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क्राइम ब्रान्च की ‘गेंदबाजी’ का सामना करने से कतरा रहे पूर्व सचिव ‘फाइनल’ से आउट

यूपी टी-टवेन्टी प्रीमियर लीग के समापन समारोह से किनारा

कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के सचिव के फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूर्व सचिव का नाम आने और उनकी क्राइम ब्रान्च में पेशी उनकी छवि पर दाग का काम कर रही है। वह अब शायद पेशी पर आने और क्राइम ब्रान्च की सवालों वाली गेंदबाजी से कतरा रहे हैं। यही कारण है कि यूपीसीए के पूर्व सचिव यूपी टी-टवेन्टी के फाइनल मुकाबले से ही आउट हो गए। निजी कारणों का हवाला देते हुए उन्हों नें यूपी टी टवेन्टी के फाइनल मुकाबले और समापन समारोह से किनारा कर लिया और अपनी हाजिरी वहीं से लगा दी है। बतातें चलें कि उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव अरविन्द श्रीवास्तव के लैटर हेड पर खिलाफ उन्ही के हस्ताक्षर को लेकर जारी चिटठी ने अभी तक कोहराम मचा रखा है। जहां एक ओर लैटर हेड में किए गए हस्ता्क्षर को लेकर चली फॉरेंसिक जांच पूर्णतया सही पाई गई थी तो दूसरी ओर उस मामले में अब क्र्राइम ब्रान्च तथ्यों की जांच पर काम करती आ रही है। जिसके चलते पूर्व सचिव को क्र्राइम ब्रान्चं में पेश होकर अपने बयान दर्ज कराने हैं। क्राइम ब्रान्च इस मामले में बीसीसीआई के उपाध्यक्ष पर अपना शिकंजा कसने में कामयाब हो सकी थी। बीसीसीआई उपाध्यक्ष और यूपीसीए के पूर्व सचिव पर भी शिकंजा कसते हुए बयान दर्ज करने के लिए कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे जिस पर अमल करते हुए वह बीते महीने क्र्राइम ब्रान्च् के अधिकारियों के समक्ष पेश भी हुए थे ,ये अलग बात है कि उन्होंने बयान दर्ज कराए नही ये साफ नही हो सका था। लेकिन मामले की गंभीरता का अन्दाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि क्राइम बान्च पूर्व सचिव पर बयान दर्ज कराने को लेकर बराबर उनको नोटिस भेज रहा है।
गौरतलब है कि पुलिस ने जिनके खिलाफ नोटिस जारी किया गया था उन्होंने पुलिस से आवेदन कर उनके हस्ताक्षर की फॉरेंसिक जांच की मांग की थी जिस पर अमल करते हुए बीएफआई के माध्यम से वह जांच करवाई और सचिव अरविंद श्रीवास्तव के हस्ताक्षर पूर्णतया सही पाए गए थे। इसमें फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. आदर्श मिश्र के मुताबिक यूपीसीए के पूर्व सचिव युद्धवीर सिंह को 28 मार्च को भेजे गए नोटिस और प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए भेजे गए आमंत्रण पत्र पर किए गए दोनों ही हस्ताक्षर एक ही व्यक्ति के थे। पूर्व सचिव को नोटिस भेजने के बाद वह उस बात से मुकर क्यों गए थे ।कुछ लोगों का यह भी मानना है कि संघ की छवि धूमिल होते देख आला अधिकारियों ने उन पर हस्ताक्षर चोरी किए जाने का किसी पर भी आरोप लगाकर दबाव बनाने का काम किया था ।
पूर्व सचिव ने नोटिस पर उठाए गए बिंदुओं की गंभीरता और सच्चाई को देखते हुए सचिव पर अनेतिक दवाब बनाया और रोकने के लिए अज्ञात के नाम एफआईआर करने को बाध्य किया था ताकि MCA और बीसीसीआई द्वारा इस नोटिस को गंभीरता से लिए जाने पर यूपीसीए पर होने वाली कार्यवाही को रोका जा सके जिसमे वह सफल हुए थे और यूपीसीए पर अपनी पकड़ कायम रखी थी।लेकिन क्राइम ब्रान्च की टीम ने इस मामले में सचिव समेत चार-पांच लोगों को नोटिस देकर उनके बयान लिए थे। इसमें जीडी शर्मा, प्रदीप सिंह और उत्तम केसरवानी समेत अन्य के बयान दर्ज भी कराए गए थे। हस्ताक्षर को लेकर सचिव अरविंद श्रीवास्तव के बयान भी दर्ज हुए थे। मामले को क्राइम ब्रांच ट्रांसफर कर दिया गया था। सचिव के हस्ताक्षर मामले की जांच कानपुर की क्राइम ब्रांच टीम सभी के बयान दर्ज करने के साथ ही कर रही है। अब इस मामले में क्राइम ब्रान्च् की टीम ने बीसीसीआई उपाध्यक्ष और यूपीसीए के पूर्व सचिव पर भी शिकंजा कसते हुए बयान दर्ज करने के लिए कार्यालय में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे जिस पर अमल करते हुए वह बीते महीने क्र्राइम ब्रान्च् के अधिकारियों के समक्ष पेश हुए थें लेकिन बयान दर्ज नही किए जा सके थे। यूपीसीए के सूत्रों के मुताबिक शनिवार को ही पूर्व सचिव को अपने बयान दर्ज करवाने कार्यालय में पेश होने के लिए आना था लेकिन वह फाइनल से ही आउट हो गए। वहीं इस मामले में यूपीसीए के सचिव अरविंद श्रीवास्तव हर बार की तरह इस बार भी फोन कॉल रिसीव नहीं की जिससे उनसे बात नहीं की जा सकी।

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