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स्वास्तिक का उत्साह वर्धन करने के लिए पिता सुरेंद्र चिकारा गांव से हजारों की संख्या में भीड़ लेकर स्टेडियम पहुंचे।

संवाददाता।
कानपुर। शनिवार को ग्रीनपार्क स्टेडियम में मेरठ मावेरिक्स और काशी रुद्रास के बीच फाइनल मुकाबला होना था। मेरठ टीम का समर्थन और स्वास्तिक का उत्साह वर्धन करने के लिए पिता सुरेंद्र चिकारा गांव से हजारों की संख्या में भीड़ लेकर स्टेडियम पहुंचे। ढोल और पोस्टर लेकर लोगों ने स्वास्तिक का उत्साह वर्धन किया।स्वास्तिक चिकारा के पिता दिनेश चिकारा दिल्ली पुलिस में एसआई है। उन्होंने बताया कि गांव के अधिकतर लोगों ने फाइनल मुकाबला देखने के लिए टिकट की बुकिंग कर ली थी। किसी ने बस की टिकट कराई तो किसी ने ट्रेन की। सभी को उम्मीद थी कि स्वास्तिक की टीम फाइनल जरूर खेलेगी और वैसा ही हुआ। दोपहर से ही स्वास्तिक के समर्थक स्टेडियम पहुंचने लगे थे। 31 अगस्त को मेरठ का पहला मुकाबला काशी रुद्रास से था, तब स्वास्तिक चिकारा आठ रन बनाकर आउट हो गए थे। 1 सितंबर को मेरठ का दूसरा मुकाबला कानपुर से हुआ, जिसमें स्वास्तिक चिकारा ने 100 रनों की नाबाद पारी खेली। 3 सितंबर को मेरठ का गोरखपुर से मुकाबला हुआ, जिसमे स्वास्तिक ने 101 रन बनाए। चौथा मुकाबला 5 सितंबर को नोएडा से हुआ। इस लीग में नोएडा की टीम सबसे मजबूत मानी जा रही थी। उसके खिलाफ भी स्वास्तिक ने नाबद 108 रनों की नाबाद पारी खेली। स्वास्तिक चिकारा के पिता ने पत्रकार वार्ता में कहा था कि मुझे उम्मीद है कि मेरा बेटा इस लीग में दोहरा शतक जरूर मारेगा। यह मेरा विश्वास कहता है, क्योंकि हम लोग उसकी कला को पहचानते हैं। स्वस्तिक वह काम कर दिखाता है जो हर कोई नहीं कर पता है। स्वास्तिक जो सोचता है उसे पूरा जरूर करता है। इसलिए मुझे विश्वास है कि वह इस लीग में दोहरा शतक मारेगा। पिता ने कहा कि स्वास्तिक चिकारा के लिए 100 रनों की पारी खेलना बड़ी बात नहीं है। इस तरह की परी वह कई बार मैदान में दिखा चुका है। मेरा सपना था कि स्वास्तिक T20 मैच में 200 रनों की परी खेले तब जाकर मुझे ज्यादा खुशी मिलेगी। मूल रूप से हरियाणा के छेदी अंतर निवासी सुरेंद्र सिंह चिकारा दिल्ली पुलिस में सब इंस्पेक्टर हैं, लेकिन सुरेंद्र सिंह 1988 से अपनी फैमिली के साथ गाजियाबाद के मुरादनगर में रह रहे हैं। परिवार में पत्नी सुधा तीन बेटियां और एक बेटा है। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके बाबा महा सिंह एक नेशनल एथलीट थे जो अंग्रेजों के घोड़े के साथ दौड़ते थे। उनके पिता हरबीर सिंह नेशनल एथलीट थे और वह खुद इंटरनेशनल एथलीट है। अब चौथी पीढ़ी में स्वास्तिक क्रिकेट में नाम रोशन कर रहा है। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि स्वास्तिक जब 5 साल की उम्र में था, तब से वह क्रिकेट खेल रहा है। उसके खेल को देखते हुए हम लोगों ने सोचा कि अब इसे क्रिकेट में ही आगे बढ़ाना है। इसलिए घर पर ही स्वास्तिक के लिए 12 पिच तैयार की, जिसमें से आठ पिच टर्फ और चार पिच सिमेंटेड है। घर पर कोच मोनू उसे प्रशिक्षण देते हैं। सुरेंद्र सिंह ने बताया कि स्वास्तिक की लाइफ में अधिवक्ता पिंटू राम शर्मा का एक बड़ा योगदान है, क्योंकि वह खुद एक क्रिकेटर है। भले ही वह इंडिया टीम के लिए नहीं खेल पाए लेकिन उनके अंदर क्रिकेट का ऐसा प्रेम है कि वह क्रिकेट को लेकर कुछ भी कर सकते हैं। उनका सपना भारतीय टीम में खेलने का था लेकिन वह पूरा नहीं हो पाया। इसलिए उन्होंने इस सपने को पूरा करने के लिए स्वास्तिक की हर संभव मदद की और उसे आगे बढ़ाया। स्वास्तिक का पहली बार 2014 में यूपी टीम में चयन हुआ था। 2020 में अंडर-19 में यूपी टीम में चयन हुआ। 2022 में रणजी टीम में चयन हुआ। स्वास्तिक ने ओपन क्रिकेट टूर्नामेंट के अलावा अंडर 14 और अंडर 16 टूर्नामेंट में 22 दोहरे शतक और सात तिहरे शतक लगाए हैं। स्वास्तिक चिकारा को जब भी कहीं ट्रायल देने के लिए जाना पड़ता था तो पिता दिल्ली पुलिस में होने के कारण अधिकतर समय उनका दिल्ली में ही जाता था, लेकिन मां सुधा स्वास्तिक को लेकर हर ट्रायल में जाती रही। गाजियाबाद से लेकर नोएडा, कानपुर, लखनऊ जहां भी ट्रायल हुआ वहां पर बेटे को लेकर सुधा पहुंची। उसी का नतीजा है कि ट्रायल में बेहतर प्रदर्शन दिखाकर स्वास्तिक ने यूपी टीम में जगह बनाने में कामयाब रहे। 

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