• सीएमएस ने थप्पड़ मारा, कर्मचारियों से पिटवाया, बाल पकड़कर घसीटा।

संवाददाता
कानपुर। आजाद नगर कर्मचारी राज्य बीमा चेस्ट अस्पताल में तैनात स्टाफ नर्स रीता वर्मा, नूतन कुमारी और पपनेश ने सीएमएस डॉ. डिंपल सोनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि सीएमएस उन्हें लगातार टॉर्चर कर रही हैं।
आरोपी नर्सो का कहना है कि पिछले एक साल से सीएमएस नर्सिंग स्टाफ को परेशान कर रही हैं। हमारा वेतन रोक देती हैं। फिर वेतन रिलीज करने के लिए हमसे घूस मांगती हैं। 18 जून को मैं अपनी समस्याएं लेकर गई, तो गाली देने लगीं। विरोध करने पर मुझे थप्पड़ मारा। बचाव करने आईं नर्सों को कर्मचारियों ने पीटा। टॉर्चर से तंग आकर हम कई बार सुसाइड की कोशिश कर चुके हैं।
सीएएस डॉक्टर पति के नाम पर धमकी देती हैं। कहती हैं कि मेरे पति सीएम योगी के डॉक्टर हैं। मैं कुछ भी करा सकती हूं।
18 जून को अस्पताल में नर्सों का सीएमएस डॉ. डिंपल सोनी से विवाद हुआ था। इसके बाद 20 जून को सीएमएस ने नर्सों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी।
डॉ. डिंपल सोनी ने 20 जून को पुलिस को दी शिकायत में बताया कि गुरुवार दोपहर मैं अपने कार्यालय में बैठकर काम कर रही थी। इसी दौरान चिकित्सालय में तैनात स्टाफ नर्स पपनेश, नूतन कुमारी और रीता वर्मा एक साथ मेरे कक्ष में पहुंचीं। तीनों ने कमरे में मौजूद अर्दली को बाहर भेजकर दरवाजा बंद कर लिया और गाली-गलौज करते हुए मारपीट शुरू कर दी।
पपनेश ने पीछे से उनके हाथ पकड़ लिए और गला दबाने का प्रयास किया, जबकि नूतन कुमारी ने चेहरे, गले और शरीर पर थप्पड़ मारे। मारपीट के दौरान उनका चश्मा गिर गया और आंख में भी चोट लगी। वहीं, थप्पड़ लगने से उनका ऊपरी होंठ कट गया। रीता वर्मा ने जूता निकालकर मेरी पिटाई की और तीनों ने जान से मारने की धमकी भी दी।
डॉ. सोनी ने बताया कि किसी तरह मैं कमरे का दरवाजा खोलकर बाहर निकलीं और खुद को सुरक्षित किया। इस दौरान अस्पताल के अनुचर रामराज ने यूपी-112 पर सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया।
मैनावती मार्ग स्थित रामकृपा इस्टेट निवासी रीता वर्मा ने बताया कि डॉ. डिंपल सोनी ने जूते मारने का झूठा आरोप लगाया था। 18 जून को नूतन अपनी समस्या लेकर सीएमएस से मिलने गई थी। डॉ. डिंपल सोनी ने उसके साथ अभद्रता की। तभी सैलरी की बात लेकर मैं और स्टाफ नर्स पपनेश मौके पर पहुंच गई।
हम लोगो के पहुंचते ही डॉ. डिंपल अपना आपा खो बैठीं। डिंपल ने नूतन को थप्पड़ जड़ना शुरू कर दिया। उस दौरान कमरे में परमेंद्र बाबू, रवि पाल, अरविंद, रामराज समेत कई लोग थे। हम लोगों ने बीच-बचाव किया, तो उन्होंने हम लोगों को भी पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने मेरे कान के कुंडल नोंच लिया, जो मुझे वापस नहीं दिए।
रीता वर्मा ने बताया कि सीएमएस डिंपल के पति डॉ. राजपाल सिंह बहुत प्रभावशाली है। डिंपल पति की धमकी देकर कहती है कि मेरे पति मुख्यमंत्री योगी के डॉक्टर हैं, मैं कुछ भी करवा सकती हूं।
रीता का आरोप है कि 18 जून को वह देर रात तक नवाबगंज थाने में रहीं, लेकिन उनकी शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई। जबकि सीएमएस की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने उनका मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया।
रीता का कहना है कि उन्हें नौकरी से निकालने का दबाव बनाया जा रहा है। यदि ऐसा हुआ तो वे सुसाइड करने के लिए मजबूर होंगी, जिसकी जिम्मेदारी सीएमएस और पुलिस की होगी।
आजाद नगर बीमा अस्पताल परिसर की रहने वाली स्टाफ नर्स नूतन ने बताया- सीएमएस के टॉचर्र के कारण मेरी मेंटल हेल्थ बहुत खराब हो चुकी है।
मेरे बच्चे के पैर में फैक्चर हुआ था, जिस पर मैंने छुट्टी मांगी तो उन्होंने मेरे कागज गायब करा दिए और मेरी सैलरी भी रोक दी।
17 जून को उन्होंने मुझे चार्ज देने के लिए बोला, 18 को मैं गई तो मुझे नोटिस दिया गया। जिसमें सीएमएस ने आरोप लगाया कि- मैं नियमों के पालन का उल्लंघन करती हूं। सीएमएस अक्सर छोटी-छोटी बातों को लेकर नोटिस देती रहती हैं, उसी वजह से मैं उनसे शिकायत करने गई थी।
सीएमएस मुझसे गाली-गलौज करने लगी, तब तक पपनेश और रीता वर्मा पहुंच गई। इस दौरान सीएमएस ने मुझे सीधे थप्पड़ मार दिया। मेरे और रीता वर्मा के बाल पकड़ कर घसीटा, जिस कारण मैं गिर गई। मेरे घुटने में चोट आई है। वो नर्सिंग स्टाफ की सबके सामने बेइज्जती करती हैं।
डॉक्टरों से बोलती हैं कि- नर्सों का साथ मत दिया करो। होली के समय डॉक्टरों की अनुमति पर मरीज अपने घर गए थे, जिस पर डॉ. डिंपल ने मुझ पर मरीजों को भगाने का आरोप लगाया था। वार्ड से बाहर जाने, बच्चे को चाभी देने के लिए, पानी लाने तक के लिए मुझे नोटिस दिया जाता है।
डॉ. डिंपल ने मुझे इतना टॉर्चर किया था कि मैं अस्पताल में ही सुसाइड करने के लिए गई थी। मैंने डायल 112 पर कॉल कर पुलिस को बुलाया था। पुलिस ने आने पर सीएमएस से मेरी बात कराई थी। डेढ़ महीने से सीएमएस ने मेरी सीसीएल पास नहीं की, सैलरी भी रोक दी। सैलरी रोकने के एवज में सीएमएस अपने अधीनस्थों के जरिए 5-10 हजार रुपए मांगती हैं।
पनकी की रहने वाली पपनेश ने बताया कि 18 जून को अनावश्यक पत्राचारों को लेकर हम लोग अपनी बात कहने कह गए थे। 7 महीने से वेतन रुका हुआ है। सीएमएस हमारे चिकित्सीय प्रपत्र इधर–उधर कर देती हैं।
मैडम ने बाबूओं का ऐसा सिंडिकेट बना रखा है, हम लोगों ने पहले भी उनके खिलाफ शिकायत की थी, जिसकी वह खुन्नस रखती हैं। डॉ. डिंपल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सामने हमे बुरी तरह बेइज्जत करती हैं।
मार्च में मैंने आत्महत्या का प्रयास किया था। मेरी 6 माह की बेटी बीमार थी, लेकिन मुझे छुट्टी नहीं दी जा रही थी। मेरी बच्ची मरने की कगार पहुंच गई, जिसपर मैं मजबूरन घर में बैठ गई। हमने पत्राचार के जरिए जानकारी दी, उसके दस्तावेज नहीं है। हम अपने अधिकारी को कैसे मार सकते हैं। उनके द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। मैडम ने नूतन सिस्टर को तमाचा मारा था।






