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पत्रकारों को कवरेज करने से रोका, एसीपी और सिपाहियों ने पत्रकारों के कैमरे पर हाथ मारते हुए उन्हें थाने से बाहर भगाया।

संवाददाता।
कानपुर। नगर में बुधवार देर शाम को अतिक्रमण हटवाने के दौरान हंगामा हो गया। पी-रोड बाजार में अतिक्रमण हटाने का अभियान चल रहा था। इसी दौरान एक दरोगा ने दुकान में घुसकर एक व्यापारी को थप्पड़ मार दिया। जब व्यापारी ने अधिकारियों से शिकायत करने की बात कही तो एसीपी ने धमकी देते हुए बोलीं कि अभी सर्किल फोर्स बुलाकर ठीक कर दूंगी। इसके बाद गुस्साए व्यापारियों ने थाने का घेराव करके हंगामा किया। अफसरों तक मामला पहुंचने पर एडीसीपी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने कार्रवाई का भरोसा दिलाकर व्यापारियों को शांत कराया। एसीपी सीसामऊ श्वेता कुमारी ने बताया, “जिस तरह से पूरा मामला दिखाया जा रहा है, वो गलत है। दरअसल, पी-रोड पर दुकानदारों ने पूरा फुटपाथ कब्जा कर रखा है। इससे दिन भर सड़क पर जाम लगता है। सीसामऊ थानाध्यक्ष हिमांशु चौधरी फोर्स के साथ व्यापारियों को फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने की चेतावनी दे रहे थे।दुकान के बाहर सामान रखने और बाइकें खड़ी करवाने पर मैंने और हिमांशु ने दुकानदार दिनेश इशरानी से अतिक्रमण हटाने को कहा। व्यापारी पहले तैयार नहीं हुआ। वह पूरे बाजार के अतिक्रमण का हवाला दे रहा था। इस दौरान दोनों के बीच इसी बात को लेकर गहमा-गहमी होने लगी।” व्यापारियों का आरोप है, “दुकान के अंदर पुलिसवाले घुसे थे। आक्रोशित सीसामऊ थाना प्रभारी ने व्यापारी को पहले कॉलर पकड़कर खींचा। व्यापारी ने इज्जत से पेश आने के लिए कहा तो उन्होंने थप्पड़ जड़ दिया। इससे गुस्साए व्यापारी पुलिस के खिलाफ सड़क पर उतर आए। सीसामऊ पी-रोड व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश मेघानी के साथ दर्जनों की संख्या में व्यापारी थाने पहुंचे। पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। मामला अफसरों तक पहुंचने पर एडीसीपी आरती सिंह मौके पर पहुंचीं। उन्होंने मामले की जांच करके दोषी पुलिस कर्मी के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिलाया। तब जाकर हंगामा शांत हुआ। वहीं, जब पत्रकार घटना का कवरेज करने पहुंचे तो एसीपी श्वेता ने कहा, वह उनकी प्राइवेसी में दख़लंदाजी न करें। एसीपी के कहने के बाद सिपाहियों ने पत्रकारों के कैमरे पर हाथ मारते हुए उन्हें थाने से बाहर कर दिया। इस पर गुस्साए पत्रकारों ने आलाधिकारियों को सूचना दी। इस दौरान थाने पर जमकर हंगामा हुआ। एसीपी और थानेदार को वहां से हटाया गया। एडीसीपी ने खुद माफी मांगकर मामले को शांत कराया। 

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