
संवाददाता
कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) के भीतर चल रही खींचतान और खेमेबाजी की तस्वीर फिर से ग्रीनपार्क में सामने आ गई। यूपी टी-20 लीग के कानपुर चरण का आगाज के दौरान मैदान पर खिलाड़ियों ने खेल भावना का प्रदर्शन किया, लेकिन मैदान के बाहर प्रदेश क्रिकेट के जिम्मेदार पदाधिकारी एकजुटता का संदेश देने में नाकाम नजर आए। लीग का उद्घाटन समारोह यूपी क्रिकेट की ताकत दिखाने के बजाय संगठन के भीतर चल रहे अलग-अलग धड़ों की कहानी बयां करता दिखाई दिया।इसके पीछे का घटनाक्रम ये है कि लखनऊ वाले चरण में लीग के आखिरी मैच में यूपीसीए सचिव प्रेम मनोहर गुप्ता और लीग के चेयरमैन संजय कपूर के बीच लीग के आखिरी मैच में घंटा बजाने को लेकर काफी कहा सुनी हो गई थी ,जिसमें चेयरमैन ने सचिव से ये तक कह डाला कि सब टाइम पर होगा किसी का इंतजार नहीं किया जाएगा। यूपीसीए के सूत्र बताते हैं कि चेयरमैन के इतना कहते ही सचिव का पारा चढ़ गया और बात आगे बढ़ने लगी,तो कई अधिकारियों को समझौता कराने के लिए आगे आना पड़ा ,सचिव वहां से नाराजगी दिखाते हुए तत्काल प्रभाव से लखनऊ से कानपुर के लिए कूच कर गए।यही नहीं उसके दूसरे दिन चेयरमैन ने ग्रीनपार्क पहुंचे सचिव से मैच के शुभारम्भ को लेकर अधिकारियों के पास चलने को कहा तो वो भड़क गए और अपने पद की गरिमा का ख्याल रखने की हिदायत दे डाली तो कोषाध्यक्ष ने बीच बचाव कर मामले को शांत करवाने का काम करवाया।इसका जीता जागता सबूत शुक्रवार को कानपुर के पहले मैच में देखने को मिला जहां सभी तो साथ लेकिन अलग थलग दिखाई दिए।ग्रीनपार्क में आयोजित लीग के कानपुर सत्र की शुरुआत के मौके पर यूपीसीए के पदाधिकारियों की मौजूदगी तो रही, लेकिन उनकी मौजूदगी में भी एकरूपता नजर नहीं आई। कार्यक्रम में किसकी भूमिका कितनी अहम रही और किसने किससे दूरी बनाए रखी, यह चर्चा का विषय बना रहा। खास बात यह रही कि यूपीसीए के सचिव और कोषाध्यक्ष की भूमिका महज औपचारिकता तक सिमटी दिखाई दी। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब प्रदेश की प्रतिष्ठित टी-20 लीग का आयोजन यूपीसीए के बैनर तले हो रहा हो, तब संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों के बीच समन्वय और सक्रियता क्यों नजर नहीं आई?
लीग के आयोजन में कानपुर क्रिकेट से जुड़े पदाधिकारियों और यूपीसीए के जिम्मेदारों की सक्रियता को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। ग्रीनपार्क जैसे ऐतिहासिक मैदान पर प्रदेश स्तरीय लीग की शुरुआत को यूपी क्रिकेट के लिए बड़ा अवसर माना जा रहा था, लेकिन आयोजन के दौरान जिस तरह पदाधिकारियों की अलग-अलग सक्रियता दिखाई दी, उसने संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए।
क्रिकेट से जुड़े जानकारों के बीच यह चर्चा भी रही कि प्रदेश संघ की किसी बड़ी प्रतियोगिता के शुभारंभ पर पदाधिकारियों का एक मंच पर मजबूती से खड़ा होना खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों के बीच सकारात्मक संदेश देता है। मगर यहां परिस्थितियां इसके उलट दिखाई दीं। लीग तो एक थी, लेकिन जिम्मेदारों की मौजूदगी और सक्रियता में जैसे कई धड़े नजर आ रहे थे।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रदेश में नई क्रिकेट प्रतिभाओं को मंच देने के उद्देश्य से शुरू की गई लीग के पीछे प्राथमिकता आखिर क्या है—खिलाड़ियों का भविष्य या पदाधिकारियों की आपसी खींचतान? अगर संगठन के प्रमुख पदों पर बैठे लोग ही किसी बड़े आयोजन में एकजुट नजर नहीं आएंगे तो युवा खिलाड़ियों और क्रिकेट प्रेमियों के बीच क्या संदेश जाएगा? यूपी के पूर्व रणजी खिलाड़ी रह चुके एक शख्स ने बताया कि ग्रीनपार्क में उद्घाटन के दौरान दिखी तस्वीर ने यूपीसीए की अंदरूनी व्यवस्था को लेकर चर्चाओं को जरूर हवा दे दी। आयोजन खत्म हो जाएगा, मैचों के परिणाम भी सामने आ जाएंगे, लेकिन सवाल यह रहेगा कि प्रदेश क्रिकेट को दिशा देने वाला संघ आखिर एकजुट कब दिखेगा?





