• अधिकतर कोचिंगों ने कर दी छुट्टी।

संवाददाता
कानपुर। आज नगर में कोचिंग मंडी के नाम से पहचाने जाने वाले काकादेव क्षेत्र की सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिला। आम दिनों में जहां सुबह से शाम तक छात्र-छात्राओं की भीड़ और कोचिंग संस्थानों के बाहर चहल-पहल रहती है, वहीं आज सड़कें लगभग सूनी नजर आईं।
22 जून को लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए हादसे और 23 जून को कानपुर में कोचिंग संस्थानों के खिलाफ हुई जांच एवं सीजिंग कार्रवाई के बाद कई कोचिंग संचालकों ने एहतियातन छुट्टी घोषित कर दी। इसका असर सीधे काकादेव की सड़कों पर दिखाई दिया, जहां आमतौर पर रहने वाली छात्रों की भीड़ गायब रही।
काकादेव को प्रदेश के प्रमुख कोचिंग हब के रूप में जाना जाता है। यहां छोटी-बड़ी मिलाकर 500 से अधिक कोचिंग संस्थाएं संचालित होती हैं। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ-साथ विभिन्न विषयों की पढ़ाई कराने वाले बड़े संस्थान भी शामिल हैं।
काकादेव में नीट, जी, एसएससी, रेलवे, पुलिस भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करने आते हैं। कानपुर के अलावा आसपास के जिलों और दूसरे शहरों से भी विद्यार्थी यहां कोचिंग करने पहुंचते हैं।
काकादेव में बड़ी संख्या में छात्रावास और किराये के आवास भी हैं, जहां हजारों छात्र रहते हैं। सामान्य दिनों में सुबह से ही सड़कों पर छात्रों की आवाजाही शुरू हो जाती है। कोचिंग आने-जाने वाले छात्र-छात्राओं के कारण पूरे क्षेत्र में दिनभर रौनक बनी रहती है।
लेकिन आज हालात बिल्कुल अलग दिखाई दिए। कई प्रमुख कोचिंग संस्थानों में छुट्टी रहने के कारण छात्र कम संख्या में नजर आए और काकादेव की व्यस्त सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा नजारा यहां बहुत कम देखने को मिलता है।






