August 26, 2026

• पांच सदस्यीय टैलेंट सर्च कमेटी से निष्पक्षता और पारदर्शिता की उम्मीद।


संवाददाता
कानपुर। क्रिकेट के इस सत्र में उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन ने दशकों पूर्व रिटायर हो चुके उन धुंघली निगाहों को राज्य में क्रिकेटिंग प्रतिभाओं को तलाशने का कार्य सौंपा हैं जिन्हें शायद गेंद की स्विंग ,स्पिन और बल्ले से कौन सा स्ट्रोक खेला गया वो भी ठीक से समझ ना आता हो। बताते चलें कि  टी-20,एक दिवसीय , रणजी ट्रॉफी आदि क्रिकेट प्रतियोगिता की टीमों में  शामिल करने के लिये उभरते खिलाड़ियों के प्रदर्शन को परखकर उन्हें आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी जिन पूर्व चयनकर्ताओं को सौंपी गई है, उनके चयन को लेकर क्रिकेट से जुड़े लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है।नई प्रतिभाओं को परखने के लिए क्या फिर उन्हीं पुराने चेहरों पर भरोसा किया गया है उनकी चयन प्रक्रिया को लेकर अतीत में सवाल उठते रहे हैं?या ये कहा जाए कि उन्होंने कभी भी उपयुक्त खिलाड़ी को टीम में चयनित होने का ही अवसर नहीं दिया था।
यूपीसीए ने टैलेंट सर्च कमेटी में कानपुर के गोपाल शर्मा, मेरठ के प्रवीण कुमार, कानपुर के शशिकांत खांडेकर, कानपुर के राहुल सप्रू और अलीगढ़ के रिजवान शमशाद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है जो शायद उम्र के उस पड़ाव को पार कर चुके हैं जिसमें बाज़ की निगाहों से सबकुछ पकड़ में आ जाता हो।एक सब कमेटी के चेयरमैन संजय कपूर की ओर से नियुक्त की गई कमेटी में शामिल सभी सदस्य पूर्व में यूपी टीम के चयनकर्ता रह चुके हैं। ऐसे में प्रदेश के विभिन्न जिलों से सामने आ रही युवा प्रतिभाओं के चयन की जिम्मेदारी अनुभवी चेहरों को दिए जाने को यूपीसीए अपने निर्णय के तौर पर उचित ठहरा सकता है, लेकिन इन चेहरों के अतीत को लेकर उठते रहे सवाल अब पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस छेड़ रहे हैं।क्रिकेट जगत में समय-समय पर कमेटी में शामिल कुछ पूर्व चयनकर्ताओं पर रिश्वत लेकर खिलाड़ियों को मैच खिलाने अथवा चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसे आरोप लगाए जाते रहे हैं।  बावजूद इसके, ऐसे आरोप चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर सवाल जरूर खड़े करते हैं।टैलेंट सर्च का मकसद उन खिलाड़ियों तक पहुंचना है, जिन्हें बड़े क्रिकेट केंद्रों और प्रभावशाली सिफारिशों के अभाव में अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में चयनकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। एक गलत नजर किसी प्रतिभा का रास्ता रोक सकती है, जबकि सही पहचान किसी युवा के क्रिकेट करियर को नई ऊंचाई दे सकती है।प्रदेश के क्रिकेट प्रेमियों का सवाल है कि क्या यूपीसीए टैलेंट सर्च की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए खिलाड़ियों के प्रदर्शन का रिकॉर्ड सार्वजनिक करेगा? क्या चयन के स्पष्ट मापदंड तय किए गए हैं? क्या प्रत्येक खिलाड़ी के प्रदर्शन का तकनीकी मूल्यांकन होगा और क्या चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव की गुंजाइश नहीं होगी?नई प्रतिभाओं की तलाश के लिए बनी कमेटी की सबसे बड़ी कसौटी यही होगी कि चयन मैदान पर प्रदर्शन के आधार पर हो, न कि नाम, पहचान या सिफारिश के आधार पर। पूर्व क्रिकेटर अरविंद सिंह के मुताबिक यूपीसीए की इस ‘धुंधली निगाहों’ वाली इस पांच सदस्यीय कमेटी की नजर प्रदेश के असली क्रिकेटिंग हुनर को कितनी साफगोई से पहचान पाती है या फिर उनकी निगाहें केवल कागजों पर सीमित रहेंगी जो आलाकमान से हस्ताक्षरित होकर सबके सामने आती है और उसपर मुहर लगना शेष रह जाता है। इस मामले में बात करने के लिए संघ के सचिव प्रेम मनोहर गुप्‍ता ने किसी प्रकार का जवाब ही नही दिया।

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