June 27, 2026

• इतना पीटा की कान का पर्दा तक फट गया।

संवाददाता

कानपुर। 5 साल तक बेगुनाह जेल में रहे बिधनू के रहने वाले अमीन लायल ने अपना दर्द बताया कि 25 मई 2021 की रात बिधनू थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर विनोद कुमार सिंह के साथ कुछ पुलिसवाले घर आ गए। उन्होंने पूछा कि विक्की कौन है…? मैंने उनसे कहा कि मेरा नाम अमीन लायल है, लेकिन वो नहीं माने और मुझे उठाकर थाने ले गए। वहां उन्होंने मुझे जमकर पीटा और कहा कि कबूल करो कि तुम ही विक्की हो। पुलिसवालों ने मुझे इतना पीटा की मेरे कान का पर्दा तक फट गया।

मुझे एक कान से आज तक सुनाई नहीं देता है। मेरे पिता थाने में मेरी बेगुनाही के सबूत देते रहे, लेकिन पुलिसवालों ने नहीं सुनी और 2 दिन थाने में बिठाने के बाद मुझे विक्की बताकर जेल भेज दिया, मुझे आज तक नहीं पता चला कि किस वजह से पुलिसवालों ने मुझे जेल में ठूंस दिया था। मैं विक्की नहीं हूं… यह साबित करने में मेरे परिवार को पांच साल लग गए। पुलिसवालों ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी।
अमीन लायल, बिना किसी जुर्म के ही एक 13 साल की किशोरी के बलात्कार के मामले में 5 साल की जेल काट कर रिहा हुआ हैं। कानपुर की स्पेशल पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने युवक अमीन लायल को बरी कर दिया है। पीड़िता की मां के बयान के आधार पर उसे बाइज्जत बरी किया गया है।
कोर्ट ने बिधनू थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर विनोद कुमार सिंह और विवेचना में शामिल अन्य पुलिसवालों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी पुलिस कमिश्नर और डीएम को निर्देश दिए है।
बलात्कार के मामले में 5 साल तक जेल काटने वाले अमीन ने कहा- जो अपराध मैंने किया ही नहीं उसकी सजा मुझे मिल गई। पुलिस वालों ने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी।
डूडा कॉलोनी स्वर्ण जयंती विहार की एक महिला ने थाने में तहरीर दी थी कि उसकी 13 वर्षीय बेटी सतबरी चौराहे पर रसोई गैस भरवाने गई थी। आरोप था कि विक्की नाम का व्यक्ति उसकी बेटी को पकड़कर झाड़ियों में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी ने किशोरी को धमकी दी थी कि अगर उसने घर में घटना की जानकारी दी तो उसे जान से मार देगा।
पुलिस ने 25 मई 2021 को इस मामले में मुकदमा दर्ज करके अमीन लायल नामक युवक को गिरफ्तार कर लिया। तत्कालीन इंस्पेक्टर विनोद कुमार सिंह ने जांच पूरी करके चार्जशीट दाखिल कर दी।
गुरुवार को कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि विवेचक ने गंभीर लापरवाही और त्रुटिपूर्ण जांच करते हुए एक निर्दोष व्यक्ति को गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी। पीड़िता ने कोर्ट में अमीन लायल को पहचानने से इनकार करते हुए कहा कि उसने उसके साथ कोई घटना नहीं की।
पीड़िता के पिता ने कहा कि अपराध तो हुआ था, लेकिन यह व्यक्ति वह विक्की नहीं है। वहीं, पीड़िता की मां ने बताया कि बेटी ने विक्की के मारपीट करने और रुपए छीनने की बात कही थी। जिसने रुपए छीने थे, वह 35 से 40 वर्ष का शादीशुदा व्यक्ति था।
स्वर्ण जयंती विहार निवासी अमीन लायल ने बताया कि मई 2021 में उनकी बुआ घर आई थीं। उनके जमीन संबंधी कुछ दस्तावेज अमीन के घर में रह गए थे, जिन्हें देने के लिए वह 25 मई 2021 की सुबह बस से वाराणसी गए थे।
उन्होंने बताया कि उसी रात करीब 11 बजे वह बस से वापस लौट आए थे। उसी दिन क्षेत्र में एक किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी, लेकिन उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
अमीन ने बताया, “मैं रात में खाना खाने के बाद सो रहा था। तभी इंस्पेक्टर विनोद कुमार सिंह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मेरे घर पहुंचे और मेरा नाम पूछा। मैंने कहा कि मेरा नाम अमीन लायल है, लेकिन उन्होंने कहा कि तुम ही विक्की हो और मुझे जबरन थाने ले गए। थाने में मुझे बेरहमी से पीटा गया और कहा गया कि तूने एक लड़की की जिंदगी बर्बाद कर दी है, तुझे जेल भेजेंगे।
अमीन ने बताया, “मैं लगातार कहता रहा कि मेरा नाम अमीन है, मैं विक्की नहीं हूं। इसके बावजूद पुलिस ने मुझे दो दिन तक थाने में बैठाए रखा। मुझे डंडों, लाठियों और थप्पड़ों से पीटा गया और कबूल करने के लिए दबाव बनाया गया कि मैं ही विक्की हूं। डर और लगातार मारपीट के कारण मैंने मान लिया कि मैं ही विक्की हूं। पुलिस ने मुझे इतनी बेरहमी से पीटा कि मेरे कान का पर्दा फट गया। आज भी मुझे एक कान से सुनाई नहीं देता।
अमीन ने बताया कि उनके पिता थाने पहुंचे और बस का टिकट दिखाकर बताया कि उनका बेटा वाराणसी गया था, लेकिन पुलिस ने टिकट फाड़ दिया। उन्होंने कहा कि वह विक्की नाम के किसी व्यक्ति को जानते तक नहीं हैं। जिस किशोरी के साथ घटना हुई, उसका घर भी उनके घर से करीब एक किलोमीटर दूर है।
अमीन के पिता अनिल लायल पेंटिंग का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि 25 मई की रात पुलिस घर पहुंची और पूछने लगी कि विक्की कौन है। उन्होंने कहा कि यहां कोई विक्की नहीं रहता, लेकिन पुलिस उनके बेटे को जबरन उठाकर ले गई।
उन्होंने बताया कि वह बेटे की बस की टिकट लेकर थाने पहुंचे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने टिकट फाड़ दी और कहा कि यह फर्जी कहानी मत सुनाओ। उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनसे कहा कि जो करना है कोर्ट में जाकर करो और गाली-गलौज करके उन्हें थाने से भगा दिया।
अनिल लायल ने कहा कि पांच साल बाद उनका बेटा कोर्ट से बरी हुआ, लेकिन इंसाफ मिलने में बहुत देर हो गई। उन्होंने कहा कि इन पांच वर्षों में उनके परिवार ने बहुत कठिन समय देखा।
उन्होंने बताया कि बेटे को बेगुनाह साबित करने के लिए पत्नी के जेवर बेचने पड़े, घर की जमा-पूंजी खत्म हो गई और परिवार कर्ज में डूब गया। लोगों से उधार लेकर बेटे की पैरवी की गई, लेकिन अब कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने कहा, “घर पर लोग पैसा मांगने आते हैं और गाली-गलौज करते हैं। हम लोग पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं। पुलिस ने हमारे बेटे का भविष्य बर्बाद कर दिया। अब सरकार से उम्मीद है कि हमें हमारे नुकसान का मुआवजा मिले।”
अधिवक्ता मो. सलीम ने बताया कि अमीन के पिता घटना के करीब तीन साल बाद उनके पास पहुंचे थे। उन्होंने अमीन के स्कूली दस्तावेज, आधार कार्ड और अन्य सरकारी काजात प्रस्तुत किए, जिनमें उनका नाम अमीन लायल दर्ज था।
जिरह के दौरान पीड़िता की मां ने कहा कि बेटी ने विक्की के मारपीट और रुपये छीनने की बात बताई थी। साथ ही, उन्होंने बताया कि आरोपी शादीशुदा था और पीड़िता के घर के आसपास रहता था।
अधिवक्ता के मुताबिक, अमीन का घर पीड़िता के घर से करीब एक किलोमीटर दूर है और उसका हुलिया भी पीड़िता के बताए गए व्यक्ति से मेल नहीं खाता था। गवाही के दौरान यह भी सामने आया कि घटना में शामिल व्यक्ति की उम्र 35 से 40 वर्ष के बीच थी, जबकि घटना के समय अमीन की उम्र करीब 25 वर्ष थी।
यह भी सामने आया कि आरोपी शादीशुदा था और घटना के बाद अपनी पत्नी और बच्चे के साथ वहां से भाग गया था। मामले की सही तरीके से जांच नहीं की गई और विवेचक ने आरोपी की शिनाख्त तक नहीं कराई।
अधिवक्ता मो. सलीम ने कहा कि अमीन लायल को मुआवजा दिलाने के लिए हाईकोर्ट में अपील की जाएगी।