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 आस्था के साथ सनातनी वस्त्र पहने कोई भी कटे फटे, गलत कपड़े पहनकर पूजन न करे।

संवाददाता।
कानपुर। नगर में सावन के पहले सोमवार को लेकर मंदिरों में तैयारी पूरी कर ली गई। नगर के सैकड़ों साल पुराने प्राचीन मंदिर श्री आनंदेश्वर परमट मंदिर में सावन के पहले साेमवार पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के आएंगे। श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित रूप से दर्शन कराने के लिए मंदिर प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर लिया है। श्री आनंदेश्वर मंदिर परमट मंदिर गंगा घाट के किनारे बना हुआ है। इस मंदिर की देखरेख श्री पंच दशानम जूना अखाड़ा कानपुर के द्वारा की जाती है। मंदिर कमेटी के द्वारा पुलिस और जिला प्रशासन के साथ बैठक की गई। सावन भगवान भोलेनाथ का विशेष माह है। इस माह में सोमवार के दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए मंदिर में पहुंचते हैं। मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था का पूरा इंतजाम मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन के द्वारा किया गया है। मंदिर कमेटी के महंत श्री थानापति विवेक पुरी महाराज ने बताया की सावन के सोमवार पर पांच से सात लाख लोग मंदिर में दर्शन करने पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि रविवार रात 2 बजे से ही श्री आनंदेश्वर मंदिर के पट खोल दिए जाते हैं। शिवलिंग के दर्शन लोग लंबी कतारों में लगकर करते हैं। सावन के सोमवार में दरबार के पट समय-समय पर भोग और आरती के लिए बंद किए जाते हैं। देर रात 1 बजे तक भक्ति दर्शन करते हैं, इसके बाद पट बंद होता है। परमट मंदिर के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया की सावन के सोमवार पर यहां लोग रविवार की रात से ही कतारों में लग जाते हैं। रविवार को ही रात में भोग और आरती के बाद मंदिर कपाट बंद किया जाता है। इसके बाद से लोग दर्शन के लिए मंदिर के बाहर कतारों में लग जाते हैं। हजारों की संख्या में दर्शन करने के लिए कतार में लोग लगे रहते हैं। रात से लेकर दिन भर यह सिलसिला लगातार ऐसे ही चलता है। देर रात सोमवार पट बंद होने तक लाखों की संख्या में भक्त यहां दर्शन करते हैं। श्री आनंदेश्वर मंदिर के महंत ने कहा कि पिछले दिनों मंदिर में ड्रेस कोड लागू किए जाने की बात मीडिया और सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। पूरी तरह से ड्रेस कोड लागू किए जाने की बात अफवाह है। कोई ड्रेस कोड लागू नहीं किया गया है। लेकिन लोग कम से कम मंदिर में आस्था के साथ सनातनी वस्त्र पहनकर प्रवेश करें, यह मेरी अपील है। कोई भी कटे फटे और गलत कपड़े पहनकर पूजन न करे। धर्म आस्था के अनुसार यह उचित नहीं है। 

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