June 28, 2026

न्यायालय ने किया बरी, दरोगा के खिलाफ कार्रवाई के आदेश।

संवाददाता 

कानपुर। बिधनू में अधिवक्ता की नाबालिग बेटी से बलात्कार के मामले में जेल में बंद आरोपी को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की कोर्ट ने बरी कर दिया। विवेचना में लापरवाही बरतने पर कोर्ट ने विवेचक विनोद कुमार सिंह के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पुलिस कमिश्नर और डीएम को आदेशित किया है। पीड़ित 5 सालों से जेल में बंद था, पुलिस ने आरोपी के बजाए दूसरे युवक को आरोपी बताकर जेल भेज दिया था। जिसपर कोर्ट ने यह कार्रवाई की।

बिधनू थानाक्षेत्र निवासी अधिवक्ता ने मुकदमा दर्ज कराया था कि उनकी 13 वर्षीय बेटी सतबरी चौराहे के पास गैस भरवाने के लिए गई थी। तभी इलाके में रहने वाला विक्की बेटी को घसीट कर झाड़ियों में ले गया और रेप की वारदात को अंजाम दिया। घर पहुंची पीड़िता ने आपबीती बयां की थी। इस मामले में पुलिस ने विक्की के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी।

मामले की जांच तत्कालीन दरोगा विनोद कुमार सिंह कर रहे थे। उन्होंने आरोपी विक्की को जेल भेजने के बजाए, इलाके में रहने वाले अमीन लायल को विक्की बनाकर जेल भेज दिया था, जिसके बाद से वह करीब 5 सालों से जेल में बंद था।

यह मामला विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट पवन कुमार राय की कोर्ट में ट्रायल पर था। अभियोजन की ओर से मामले में 7 गवाह कोर्ट में पेश किए गए थे।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता सलीम ने बताया कि दरोगा ने मुख्य आरोपी को जेल भेजने के बजाए अमीन लायल को विक्की बनाकर जेल भेज दिया गया था। 

पीड़िता ने अपने बयानों में बताया कि विक्की उसके घर से महज 5–6 मकानों की दूरी पर रहता था, वह शादीशुदा था। जबकि अमीन लायल पीड़िता के घर से काफी दूरी पर रहता था, साथ ही उसकी शादी भी नहीं हुई थी।

इसके साथ ही हुलिए के आधार पर भी पीड़ित अमीन लायल की पहचान नहीं हो सकी। जिसके बाद अमीन लायल को सबूतों के आधार पर बरी कर दिया। साथ ही मामले में लापरवाही बरतने पर दरोगा के खिलाफ कार्रवाई के भी आदेश जारी किए।