June 20, 2024

कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के भीतर चल रहे कई विवादों की जांचों पर भारतीय क्रिकेट कन्ट्रो्ल बोर्ड के लोकायुक्त की चुप्पी संघ के कई पदाधिकारियों को शायद बचाने की ओर इशारा कर रही है। यही नही अभी तक के सबसे बडे भ्रष्‍टाचार के मामले पर कारपोरेट मंत्रालय की ओर से की जा रही जांच पर भी बीसीसीआई के लोकायुक्त ने चुप्पी साध रखी है। बीसीसीआई के लोकायुक्त विनीत शरण के संघ के पूर्व सचिव के साथ पुराने और निजी संबंधों के चलते कई मामलों पर सुनवाई तक शुरु नही हो सकी है। जिसका सीधा फायदा संघ के दोयम दर्जे के अधिकारी या फिर पदाधिकारियों को हो रहा है।
यूपीसीए के सूत्र बताते हैं कि लोकायुक्त् की बोर्ड में नियुक्ति संघ के पूर्व सचिव के वरदहस्त् से हुयी थी जिसके एवज में वह हर मामले में यूपीसीए को बचाने के लिए आगे रहते हैं। संघ के खिलाफ की शिकायतों पर किसी प्रकार की सुनवाई न किए जाने से कई मामले ठंडे बस्ते में चले गए हैं या फिर उसकी ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। संघ से मिली जानकारी के मुताबिक 2021 के दिसंबर महीने से कारपोरेट मंत्रालय की उसे यूपीसीए की वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी है उस पर भी उनकी ओर से किसी भी प्रकार का बयान तक जारी नही हो सका है।सूत्र तो यह भी बताते हैं कि यूपीसीए के पूर्व सचिव ने एक मीटिंग के दौरान संघ के सभी पदाधिकारियों व कर्मचारियों को यह स्पष्ट रूप से बताया था कि बोर्ड में लोकायुक्त की नियुक्ति उनके कहने पर ही की गयी है और वह संघ के खिलाफ पहुंच रही शिकायतों की सुनवाई अपने विवेक के अनुसार करेंगे। जबकि साल 2019 में लोढा समिति की सिफारिशों को लागू किए जाने के बाद किसी भी शिकायत का निस्तारण 45 दिनों के भीतर अनिवार्य किया जा चुका है लेकिन संघ के खिलाफ लोकायुक्‍त ने एक भी शिकायत का निस्‍तारण अभी तक नही किया है।
लेकिन वहीं दूसरी ओर कारपोरेट मंत्रालय के अधिकारियों का यह दावा भी है की मामले की जांच अभी जारी है इसमें बोर्ड के लोकायुक्‍त और अधिकारी भी चुप्पी साधे बैठे हैं का नतीजा यह है कि उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन में सभी कार्य पूर्व की तरह संपादित किए जा रहे हैं।
बीते दो महीने पूर्व माह लखनऊ के इकाना स्टेडियम में एक बैठक आहूत की गयी थी जिसमें पूर्व सचिव ने देश की वित्त मन्त्री से मिलकर मामले का निस्तारण होने का भरोसा जताये जाने का हवाला भी दिया था।उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सूत्र बताते हैं कि पूर्व सचिव ने
लोकायुक्त के सुपुत्र कार्तिकेय सरन को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपना वकील नियुक्त 2017 में नियुक्त किया था ताकि लोकायुक्त का साथ मिल सके ।
इस बात से खुश होकर संघ के पदाधिकारियों ने पूर्व सचिव का फूल मालाओं से सम्मान भी किया था। यूपीसीए के एक विशेष पदाधिकारी ने बताया कि जब यह सब हो चुका था तो अब लोकायुक्‍त को सुनवाई शुरु कर देनी चाहिए थी। इस मामले की तह तक जाने के लिए यूपीसीए के उपाध्यक्ष मोहम्मद फहीम व संयुक्त सचिव रियासत अली से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले में बोलने से मना कर दिया।

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