
संवाददाता
कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के लाल बहादुर शास्त्री कृषक सभागार में शनिवार को चंद्रशेखर कृषक समिति का 42वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता रहे।
अपने संबोधन में कुलपति डॉ. गुप्ता ने कहा कि कृषक हमारा सम्मानित अतिथि है और देश की प्रगति में किसानों का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब किसान केवल खेती तक सीमित न रहकर कृषि उद्यमी के रूप में आगे आएं। इससे वह स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
उन्होंने बताया कि सीएसए के वैज्ञानिकों ने नवीनतम कृषि तकनीक और उन्नत किस्म के बीज विकसित किए हैं, जिससे उत्पादन और क्षेत्रफल दोनों में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने किसानों से अपील की कि रबी फसलों की बुवाई का सही समय 15 अक्टूबर से 15 नवंबर तक है और वे बुवाई से पहले वैज्ञानिकों से मोबाइल, व्हाट्सएप ग्रुप या व्यक्तिगत संपर्क कर तकनीकी सलाह जरूर लें।
कुलपति ने किसानों को सहफसली खेती और फूलों की खेती अपनाने की सलाह दी, ताकि एक फसल खराब होने पर दूसरी से नुकसान की भरपाई हो सके। उन्होंने युवा किसानों से बीज उत्पादन के क्षेत्र में आगे आकर स्वरोजगार अपनाने का आह्वान किया।
निदेशक प्रसार डॉ. वीके त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय से किसानों के हित में चलाई जा रही प्रसार गतिविधियों की जानकारी दी, वहीं डॉ. पीके राठी ने सरकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम को पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया और सरसौल के ब्लॉक प्रमुख डॉ. विजय रत्ना तोमर ने भी संबोधित किया।
समारोह में कृषि क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 15 वैज्ञानिकों और 15 प्रगतिशील किसानों को सम्मानित किया गया। सम्मानित वैज्ञानिकों में डॉ. महक सिंह, डॉ. कौशल कुमार, डॉ. अखिलेश मिश्रा, डॉ. पीके राठी, डॉ. खलील खान सहित अन्य शामिल रहे। वहीं किसानों में इटावा के अनिल यादव, सरसौल के समर सिंह भदौरिया, उन्नाव के जगदीश सिंह सहित कानपुर देहात के कई किसानों को नवाचार के लिए सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. वीके कनौजिया ने दिया। इस मौके पर विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रभारी, वैज्ञानिक, कृषि और उद्यान विभाग के अधिकारी व बड़ी संख्या में प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।






