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पुलिस अफसर वर्दी की आड़ में सत्ता के लिए काम कर रहे है …….सपा विधायक।

संवाददाता।

कानपुर। नगर में ईद पर सपा नेता की गिरफ़्तारी पुलिस के लिए सिरदर्द बनती जा रही है। सपा नेता को छुड़ाने के लिए थाने का घेराव और धरना-प्रदर्शन करने वाले सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने पनकी थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद फिर से अपना एक वीडियो जारी किया है। उनका कहना है कि पुलिस अफसर वर्दी की आड़ में सत्ता के लिए काम कर रहे हैं। ताकि जब चाहें अन्य पुलिस अफसरों की तरफ भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक, सांसद और मंत्री बन सकें। इसके साथ ही एक अन्य 5.36 मिनट के वीडियो में पुलिस, प्रशासन और सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। कानपुर अर्मापुर ईदगाह पर ईद के दिन सपा नेता सम्राट विकास यादव को आचार संहिता के उल्लंघन में अर्मापुर थाने की पुलिस ने अरेस्ट कर लिया था। बवाल की आशंका पर अर्मापुर के  बजाए उन्हें पनकी थाने में रखा गया, लेकिन सपा विधायक अमिताभ बाजपेई और गठबंधन के लोकसभा प्रत्याशी आलोक मिश्रा ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पनकी थाने का घेराव किया। सपा नेता सम्राट को छुड़ाने के लिए थाने पर दो से तीन घंटे तक हंगामा और धरना-प्रदर्शन चला। इसके बाद पुलिस ने सम्राट को जमानत पर छोड़ दिया था। इसके बाद सपा नेता को छुड़ाने के लिए पनकी थाने में धरना-प्रदर्शन और हंगामा करने वाले सपा विधायक अमिताभ बाजपेई और लोकसभा प्रत्याशी आलोक मिश्रा समेत 200 कार्यकर्ताओं पर गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद अब सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने अष्टमी पर 200 कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तारी देने के साथ ही कई गंभीर आरोप लगाए हैं।सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने कहा कि साथियों आप सबको पता चला होगा कि मेरे ऊपर पुलिस प्रशासन द्वारा एक झूठा मुकदमा दायर कर दिया गया है। इस मुकदमें को लेकर मेरा कहना है कि प्रशासन इसलिए मेरे ऊपर मुकदमा क़ायम कर रहा है कि प्रशासन अपनी गलतियों को छिपाने की कोशिश कर रहा है। जहां तक मेरे अपराध का सवाल है तो मैं बताना चाहूंगा कि बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं, आदमी हूं आदमी से प्यार करता हूं…। क्यों कि मैं धर्म, जाति, मजहब के बगैर व्यक्तियों से प्यार करता हूं। और वो लोग आदमी से प्यार करने की बजाए धर्म, जाति और मजहब में बांटना चाहते हैं। प्रशासन के कई अधिकारी सत्ता की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं, वो अपनी गलती छिपाने की वजह से हम लोगों पर मुकदमा करके पूरे मामले को डायवर्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों को देखकर जनरल डायर की याद आती है। कहीं न कहीं ये जनरल डायर के वंशज होंगे तभी अंग्रेजी हुकूमत की तरह काम कर रहे हैं। बताइए जमीन पर बैठकर नारा लगाकर गांधीवादी तरीके से विरोध दर्ज करने को ये लोग ऐसा अपराध मानते हैं जिससे सरकारी कार्य में बाधा हो गई। अगर थाने में किसी को बंद कर दिया जाए और हम बतौर विधायक  पूछे क्यों बद कर दिया गया है। तो हम पर मुकदमा दर्ज हो जाएगा। हम लोग पुलिस से सवाल नहीं पूछ सकते हैं। अब तो पुलिस से सवाल पूछना भी गुनाह हो गया है। हमारे ऊपर अतार्किक और अव्यवहारिक होने का आरोप लगाया है। मैं कहना चाहूंगा कि ऐसे अधिकारी अदूरदर्शी, अहंकारी, आक्रामक  और असंवेदनशील हैं। इनके अहंकार और असंवेदनशीलता की वजह से इस तरह के मामले खड़े होते हैं। मैं घटना के मूल में जाऊ तो घटना की शुरुआत डीसीपी विजय ढुल और सपा नेता सम्राट विकास के झड़प से होती है। उसी के बाद पूरा घटनाक्रम शुरू होता है। मैं प्रशासन से पहले भी कह चुका हूं और अब भी कह रहा हूं आखिर क्या बात सम्राट विकास और डीसीपी के बीच हुई। इसका वीडियो पुलिस को सार्वजनिक करना चाहिए। आग कहां पर लगी सबको पता है, लेकिन चिंगारी कहां से उठी यह भी सबको पता होना चाहिए। वीडियो पब्लिक के बीच जारी किया जाए। इसकी हम मांग करते हैं। इतना ही नहीं अमिताभ ने कहा कि पुलिस अफसर जो सत्ता के प्रति अपनी वफादारी दिखाना चाहते हैं। क्यों कि वो कहीं न कहीं ऐसे अधिकारियों से प्रेरित हैं जो कहीं न कहीं पुलिस में रहकर वर्दी की आड़ में भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करके टिकट पा गए विधायक बन गए और मंत्री बन गए। ऐसे बहुत सारे अधिकारियों का अनुसरण करके कि वह वर्दी में रहकर पार्टी के लिए वफादारी करते है ताकि जब चाहें वर्दी छोड़कर चुनाव लड़कर विधायक, सांसद और मंत्री बन सकें। मैं इस तरह के अधिकारियों से अपील करूंगा कि इस तरह की आदत छोड़कर जो शपथ ली थी संविधान की उस शपथ के अंतर्गत निष्पक्षता के साथ धर्म, जाति के आधार पर बंटवारे के बगैर काम करें। मैंने यही आरोप लगाया था कि ये अधिकारी धर्म के आधार पर और पार्टी के नाम पर भेदभाव कर रहे हैं। अमिताभ ने कहा कि उन्हीं अधिकारियों ने ही अंबेडकर जयंती पर निकाली जा रही शोभायात्रा को भी रोका, कई घंटे विवाद होने पर कैसे न कैसे संभाला है। ऐसे अधिकारी जो अव्यवहारिक हैं, अदूरदर्शी हैं, असंवेदनशील  हैं और अहंकारी हैं। जिससे कहीं न कहीं समाज में दिक्कत पैदा होगी। मैं सरकार और चुनाव आयोग से अपील करता हूं कि इस तरह के अधिकारियों को फील्ड पोस्टिंग से दूर किया जाए ताकि हमारे कानपुर में अमन चैन को बनाया जा सके। ऐसे अधिकारी जो धमकी भी दे रहे हैं, तो उन्हें बताना चाहते हैं कि हम समाजवादी लोग ऐसी धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। जहां तक कार्रवाई का सवाल है तो मेरा कहना है कि कागज भी तुम्हारा है और कलम भी तुम्हारी…तुम जो चाहो अपराध लिख दो हम लोग उसका डंटकर मुकाबला करेंगे। सपा विधायक ने कहा कि जब मुकदमा हो ही गया है तो, मैं अष्टमी को गिरफ्तारी दे दूंगा। अफसर मुझे अरेस्ट करके जेल भेज दें। क्यों कि अष्टमी को  मेरा व्रत पूरा हो जाएगा। क्यों कि अष्टमी और नवमी पर कानून व्यवस्था को लेकर अहम दिन है। हमारे सनातन धर्म के साथी भी राम नवमी का उत्साह मनाएंगे। ऐसे में कोई अव्यवस्था न हो तो पुलिस अपनी तरफ से कोई तारीख दे दे, हम  उस तारीख में अपने 205 साथियों साथ अरेस्टिंग देकर कानून की व्यवस्था का पालन करने को तैयार हैं। मेरी हार्दिक इच्छा ये है कि ये सभी कार्यकर्ता अष्टमी के दिन हवन-पूजन पूर्ण करने के बाद दंडवत करते हुए पनकी थाने जाएं और मेरे साथ गिरफ्तारी दें दें। मेरी प्रशासन से अपील है कि वो अपनी तरफ से मेरी गिरफ्तारी को लेकर कोई तारीख दे तो मैं अरेस्टिंग देकर कानून का पानल करने को तैयार हूं।

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