• प्रदेश से बाहर के लोगों को बांटे जा रहे रेवड़ियों की तरह पद?
• स्थानीय और योग्य खिलाड़ियों के भविष्य के साथ हो रहा है खिलवाड़?
• संघ के आलाकमान की अनुकंपा से हर साल मजबूत हो रहा खास लोगों का कुनबा।

संवाददाता
कानपुर। उत्तर प्रदेश की माटी से निकलने वाले युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी घरेलू क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने और उचित प्लेटफॉर्म पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संघ के भीतर ऐसे लोगों को मलाईदार और महत्वपूर्ण पदों से नवाजा जा रहा है जिनका यूपी क्रिकेट से दूर-दूर तक कोई नाता या प्रतिनिधित्व का इतिहास ही नहीं रहा है।यूपी की प्रतिभाओं की अनदेखी और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का काम बदस्तूर जारी है।
यह स्थिति तब है जब उत्तर प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश के कोने-कोने में ऐसे शानदार खिलाड़ी मौजूद हैं जो अपनी कड़ी मेहनत के दम पर देश और प्रदेश का नाम रोशन करने का माद्दा रखते हैं, लेकिन उन्हें न तो उचित प्लेटफॉर्म मिल रहा है और न ही पारदर्शी चयन प्रक्रिया का लाभ। यूपीसीए के सूत्र बताते हैं कि बाहर से आने वाले लोगों के कारण प्रदेश के पूर्व खिलाड़ियों को मौका नहीं मिल पा रहा है। सामने आए आधिकारिक आंकड़ों (क्रिकेट करियर स्टैट्स) इस बात की गवाही देते हैं कि यूपीसीए में जिम्मेदार पदों पर काबिज किए जा रहे इन चेहरों का अपना घरेलू क्रिकेट का रिकॉर्ड क्या कहता है:
मुमताज कादिर
जन्म व पृष्ठभूमि: 17 नवंबर 1986 को इलाहाबाद में जन्मे मुमताज कादिर के करियर रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उन्होंने अपने क्रिकेट सफर के दौरान ‘सर्विसेज’ और अन्य टीमों का प्रतिनिधित्व किया है।
प्रथम श्रेणी आंकड़े: 10 मैचों की 18 पारियों में मात्र 267 रन (औसत 16.68)।
लिस्ट ए आंकड़े: 13 मैचों में 224 रन (औसत 20.36)।
सवाल: जो खिलाड़ी कभी खुद उत्तर प्रदेश की सीनियर टीम से नहीं खेला, वह आज किस हैसियत और किस बलबूते पर यूपीसीए के सपोर्टिंग स्टाफ या महत्वपूर्ण भूमिका में नियुक्त किया जा रहा है?
ध्रुव सिंह :
जन्म व पृष्ठभूमि: 02 मई 1986 को जन्मे ध्रुव सिंह मुख्य रूप से हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े रहे हैं और उनके करियर का अधिकांश हिस्सा व आंकड़े हरियाणा टीम से खेलते हुए दर्ज हैं।
सवाल: दूसरे राज्यों से ताल्लुक रखने वाले और यूपी क्रिकेट के लिए कभी मैदान पर पसीना न बहाने वाले ध्रुव सिंह को उत्तर प्रदेश के सेटअप में किस विशेष योग्यता के तहत जगह दी जा रही है?
सौरभ दुबे :
जन्म व पृष्ठभूमि: 01 दिसंबर 1988 को गोरखपुर में जन्मे सौरभ दुबे के करियर रिकॉर्ड में मुख्य रूप से त्रिपुरा और अन्य टीमों का प्रतिनिधित्व दर्ज है।
प्रथम श्रेणी आंकड़े: 9 मैचों में 276 रन और गेंदबाजी में मात्र 1 विकेट।
सवाल: यूपी के घरेलू क्रिकेट ढांचे से बाहर रहकर खेलने वाले ऐसे चेहरों को यूपीसीए में लगातार क्यों और किसके इशारे पर एडजस्ट किया जा रहा है?
इन तीनों ही व्यक्तियों के करियर आंकड़ों और उनकी पृष्ठभूमि से यह साफ जाहिर होता है कि इन्होंने अपने खेल के दिनों में कभी भी उत्तर प्रदेश की मुख्य टीम का प्रतिनिधित्व नहीं किया है। इसके बावजूद, इन्हें यूपीसीए में सपोर्टिंग स्टाफ या अहम पदों पर नियुक्त किया जाना कई बड़े सवाल खड़े करता है।
खेल प्रेमियों और जानकारों का कहना है कि यह लोग हर साल अपनी पकड़ और टीम को मजबूत करते जा रहे हैं। आखिर यह सब किसके बलबूते पर हो रहा है? क्या इसके पीछे संघ के किसी बड़े ‘आलाकमान’ की हरी झंडी और संरक्षण प्राप्त है?
यदि बाहरी या कभी यूपी के लिए न खेलने वाले लोगों को ही संघ के पदों पर बैठाया जाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब यूपी की उभरती हुई खेल प्रतिभाएं हताश होकर मैदान छोड़ने को मजबूर हो जाएंगी। अब देखना यह है कि क्या यूपीसीए का शीर्ष नेतृत्व इस मनमानी पर कोई जवाब देता है या फिर राजनीति का यह खेल यूं ही परवान चढ़ता रहेगा।इससे भी बड़ी बात ये है कि संघ का कोई भी पदाधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से मन करता आ रहा है,जबकि सूत्रों का कहना है कि आलाकमान चाहे तो सब ठीक हो सकता है।






