
संवाददाता
कानपुर। कानपुर नगर निगम में महापौर के समर्थक और बागी पार्षदों की अंदरूनी कलह अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां बयानबाजी सीधे प्रदेश और राष्ट्रीय नेतृत्व की राजनीतिक प्रतिष्ठा तक जा पहुंची है।
महापौर समर्थक एक पार्षद के दिए गए बयान ने पार्टी के भीतर नया विवाद खड़ा कर दिया है। पार्षद ने कथित तौर पर यह कहकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी कि मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री का कानपुर की स्थानीय राजनीति से कोई प्रत्यक्ष लेना-देना नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने बागी पार्षदों के खिलाफ “आरपार की लड़ाई” लड़ने का भी ऐलान कर दिया।
नगर निगम में लंबे समय से चल रहे महापौर बनाम बागी पार्षद विवाद के बीच आए इस बयान को भाजपा संगठन और सरकार के शीर्ष नेतृत्व की राजनीतिक हैसियत पर सवाल उठाने के रूप में देखा जा रहा है।
बताते चलें कि कानपुर नगर निगम में भाजपा की अंदरूनी कलह ने विकराल रूप ले लिया है। महापौर समर्थक और बागी पार्षदों के बीच चल रहा विवाद अब सीधे तौर पर भ्रष्टाचार, विकास कार्यों में भेदभाव और शीर्ष नेतृत्व की प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि दोनों पक्षों ने ‘आर-पार’ की लड़ाई का ऐलान कर दिया है, जिससे पूरे प्रदेश की सियासत में हलचल मच गई है।
नगर निगम में महापौर समर्थक और बागी पार्षदों के बीच बढ़े इस विवाद की जड़ नगर निगम में महापौर प्रमिला पांडेय के बेटे बंटी पांडेय का कथित हस्तक्षेप है। बागी पार्षदों का आरोप है कि बंटी पांडेय नगर निगम के सभी बड़े कामों, टेंडर और ठेकों में दखल रखते हैं। पार्षद पवन गुप्ता ने तंज कसते हुए कहा था कि भाजपा के राज में ‘होइये वही जो राम रचि राखा’ होना चाहिए, लेकिन नगर निगम में ‘होइये वही जो बंटी रचि राखा’ चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि महापौर के बेटे के पैर न छूने के कारण उनके क्षेत्रों में विकास कार्य नहीं कराए जा रहे।
हाल ही में 26 दिसंबर को नगर निगम सदन की कार्यवाही के दौरान हुए हंगामे के बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने पार्षद अंकित मौर्या और पवन गुप्ता को अगले चार सदनों के लिए निष्कासित कर दिया था। महापौर ने कहा था कि वह संगठन और मुख्यमंत्री से शिकायत करेंगी, क्योंकि इन पार्षदों ने पार्टी की छवि धूमिल की है। इस पर बागी पार्षदों ने अपने निलंबन के खिलाफ कोर्ट जाने की बात कही थी। पार्षदों का कहना है कि वे अपने वार्ड की जनता की समस्या उठाना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
इस मुद्दे पर भाजपा संगठन भी दो खेमों में बंट गया है। नेता सदन नवीन पंडित के नेतृत्व में 70 से अधिक भाजपा पार्षदों ने छह बागी पार्षदों – पवन गुप्ता, अंकित मौर्या, विकास जायसवाल, लक्ष्मी कोरी, आलोक पांडेय और हरिस्वरूप तिवारी – को निष्कासित करने की मांग की है। वहीं, बागी पार्षदों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर महापौर और उनके बेटे की मनमानी जारी रही तो वे भ्रष्टाचार के खिलाफ महापौर और उनके बेटे के विरुद्ध यह लड़ाई जारी रखेंगे।
महापौर समर्थक पार्षदों का रुख काफी आक्रामक रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शिकायत को पहले कानपुर संगठन और प्रभारी मंत्री के समक्ष रखा जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में पार्षद पहले ही अपनी बात संगठन तक पहुंचा चुके हैं और नेतृत्व ने सभी पक्षों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ लोग लगातार संगठन पर दबाव बनाकर राजनीतिक माहौल खराब कर रहे हैं। उन्होंने “अब समझौते की नहीं, आर-पार की लड़ाई होगी” कहकर बागियों के खिलाफ मोर्चा खोलने का एलान कर दिया।
वहीं, बागी पार्षदों – हरिस्वरूप तिवारी, पवन गुप्ता, विकास जायसवाल, लक्ष्मी कोरी, अंकित मौर्य और आलोक पांडेय – ने संयुक्त रूप से बयान को निराधार बताते हुए पलटवार किया। उनका कहना है कि उन्होंने न केवल जिला प्रभारी मंत्री और उपमुख्यमंत्री को अपनी पीड़ा से अवगत कराया है, बल्कि लंबे समय से कोई ठोस कार्रवाई न होने पर अब वे सीधे मुख्यमंत्री से नगर निगम में हो रहे भ्रष्टाचार की शिकायत करेंगे। उन्होंने भी “आर-पार की लड़ाई” का नारा देकर साफ कर दिया कि वे किसी भी सूरत में पीछे नहीं हटेंगे।
यह पहला मौका नहीं है जब नगर निगम सदन में भाजपा पार्षद आपस में भिड़े हों। मार्च 2024 में हॉट मिक्स प्लांट के टेंडर को लेकर भी पार्षदों में दो फाड़ हो गया था। इस विवाद ने भाजपा नेतृत्व के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जहां मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री जैसे बड़े नेता पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत माने जाते हैं, वहीं इस तरह की टिप्पणी संगठन के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करती है। स्थिति अब भी तनावपूर्ण बनी हुई है, और आने वाले दिनों में संगठन के आश्वासनों पर कितना अमल होता है, इस पर पूरी सियासी निगाहें टिकी हैं।






