July 2, 2026

10 डाक्टरों समेत 40 लोग बनाए गए गवाह।

संवाददाता

कानपुर। नगर में बेहद चर्चित रहे अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले में 14 आरोपियों के खिलाफ रावतपुर पुलिस ने एक हजार पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है। 
न्यायालय में दाखिल की गईं चार्जशीट में मुजफ्फरनगर की किडनी रेसीपिएंट पारुल तोमर, डोनर आयुष कुमार चौधरी, एसीएमओ रमित रस्तोगी, हैलट अस्पताल व लखनऊ के राममनोहर लोहिया हॉस्पिटल के कुल 10 डॉक्टरों समेत 40 लोगों को गवाह बनाया गया है।

पुलिस ने मुकदमें में संगठित गिरोह की धाराएं बढ़ाई है। गिरोह का सरगना इंटर पास रोहित तिवारी को बनाया गया है, जबकि डॉ. प्रीति आहूजा उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा समेत अन्य लोग गैंग मेंबर बनाए गए है।
डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि पूरे मामले की विवेचना रावतपुर थाने में तैनात दरोगा मनोज कुमार विश्वकर्मा कर रहे थे। डॉक्टर दंपति प्रीति आहूजा, सुरजीत आहूजा समेत 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली ने कोर्ट में समर्पण कर दिया था।
वहीं पारूल तोमर की किडनी ट्रांसप्लांट में 22 लाख रुपए लेकर नोटों की गडि्डयों पर लेटने वाले डॉ. अफजाल ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली थी। पुलिस ने उसके खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया है।
कानपुर में रावतपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में 29 मार्च को अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का मामला सामने आया था। 

कल्याणपुर के मेडलाइफ हॉस्पिटल में बिहार, बेंगूसराय का डोनर आयुष कुमार चौधरी और प्रिया अस्पताल के डीलक्स रूम में मुजफ्फर नगर की पारुल तोमर भर्ती मिली थी।
23 साल के आयुष से उसकी किडनी 6 लाख रुपए में खरीदी गई थी। बाद में महिला मरीज प्रिया तोमर को करीब 80 लाख रुपए में बेच दी गई थी। किडनी देने वाले छात्र ने ही पुलिस से शिकायत की थी, इसके बाद पुलिस ने मेडलाइफ हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में एक साथ छापेमारी की थी। जिस पर इस किडनी रैकेट का खुलासा हुआ था।
जांच में सामने आया था कि किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए लखनऊ और दिल्ली से डॉक्टरों की टीम आती थी। देश के अलग-अलग राज्यों से युवकों को जाल में फंसाकर किडनी का सौदा किया जाता था।
अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में शामिल आहूजा अस्पताल की डॉ. प्रीति आहूजा उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह व एजेंट शिवम अग्रवाल, डॉ. रोहित, ओटी मैनेजर राजेश कुमार और ओटी संचालक कुलदीप सिंह राघव, ड्राइवर परवेज सैफी, ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली समेत 13 आरोपियों को जेल भेजा गया था।
डीसीपी वेस्ट ने बताया कि मुकदमे में संगठित गिरोह की धाराएं बढ़ाई गई हैं। चार्जशीट में एसीएमओ रमित रस्तोगी, पारूल और आयुष का इलाज करने वाले हैलट अस्पताल व राम मनोहर लोहिया के पांच–पांच डॉक्टरों, कल्याणपुर सीएचसी प्रभारी, 20 पुलिसकर्मी, पारूल तोमर, उसके पति विकास तोमर, भाई दिव्यांक तोमर समेत 40 लोगों को बतौर गवाह शामिल किया गया हैं।
डीसीपी वेस्ट ने बताया कि आयुष और पारुल दो बार ट्रेन के जरिए कानपुर आए थे। जिसकी टिकट उन्होंने ऑनलाइन बुक की थी। डोनर, रेसीपिएंट के दोनों टिकट चार्जशीट में शामिल किए गए है। इसके साथ ही ट्रांसप्लांट के दौरान पारुल अपने पति विकास व भाई दिव्यांक के साथ बिठूर रोड पर स्थित सत्यम होटल में रुके थे। पुलिस ने होटल के रजिस्टर व आधार कार्ड की फोटो कॉपी को भी सबूत बनाया है।
साथ ही गिरफ्तार आरोपियों की बीच हुई बातचीत की कॉल डिटेल रिकॉर्ड, आयुष और शिवम अग्रवाल के बीच हुई बातचीत की वाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट, एजेंट शिवम के मोबाइल से मिले ऑडियो, वीडियो को सबूत के रूप में कोर्ट में दाखिल किया गया है।