• महिलाओं, युवाओं समेत 200 से अधिक लोगों ने किया रक्तदान

ओसामा रसूल
कानपुर। नगर में रविवार का दिन मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहा। जश्न-ए-चराग़ा के पावन अवसर पर ज़िया ए नबी फाउंडेशन द्वारा नई सड़क पर आयोजित रक्तदान शिविर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इस शहर की मिट्टी में सेवा और भाईचारे की गहरी जड़ें हैं। सुबह 11 बजे शुरू हुआ यह सिलसिला देर शाम तक बिना रुके चलता रहा, जहाँ एक तरफ आस्था का जुनून था तो दूसरी तरफ किसी अनजान की जान बचाने की बेचैनी। रक्तदान शिविर धीरे-धीरे रक्तदाताओं की कतारों से पाट गया, जिनमें नौजवानों के साथ-साथ बुजुर्ग भी शामिल थे, और खास बात यह रही कि इस बार महिलाओं ने भी रक्तदान शिविर में पहुंच रक्तदान कर सभी को चौंका दिया। पूरा माहौल किसी त्योहार जैसा लग रहा था, क्योंकि शिविर में लोग अपना कीमती खून बिना किसी मोल-तोल के दे रहे थे, सिर्फ इस नियत से कि कहीं कोई ज़रूरतमंद मरीज खून की कमी से न मरे।

सुबह की शुरूआत में संस्था के पदाधिकारियों ने औपचारिक कार्य प्रारंभ किए, चिकित्सकों ने अपनी कुर्सियाँ संभालीं। रक्तदान से पहले हर दाता की हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, वजन और शुगर जैसी पूरी जाँच की गई, तभी स्वस्थ पाए जाने वाले दाताओं को रक्तदान के लिए शिविर में भेजा गया। संस्था ने इस बात का खास ख्याल रखा कि किसी को चक्कर या कमजोरी का सामना न करना पड़े, इसलिए रक्तदान के तुरंत बाद हर व्यक्ति को ताजे फल, मीठा जूस और पानी उपलब्ध कराया गया। इस बीच, पूरे परिसर में डॉक्टरों की एक पूरी टीम और पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहा, जिससे हर आपात स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी थी।
इस आयोजन का सबसे दिल छू लेने वाला पल तब आया जब संस्था के संस्थापक और अध्यक्ष हाजी ज़िया उल हक ने रक्तदाताओं के बीच कदम रखा। उन्होंने बड़ी ही भावुकता के साथ कहा कि पिछले 10 सालों से वे इस पुनीत कार्य को कर रहे हैं और हर साल जश्न-ए-चराग़ा पर यह शिविर लगाने के पीछे उनका मानना है कि किसी बेडौल मरीज को नई जिंदगी देना सबसे बड़ी धार्मिक सेवा है। आँखों में नमी लिए उन्होंने कहा कि जब उन्होंने आज लगभग 200 से अधिक लोगों को बिना किसी लालच के अपना रक्त दान करते देखा, तो उन्हें अपने समाज पर गर्व महसूस हुआ। उन्होंने कहा, “ये जवान ही हमारी असली ताकत हैं। मैं हर उस शख्स को सलाम करता हूँ जिसने आज किसी अनजान के लिए अपनी बाजू चढ़ाई। हमारा मकसद सिर्फ ब्लड इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि हर घर में यह पैगाम पहुँचाना है कि रक्तदान सबसे बड़ा महादान है।” उन्होंने यह भी विश्वास दिलाया कि आज संग्रहित सारा रक्त जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक को भेजा जाएगा, जिससे थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चे, सड़क हादसों के शिकार मरीज और प्रसव के दौरान मुश्किलों का सामना कर रही गर्भवती महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा।

इस पवित्र मौके पर शहर की जानी-मानी हस्तियों ने भी शिरकत करके संस्था का हौसला बढ़ाया। आर्यनगर विधानसभा से विधायक अमिताभ बाजपाई शिविर स्थल पर पहुँचे और उन्होंने न सिर्फ रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र बाँटे, बल्कि उनके हर एक का हाथ पकड़कर उनका धन्यवाद किया। उन्होंने अपने संबोधन में ज़िया ए नबी फाउंडेशन को कानपुर की वह मिसाल बताया, जो अपने सामाजिक दायित्व को बखूबी निभा रही है। इसके अलावा, समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक सभा के राष्ट्रीय सचिव इम्तियाज़ रसूल कुरैशी और उनके साथ शाहबाज़ रसूल कुरैशी भी इस अवसर पर मौजूद रहे। इम्तियाज़ रसूल ने इस आयोजन को गंगा-जमुनी तहज़ीब की जीती-जागती तस्वीर बताते हुए कहा कि इस शिविर में हर धर्म, हर जाति और हर वर्ग के लोग एक साथ आए, यही हमारे देश और इस शहर की सबसे बड़ी खूबसूरती है। शाहबाज़ रसूल ने भी युवा पीढ़ी से आह्वान किया कि वे नियमित रूप से रक्तदान करके समाज का कर्ज उतारें।

शिविर में केवल रक्त संग्रहण ही नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को लेकर आयोजक बेहद गंभीर थे। इसके अलावा, कानून-व्यवस्था को लेकर कोई कोताही नहीं बरती गई। थाना अनवरगंज प्रशासन ने संस्था के अनुरोध पर शिविर स्थल के आसपास पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया, जिसमें महिला कर्मी भी खास तौर पर शामिल थीं। यातायात पुलिस की मौजूदगी ने यह सुनिश्चित किया कि नई सड़क पर वाहनों की रफ्तार धीमी रहे और पार्किंग के लिए व्यवस्थित इंतजाम हो, ताकि राहगीरों और आम नागरिकों को किसी तरह की दिक्कत न हो। आग लगने या किसी अनहोनी से निपटने के लिए अग्निशमन उपकरण और एम्बुलेंस भी मौके पर खड़ी रही।
देर शाम जब शिविर की समाप्ति की घोषणा हुई, तो आयोजकों के चेहरों पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। संस्थापक हाजी ज़िया उल हक ने अंत में सभी से माइक पर संक्षिप्त में बात करते हुए कानपुर पुलिस कमिश्नरेट, स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम और खास तौर पर विधायक अमिताभ बाजपाई तथा समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक सभा के राष्ट्रीय सचिव इम्तियाज़ रसूल कुरैशी का दिल से धन्यवाद किया, जिन्होंने अपना बहुमूल्य समय निकालकर रक्तदाताओं को प्रोत्साहित किया। उन्होंने यह वादा दोहराया कि आने वाले समय में यह सेवा कार्य और तेजी के साथ आगे बढ़ेगा और हर साल इन शिविरों का दायरा बढ़ता जाएगा, ताकि कानपुर शहर रक्त की कमी से जूझने वाला न रहे, बल्कि रक्तदान में अग्रणी शहर बने।






