— करोड़ों के बकाया भुगतान पर खेल विभाग का सख्त रुख, यूपीसीए के पाले में लगातार जा रही ‘बाउंड्री’।

संवाददाता
कानपुर। उत्तर प्रदेश टी-20 लीग के आयोजन की तैयारियां अभी पूरी तरह शुरू भी नहीं हुई हैं, लेकिन उससे पहले खेल विभाग और उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के बीच ‘बकाया प्रीमियर लीग’ पूरे रोमांच पर पहुंच गई है। इस मुकाबले में फिलहाल खेल विभाग की टीम जबरदस्त फॉर्म में नजर आ रही है, जबकि यूपीसीए के गेंदबाज लगातार चौके-छक्के खाते दिखाई दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पिछले आयोजनों के दौरान सरकारी खेल परिसरों, स्टेडियमों और अन्य संसाधनों के उपयोग के एवज में देय रकम का भुगतान अब तक पूरा नहीं किया गया है। इसी बकाया को लेकर खेल विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए हिसाब-किताब साफ करने का दबाव बढ़ा दिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि सरकारी परिसंपत्तियों का उपयोग करने वाली किसी भी संस्था को तय नियमों के अनुसार भुगतान करना होगा। इसमें किसी प्रकार की रियायत की गुंजाइश नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि मैदान पर खिलाड़ियों को नियमों का पाठ पढ़ाने वाला यूपीसीए इस बार खुद सरकारी नियमों के ‘क्रीज’ में फंसता नजर आ रहा है। विभाग की ओर से भेजे जा रहे नोटिस और पत्राचार मानो ऐसी तेज गेंदें बन गए हैं, जिनका जवाब यूपीसीए के पास फिलहाल दिखाई नहीं दे रहा। हर नई कार्रवाई के साथ खेल विभाग के खाते में एक और ‘चौका’ जुड़ता नजर आ रहा है।
खेल जगत में यह चर्चा भी तेज है कि यदि बकाया भुगतान का विवाद जल्द नहीं सुलझा तो आगामी यूपी टी-20 लीग की तैयारियों पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से संयम बरत रहे हैं, लेकिन अंदरखाने में बैठकों और पत्राचार का दौर लगातार जारी है।
खेल प्रेमियों का कहना है कि क्रिकेट का असली मुकाबला मैदान पर होना चाहिए, न कि फाइलों और बकाया बिलों के बीच। फिलहाल स्कोरबोर्ड पर खेल विभाग मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है और यूपीसीए की टीम रक्षात्मक बल्लेबाजी करती नजर आ रही है। अब देखना होगा कि यूपीसीए इस ‘बकाया मैच’ में वापसी कर पाता है या खेल विभाग की लगातार पड़ रही बाउंड्रियों के सामने उसे अंततः भुगतान की पारी खेलनी पड़ती है।






