ज्यादा प्रयोग किया जा रहा है। इसमें केमिकल होने के कारण पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंच रहा है। केमिकल जब पानी में मिलकर गंगा या किसी नदी में जाता है तो उसका भी प्रभाव गलत पड़ता है, लेकिन अब जब नेचुरल कलर का प्रयोग किया जाएगा तो यह कलर बहुत जल्दी पानी में नष्ट हो जाएगा। इससे किसी भी प्रकार की पर्यावरण को हानि नहीं पहुंचेगी। प्रोफेसर पात्रा ने बताया कि अब छात्र-छात्राओं को बताया जाएगा कि कास्टिक सोडा की जगह हम लोग किस एंजाइम का प्रयोग करें। कपड़ों में चमक बरकरार रख सकते है। इसके अलावा किसी प्रकार की हानि भी नहीं होगी। यह सब बायोलॉजिकल प्रोडक्ट होंगे। इसके अलावा कई एंजाइम, बैक्टीरिया से भी डेवलप करके बनाएंगे। कपड़ों में सॉफ्ट फीलिंग आए और पहनने में किसी प्रकार की दिक्कत ना हो। इसका खास ख्याल रखा जाएगा। प्रोफेसर पात्रा ने बताया कि हम लोगों ने लखनऊ की हर्बल लेब्रॉटिक्स लिमिटेड से चर्चा की है, जो की हमारे बच्चों को कलर की जानकारी देंगे। इसके अलावा वह यह भी बताएंगे कि कलर का प्रयोग किस कपड़े में किस तरीके से करना है। इसके बाद विद्यार्थी कॉलेज में आकर इसका परीक्षण करेंगे, क्योंकि इंडस्ट्री भी अब बदलाव चाहती है। हर व्यक्ति इस दिशा में कदम बढ़ा चुका है। कपड़ों की गुणवत्ता को बढ़ाने में भी इन कलर की अहम भूमिका होती है।प्रोफेसर पात्रा ने बताया कि नेचुरल कलर को कई तरह से तैयार किया जाता है। अधिकतर लोग यह जानते हैं कि फूल, पत्ती, पेड़ों के माध्यम से कलर को तैयार करते हैं, जबकि कलर को तैयार करने के लिए और भी कई चीजों का हम प्रयोग कर सकते हैं। जैसे की प्याज के रस का भी प्रयोग कलर के लिए करते हैं। इसके अलावा बहुत से ऐसे कीड़े-मकोड़े होते हैं, जिनकी मदद से हम लोग नेचुरल कलर तैयार करते हैं। अब इन नेचुरल कलर को हम लोग किस कपड़े में और कितनी मात्रा में प्रयोग करें यह संस्थान बच्चों को सिखाएगा। 

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