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कानपुर जर्नलिस्ट क्लब में हिंदी दिवस के अवसर पर सरलीकरण के लिए की गई परिचर्चा।

संवाददाता।
कानपुर।
नगर में आज हिंदी दिवस के अवसर पर अशोक नगर स्थित कानपुर जर्नलिस्ट क्लब के तत्वावधान में हिन्दी भाषा के अधिकाधिक प्रयोग भाषायी सरलीकरण के लिए परिचर्चा की गयी। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार कुमार त्रिपाठी ने की जहाँ वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी भाषा के चलन में काफी व्रद्धि हुई है लेकिन अभी भी हिन्दी के उन्नयन में सार्थक प्रयासों की जरूरत है। वही वरिष्ठ पत्रकार कैलाश अग्रवाल ने कहा कि हिंदी भाषा के जो विद्यालय है उनमें पढ़ाई का स्तर सुधारने के लिए कलम के माध्यम से पत्रकार उपयुक्त माहौल बनाये ताकि अभिवावकों में अंग्रेजी भाषा के स्कूल कालेजो में बच्चों को पढ़ाने की विवशता न हो। जर्नलिस्ट क्लब के महामंत्री अभय त्रिपाठी ने कहा की आज हिन्दी का दिन है हिन्दी दिवस। आज ही के दिन हिन्दी को संवैधानिक रूप से भारत की आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला था। दो सौ साल की ब्रिटिश राज की गुलामी से आजाद हुए देश ने तब ये सपना देखा था कि एक दिन पूरे देश में एक ऐसी भाषा होगी जिसके माध्यम से कश्मीर से कन्याकुमारी तक संवाद संभव हो सकेगा आधिकारिक रूप से पहली बार हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 में मनाया गया था। हालांकि देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी भाषा को अंग्रेजी के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर 14 सितंबर 1949 को स्वीकार किया था। बाद में इसकी महत्ता और उपयोगिता को समझते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 14 सितंबर 1953 को पहला हिंदी दिवस मनाया। इसके बाद से हर साल 14 सितंबर के दिन हिंदी दिवस मनाया जाता है। वीरेन्द्र चतुर्वेदी ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हों या देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, सभी इस बात पर एकमत थे कि ब्रिटेन की गुलामी की प्रतीक अंग्रेजी भाषा को हमेशा के लिए देश की आधिकारिक भाषा नहीं होना चाहिए। देश की आजादी के 70 साल बाद आज पूरे देश में शायद ही ऐसा कोना हो जहां दो-चार हिन्दी भाषी न हों। शायद ही ऐसा कोई प्रदेश हो जहां आम लोग कामचलाऊ हिन्दी न जानते हों। भले ही आधिकारिक तौर पर हिन्दी देश की राष्ट्रभाषा न हो केवल राजभाषा हो, व्यावाहरिक तौर पर वो इस देश की सर्वव्यापी भाषा है। ऐसे में जरूरत है हिन्दी को उसका वाजिब हक दिलाने की जिसका सपना संविधान निर्माताओं ने देखा था। गोष्ठी का सफल संचालन वरिष्ठ पत्रकार आलोक अग्रवाल ने किया। गोष्ठी में प्रमुख रूप से वरिष्ठ पत्रकार शैलेंद्र मिश्र, मनोज शुक्ला, अबू ओबेदा, राजू बाजपेयी, संजय मौर्या, मनोज मिश्रा, प्रकाश, विशाल सैनी, पंकज अवस्थी, शमशेर, विजय समेत भारी संख्या में पत्रकार मौजूद रहे। 

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