June 27, 2026

• गंदगी, टूटी सड़कों, जाम नालियों, बंदरों के आतंक से लोग परेशान।

संवाददाता

कानपुर। नगर के वार्ड-23 में विकास के दावे हकीकत से मेल नहीं खाते। 35 से 40 हजार आबादी वाले कल्याणपुर आवास विकास वार्ड की समस्याएं हल नहीं हो रही हैं। लोग गंदगी, टूटी सड़कों, जाम नालियों, बंदरों के आतंक और गंदे पेयजल से परेशान हैं। कई मोहल्लों में नालियों का पानी सड़कों पर बह रहा है। पार्क बदहाल पड़े हैं।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय के पास सड़क किनारे कूड़ा फैला रहता है । आवास विकास-3 में रिहायशी इलाकों में बंदरों के झुंड घूमते रहते है । बदहाल और उपेक्षित पार्क में कूड़ा और जलभराव दोनों मौजूद हैं। पार्षद के घर के आसपास भी सड़कें उखड़ी हुई हैं। झंडा पार्क वाली गली में नलों से गंदा और बदबूदार पानी आता है।

वार्ड के अधिकांश हिस्सों में नाले और नालियां गंदगी से भरी मिलीं। कई जगह नालियों का पानी सड़क पर बह रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से बरसात के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। लोगों का आरोप है कि नाला सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति होती है। थोड़ी बारिश में ही नाले उफनने लगते हैं और सड़कों पर गंदा पानी भर जाता है।

क्षेत्रवासियों ने घर-घर कूड़ा उठान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कूड़ा गाड़ी नियमित नहीं आती और उसका कोई तय समय भी नहीं है। लोगों का आरोप है कि पूरे महीने का शुल्क लिया जाता है, लेकिन कूड़ा उठान मुश्किल से 10 से 12 दिन ही होता है।

शिव मंदिर के पास झंडा पार्क वाली गली में लोगों ने पेयजल संकट को सबसे गंभीर समस्या बताया। उनका कहना है कि पिछले आठ महीने से नाले का गंदा और बदबूदार पानी पाइपलाइन के जरिए घरों तक पहुंच रहा है। नई पाइपलाइन बिछाने के बावजूद गलत कनेक्शन होने से समस्या का समाधान नहीं हो सका है। लोग आज भी सबमर्सिबल पंप के भरोसे हैं।

पुलिस चौकी, शिव मंदिर और दुर्गा पूजा पार्क के आसपास बंदरों का आतंक लोगों के लिए नई मुसीबत बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदर राहगीरों और बच्चों पर हमला कर देते हैं। कई लोग घायल भी हो चुके हैं, लेकिन अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

वार्ड में कई पार्क हैं, लेकिन अधिकांश उपेक्षा का शिकार हैं। कहीं जलभराव है तो कहीं कूड़े का ढेर। बच्चों के खेलने और बुजुर्गों के बैठने की व्यवस्था भी नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान पार्कों के विकास के वादे किए गए थे, लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं।

क्षेत्र के सेक्टर-1 से सेक्टर-9 तक सड़कें बुरी तरह टूटी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन इलाकों को अभी तक आवास विकास परिषद ने नगर निगम को हस्तांतरित नहीं किया है, जिससे विकास कार्य अटके पड़े हैं। बरसात के दिनों में इन सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाता है और वाहन भी क्षतिग्रस्त होते हैं।

महाबलीपुरम इलाके में टूटी सड़कें और बंद स्ट्रीट लाइटें लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं। रात के समय कई जगह अंधेरा छाया रहता है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है।

क्षेत्रवासियों ने पनकी पावर हाउस से उड़कर आने वाली राख को भी बड़ी समस्या बताया। लोगों का कहना है कि राख घरों की छतों और कपड़ों पर जम जाती है। उनका आरोप है कि इससे सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और रोजाना सफाई करनी पड़ती है।

आवास विकास-3 में रहने वाली शहीद संदीप चौहान की पत्नी किरण चौहान ने बताया कि उनके पति की शहादत के बाद पार्क को शहीद के नाम पर विकसित करने और सड़क का नाम शहीद संदीप चौहान मार्ग रखने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन वर्षों बाद भी केवल प्रतिमा लगाकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। पार्क आज भी बदहाल पड़ा है।

अरुण चौहान ने कहा कि सड़कें और स्ट्रीट लाइट दोनों बदहाल हैं। शिकायतों का कोई असर नहीं होता। प्रदीप यादव ने कहा कि बंदरों के आतंक से महिलाएं और बच्चे घर से निकलने में डरते हैं। दया शंकर शुक्ला ने बताया कि सड़कों की हालत इतनी खराब है कि वाहन मरम्मत पर हर महीने अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। सीमा शुक्ला ने कहा कि नालियां और सीवर सालों से साफ नहीं हुए। लोग अपने पैसे से सफाई करा रहे हैं।

रोहित यादव और इरफान ने पार्कों की बदहाली पर नाराजगी जताई और बच्चों के लिए बेहतर सुविधाओं की मांग की। उत्तम सोनकर ने कहा कि दस वर्षों में क्षेत्र में कोई बड़ा विकास कार्य नहीं हुआ। किरण चौहान ने कहा कि शहीद संदीप चौहान के नाम पर किए गए वादे आज तक पूरे नहीं हुए। किरण अवस्थी और प्रेमलता ने नालियों की सफाई न होने और गंदे पानी की समस्या उठाई। राहुल सिंह ने बताया कि कई बार घरों में पानी आता ही नहीं, और आता है तो गंदा और बदबूदार होता है।