June 22, 2026

एनएचएआई की टीम करेगी जांच।

संवाददाता 

कानपुर।  घाटमपुर स्थित ओवरब्रिज का स्लैब टूट गया है। इसके साथ कई जगह दरारें भी आ गई हैं। दरारें ओवरब्रिज की छत और बीम में आई हैं। अभी भी ओवरब्रिज के ऊपर से भारी वाहन गुजर रहे हैं। कानपुर-सागर हाईवे पर क्षमता से 10 गुना ज्यादा वाहनों का दबाव रहता है। इस ओवरब्रिज का निर्माण पीएनसी ने लगभग चार साल पहले 46 करोड़ के बजट से कराया था।

पीएनसी के अधिकारियों ने लोड टेस्टिंग पूरी करने के बाद 12 नवंबर 2022 को ओवरब्रिज का उद्घाटन करके इसे आम लोगों के लिए खोल दिया था। इसके बाद कानपुर से हमीरपुर की ओर जाने वाले और घाटमपुर में न रुकने वाले अधिकांश वाहन इसी ओवरब्रिज से होकर गुजरने लगे। रविवार सुबह स्थानीय लोगों की नजर ओवरब्रिज की टूटी हुई स्लैब पर पड़ी तो वे हैरान रह गए। महज चार साल के भीतर ही पुल की स्लैब क्षतिग्रस्त हो गई।

इससे पहले साल 2024 में भी ओवरब्रिज के कई हिस्सों में दरारें दिखाई दी थीं। उस समय पीएनसी और एनएचएआई की संयुक्त जांच में दरारों की पुष्टि हुई थी। जांच के बाद एनएचएआई ने ओवरब्रिज की हर महीने निगरानी कराने की बात कही थी। इसके बावजूद रविवार सुबह पुल की स्लैब टूटने की घटना सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।

वहीं हमीरपुर से कानपुर की ओर जा रहे भारी वाहन जिन्हें घाटमपुर चौराहे में नहीं रुकना होता है। वह ओवरब्रिज के रास्ते कानपुर की ओर निकल जाते हैं। हालांकि कानपुर – सागर हाईवे पर मोरंग और गिट्टी के ओवरलोड ट्रक और डंपर चलते हैं।

इन पर खनन विभाग कोई कार्रवाई नहीं करता। जिसके चलते ओवरलोड वाहन हाईवे पर धड़ल्ले से दौड़ते हैं। बताया जा रहा है कि हाईवे पर कई जगह तो गड्ढे तक हो गए हैं। जिन्हें लगातार पीएनसी के द्वारा पैच वर्क किया जा रहा है।

घाटमपुर के मुख्य चौराहे पर बने ओवरब्रिज पर हमीरपुर की ओर चार नंबर कोठी की छत टूटने के बाद भी ओवरब्रिज के ऊपर से मोरंग व गिट्टी के ओवरलोड वाहन गुजर रहे हैं। जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।

एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पंकज ने बताया कि उन्हें घाटमपुर ओवरब्रिज के स्लैब टूटने की जानकारी मिली है। उन्होंने पेट्रोलिंग टीम को मौके पर भेजा है। एनएचआई की टीम पहुंचकर जांच करेगी। पुल पर आवागमन रोका जाएगा।

घाटमपुर ओवरब्रिज में वर्ष 2024 में भी स्लैब में दरारें सामने आई थीं। मामला सामने के बाद एनएचएआई और पीएनसी की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया था। जांच में स्लैब में हेयर क्रैक की पुष्टि हुई थी। टीम ने अपनी रिपोर्ट एनएचएआई को सौंपते हुए दरार की मरम्मत कराने और नियमित निगरानी की सिफारिश की थी।

एनएचएआई के अधिकारियों ने उस समय कहा था कि पीएनसी से दरार की मरम्मत कराई जाएगी और हर महीने ओवरब्रिज की निगरानी की जाएगी। प्रारंभिक जांच में ओवरलोड वाहनों के दबाव को दरार की संभावित वजह बताया गया था। इसके बावजूद अब ओवरब्रिज की स्लैब टूटने की घटना सामने आने से पहले की मरम्मत और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।