June 28, 2026

बागी पार्षदों के खिलाफ 75 पार्षदों ने खोला मोर्चा।

संवाददाता 

कानपुर। विधानसभा चुनाव से पहले कानपुर नगर निगम में भाजपा के 75 पार्षदों ने पार्टी के छह कथित बागी पार्षदों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जबकि बागी गुट ने नगर निगम में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने का संकल्प लिया है। यह अंदरूनी कलह अब सार्वजनिक हो गई है, और दोनों पक्ष आरोप-प्रत्यारोप में लगे हुए हैं।

बुधवार को मोतीझील स्थित प्रमिला सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित ने कहा कि छह बागी पार्षद लगातार पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा, “विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और जनता सवाल पूछ रही है कि पार्टी के भीतर क्या चल रहा है।” 

नवीन पंडित ने आरोप लगाया कि ये असंतुष्ट पार्षद कभी रक्षा मंत्री, कभी प्रदेश अध्यक्ष तो कभी प्रभारी मंत्री के समक्ष आधारहीन शिकायतें कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संगठन ने समय रहते निर्णय नहीं लिया तो 75 भाजपा पार्षद सामूहिक इस्तीफा देने पर मजबूर होंगे। 

पार्षद दल के नेता ने बागी गुट के प्रमुख चेहरों पर व्यक्तिगत आरोप भी लगाए। उन्होंने दावा किया कि पार्षद पवन गुप्ता के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं, जबकि पार्षद अंकित मौर्य के खिलाफ चुनावी जालसाजी का मामला न्यायालय में विचाराधीन है। 

वहीं, दूसरी ओर निष्कासित पार्षदों ने इन आरोपों को राजनीतिक दबाव बताते हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखने का ऐलान किया है। 

बागी पार्षद पवन गुप्ता ने कहा कि नगर निगम में महापौर के परिजनों के संरक्षण में भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “जनता सवाल पूछ रही है कि आखिर पार्टी के भीतर ऐसा माहौल क्यों बना हुआ है।”

बागी पार्षद विकास जायसवाल ने कहा कि वे संगठन के सामने मजबूती से अपना पक्ष रखेंगे और नगर निगम में फैली कथित अनियमितताओं को उजागर करेंगे। उन्होंने कहा, “यदि मुख्यमंत्री से मुलाकात का अवसर मिला तो उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर समझौता नहीं किया जाएगा।” 

बागी पार्षद हरिस्वरूप तिवारी, पवन गुप्ता, विकास जायसवाल, लक्ष्मी कोरी, अंकित मौर्य और आलोक पांडेय ने संयुक्त रूप से कहा कि अब “आर-पार की लड़ाई” होगी। 

यह विवाद पिछले दिसंबर में नगर निगम कार्यकारिणी सभा के दौरान महापौर और पार्षदों के बीच शुरू हुआ था।  इन छह पार्षदों को कार्यकारिणी से निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले नगर निगम में भ्रष्टाचार के कई मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें अपर नगर आयुक्त के पीए के रिश्वत लेते पकड़े जाने का मामला भी शामिल है। 

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की यह अंदरूनी कलह सार्वजनिक होने से संगठन के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है। अब सभी की निगाहें पार्टी नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस गुटबाजी को कैसे संभालता है और क्या बागी पार्षद वास्तव में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई को आगे बढ़ा पाते हैं या यह सिर्फ एक आंतरिक राजनीतिक संघर्ष है।