July 12, 2026

गूगल ने पुलिस को दी थी जानकारी।

संवाददाता

कानपुर। पुलिस ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़े मामले में एक युवक को गिरफ्तार किया है । आरोपी ने पुलिस पूछताछ में कई खुलासे किए है । उसने बताया- वह अपने घर में आने वाले हर रिलेटिव का अश्लील वीडियो बनाता था। जब भी कोई रिलेटिव उसके घर आता तो वह बाथरूम में कैमरे छिपा देता था।

क्लिप बनाने के बाद उन्हें ब्लैकमेल करने में उसे मजा आता था। वहीं साइबर टीम को आरोपी के दो मोबाइल मिले हैं। जब उसकी जांच की गई तो उसमें 20 से 25 अश्लील वीडियो थे।

पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया- वह तीन साल से अपनी बहन, 10 साल की भतीजी के साथ भी गंदी हरकत कर चुका है। भतीजी के साथ बैडटच का भी आरोपी ने वीडियो बनाया है।

आरोपी ने पुलिस को बताया- मेरे दिमाग में पोर्न ही घूमता रहता था। तीन साल पहले बहन का बाथरूम में कपड़े बदलते हुए वीडियो बनाया था। फिर मैंने उसी को ब्लैक मेल करके गंदी हरकत की। उसका भी मैंने प्राइवेट वीडियो बना लिया था। इसके बाद मेरा डर खत्म हो गया।

आरोपी ने कहा- मैंने सोचा फिर अपने ही घर से वीडियो बनाता हूं। इसके बाद मैंने चाची और भाभी के भी प्राइवेट वीडियो बनाए। इसके बाद उनके साथ भी शारीरिक संबंध बनाए।

चमनगंज में डायपर बेचने वाले 26 साल के युवक ने अपनी बहन, 10 साल की भतीजी समेत घर आने जाने वाले रिश्तेदारों के पोर्न वीडियो बना लिए। इसके बाद गूगल ड्राइव पर वीडियो को अपलोड कर दिए। गूगल से इसकी जानकारी राष्ट्रीय लापता एवं शोषित बाल केंद्र के पोर्टल पर आई, फिर शिकायत दर्ज हुई।

एडिशनल डीसीपी क्राइम अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि 6 जुलाई को सेंट्रल जोन साइबर पुलिस को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए महिलाओं और बच्चों से जुड़े गंभीर अपराध की जानकारी मिली थी।

टिप लाइन मिलने के बाद साइबर पुलिस की दो टीमों ने गोपनीय तरीके से इसकी जांच शुरू की। साइबर टीम को गूगल से आरोपी का नाम, उसके मोबाइल का आईएमईआई नंबर, ई-मेल आईडी और अन्य डिजिटल डिटेल मिली थी। इसके बाद पुलिस ने आईपी एड्रेस के जरिए चमनगंज के रहने वाले युवक की पहचान की और उसे गिरफ्तार किया।

पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी युवक हाईस्कूल पास है। वह बच्चों के डायपर बेचने का काम करता है। उसने वीडियो और तस्वीरों को मोबाइल से हटाकर गूगल ड्राइव में सेव किया था, जिसे गूगल ने फ्लैग किया। इसके बाद पुलिस को जानकारी भेजी।

डीसीपी अंजलि विश्वकर्मा ने कहा कि लोग अक्सर फोन में मौजूद वीडियो या फोटो को सुरक्षित रखने के लिए गूगल ड्राइव का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इस मामले में आपत्तिजनक कंटेंट होने के कारण इसे गूगल ने फ्लैग किया और पुलिस को जानकारी मिली।

गूगल ड्राइव पर अपलोड होने वाले कंटेंट की निगरानी के लिए कंपनी सुरक्षा सिस्टम और तकनीकी टूल का इस्तेमाल करती है। अगर कोई फाइल चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल जैसे प्रतिबंधित कंटेंट से जुड़ी मिलती है, तो उसे फ्लैग किया जा सकता है।

ऐसे मामलों में कंपनी कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित एजेंसियों को जानकारी साझा करती है। इसमें अकाउंट डिटेल, ई-मेल, आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल जानकारी शामिल होता है, जिसके आधार पर पुलिस आरोपी तक पहुंचती है।

गूगल ड्राइव में ऐसा कंटेंट रखना या शेयर करना प्रतिबंधित है, जो गूगल की नीतियों या कानून का उल्लंघन करता हो। इसमें बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (चाइल्ड सेक्सुअल एब्यूज मटेरियल ), आतंकवादी या हिंसक चरमपंथी प्रचार सामग्री, कॉपीराइट का उल्लंघन करने वाली सामग्री शामिल हैं।