August 29, 2026

• अभिषेक गोस्वामी पर बैन, कुणाल त्यागी पर कार्रवाई क्यों नहीं?

संवाददाता

कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट में एक नया विवाद यूपीसीए की अनुशासनात्मक कार्रवाई और समान व्यवहार को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। 28 अगस्त को खेले गए मुकाबले के दौरान काशी रुद्रा के खिलाड़ी अभिषेक गोस्वामी और नोएडा टीम के कुणाल त्यागी के बीच कथित विवाद के बाद अभिषेक पर प्रतिबंध लगाए जाने की चर्चा है। लेकिन सवाल यह है कि जब विवाद दो खिलाड़ियों के बीच हुआ था तो कुणाल त्यागी की भूमिका की जांच हुई या नहीं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
सूत्रों के मुताबिक मैच के दौरान दोनों खिलाड़ियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया था और मामला शांत कराने के लिए अन्य लोगों को बीच में आना पड़ा। हालांकि विवाद की वास्तविक वजह और दोनों खिलाड़ियों की भूमिका को लेकर यूपीसीए की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
यही कारण है कि क्रिकेट गलियारों में यूपीसीए की कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हैं। यदि अभिषेक गोस्वामी को मैदान पर हुई किसी घटना का दोषी मानते हुए प्रतिबंधित किया गया है तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या कुणाल त्यागी से भी पूछताछ हुई, उनका बयान लिया गया और उनकी भूमिका की जांच की गई?
28 अगस्त के मुकाबले में अभिषेक ने 34 गेंदों पर 63 रन की शानदार पारी खेली थी, जबकि कुणाल त्यागी ने गेंदबाजी में 46 रन देकर एक विकेट लिया। हालांकि प्रदर्शन का इस अनुशासनात्मक मामले से कोई संबंध नहीं है। असली सवाल केवल इतना है कि मैदान पर वास्तव में क्या हुआ और कार्रवाई किस आधार पर की गई?
क्रिकेट से जुड़े सूत्रों के बीच यह चर्चा भी है कि कुणाल त्यागी पर कार्रवाई होने की स्थिति में यूपीसीए के कुछ प्रभावशाली लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ सकता था। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और इन्हें तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। लेकिन ऐसी चर्चाओं को समाप्त करने की जिम्मेदारी यूपीसीए की ही बनती है।
अब यूपीसीए को स्पष्ट करना चाहिए कि अभिषेक गोस्वामी पर प्रतिबंध किस नियम के तहत लगाया गया, क्या पूरे घटनाक्रम की औपचारिक जांच हुई, क्या अंपायरों और मैच अधिकारियों के बयान लिए गए तथा क्या दोनों खिलाड़ियों के लिए समान अनुशासनात्मक मानदंड अपनाए गए।
उत्तर प्रदेश क्रिकेट में खिलाड़ियों का भरोसा तभी कायम रहेगा, जब कार्रवाई नाम और प्रभाव के आधार पर नहीं, बल्कि नियमों और तथ्यों के आधार पर होती दिखाई दे। अब निगाह यूपीसीए पर है कि वह इस विवाद पर अपना आधिकारिक पक्ष कब और कैसे स्पष्ट करता है।

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