
संवाददाता
कानपुर। लखनऊ अग्निकांड के बाद कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुई सख्ती का असर शहर की सबसे बड़ी कोचिंग मंडी काकादेव में साफ दिखाई दे रहा है।
कानपुर विकास प्राधिकरण अब तक 30 से अधिक कोचिंग संस्थानों को सील कर चुका है। कार्रवाई के बाद कोचिंग संचालकों में दहशत का माहौल है, लेकिन कई संस्थानों ने कार्यालय संचालन का नया तरीका निकाल लिया है। कई संस्थानों के शटर बाहर से बंद हैं, जबकि अंदर से गतिविधियां जारी हैं।
काकादेव स्थित पुलिस चौकी के सामने पेट्रोल पंप के बगल वाली गली में कई कोचिंग संस्थानों और काउंसिलिंग सेंटरों के शटर बंद मिले। पहली नजर में परिसर बंद दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर कार्यालय संचालित होते मिले।
गली में एक भवन पर करियर किक सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी का बोर्ड लगा मिला। भवन का शटर बंद था, लेकिन भीतर कर्मचारियों की मौजूदगी और कार्यालय संचालन जारी था। स्वयं को भवन मालिक बताने वाले निखिल सचान ने बताया कि यहां कोचिंग नहीं चलती, बल्कि काउंसिलिंग और एडमिशन से जुड़ा काम होता है। हालांकि शटर बंद रखकर कार्यालय संचालन किए जाने के सवाल पर वह स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इसी के बगल में नीट एक्सप्रेस नाम की कोचिंग में भी शटर बंद मिला।
यह भी देखने को मिला कि केडीए की कार्रवाई और छात्रों की कम आवाजाही का असर आसपास के कारोबार पर भी पड़ा है। क्षेत्र की कई खाने-पीने की दुकानें बंद रहीं और सामान्य दिनों की तुलना में सड़कों पर भीड़ काफी कम दिखाई दी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई के बाद कई संस्थानों ने खुले तौर पर संचालन बंद कर दिया है, लेकिन अंदर से गतिविधियां जारी रखी जा रही हैं। काकादेव के कई हिस्सों में यही स्थिति देखने को मिली। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सुरक्षा मानकों को लेकर चल रही कार्रवाई के बावजूद संस्थान नियमों से बचने के लिए नए रास्ते तलाश रहे हैं।






