July 8, 2026


संवाददाता
कानपुर। यूपी टी-20 लीग के चौथे सत्र से पहले एक बार फिर चयन प्रक्रिया और टीम संचालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। क्रिकेट से जुड़े सूत्रों और पूर्व पदाधिकारियों का दावा है कि लीग का चेयरमैन कोई भी हो, लेकिन कुछ फ्रेंचाइजी टीमों का वास्तविक नियंत्रण अब भी तथाकथित “सुपर सेलेक्टर” के प्रभाव में ही सीमित रहता है।
सूत्रों के अनुसार, यूपीसीए के पूर्व सचिव के निजी सचिव रहे अकरम सैफी पिछले चार वर्षों से टीमों  के संचालन में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।  उन पर आरोप है कि उनके करीबी लोग टीम के कैंप के आयोजन से लेकर खिलाड़ियों के चयन और अंतिम एकादश तक की तैयारी में सक्रिय रहते हैं। इतना ही नहीं, टीम की रणनीति और पूरे अभियान पर भी उन्हीं का प्रभाव माना जाता है।
क्रिकेट जगत में यह चर्चा भी तेज है कि पिछले सत्र में नोएडा किंग्स के निराशाजनक प्रदर्शन के पीछे भी इसी व्यवस्था को जिम्मेदार माना गया था। टीम अंक तालिका में छठे स्थान पर रही थी। अब नए सत्र से पहले भी दावा किया जा रहा है कि पर्दे के पीछे से टीम के संचालन में वही प्रभाव बरकरार है, जबकि फ्रेंचाइजी मालिक की भूमिका मुख्य रूप से वित्तीय सहयोग तक ही सीमित दिखाई देती है।
क्रिकेट से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि टीम प्रबंधन, चयन और रणनीति पर बाहरी प्रभाव हावी रहेगा तो फ्रेंचाइजी मॉडल की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उनका मानना है कि लीग का उद्देश्य प्रतिभाओं को निष्पक्ष मंच देना है, लेकिन यदि निर्णय कुछ चुनिंदा लोगों के इर्द-गिर्द सिमट जाएं तो खिलाड़ियों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।यूपीसीए के विश्वसनीय सूत्रों का यह भी दावा है कि संबंधित व्यक्ति के प्रभाव के चलते यूपीसीए का कोई भी पदाधिकारी खुलकर विरोध करने की स्थिति में नहीं दिखता। यही कारण है कि वर्षों से उठ रहे सवालों के बावजूद व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आ रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही यूपीसीए अथवा संबंधित पक्ष की ओर से इस संबंध में कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। ऐसे में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि यदि इस तरह के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच हो, ताकि यूपी टी-20 लीग की विश्वसनीयता और निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का उचित समाधान हो सके। यही नहीं इस मामले में अकरम सैफी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क साधा गया लेकिन उन्होंने उदासीनता से दूरभाष पर चुप्पी साध ली।

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