• पांच मैचों में बल्लेबाजों का प्रदर्शन चर्चा में, चयन प्रक्रिया, टीम मैनेजमेंट और सपोर्टिंग स्टाफ की जवाबदेही पर भी नजर।
संवाददाता
कानपुर। वीनू मांकड़ ट्रॉफी 2026-27 में उत्तर प्रदेश की जूनियर टीम के प्रदर्शन को लेकर अब कोच ध्रुव सिंह की प्रशिक्षण प्रतिभा और टीम समायोजन करने पर ही काफी सवाल उठा दिए है। यही नहीं उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) की चयन प्रक्रिया और टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। यूपीसीए के भीतर इस बात पर चर्चा शुरू हो चुकी है जिसमें कोच ध्रुव सिंह टीम समायोजन में सही क्रम से खिलाड़ियों का उपयोग सामने वाली टीम को देखकर भी नहीं कर पाने का मुद्दा मुख्य है।
मैचों की उपलब्ध स्कोरशीट में जहां कुछ खिलाड़ियों ने शानदार तो कुछ ने निराशाजनक प्रदर्शन किया, वहीं टीम के प्रदर्शन और नॉकआउट तक पहुंचने के सफर ने कोचिंग रणनीति और खिलाड़ियों की तैयारी की समीक्षा की जरूरत को चर्चा में ला दिया है।
भावी शर्मा और युवराज ने जहां अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया, वहीं टीम के प्रदर्शन के आधार पर यह सवाल उठ रहा है कि कोचिंग स्टाफ ने खिलाड़ियों की प्रतिभा का कितना प्रभावी इस्तेमाल किया और मैच की परिस्थितियों के अनुसार रणनीति कितनी कारगर रही। सूत्र तो ये भी बताते हैं कि टीम प्रबंधन गेंदबाज को अंतिम एकादश में जगह न देकर बल्लेबाज से ही जबरन गेंदबाजी करवा रहे हैं।टीम के प्रदर्शन के मद्देनजर यह जानना महत्वपूर्ण हो जाता है कि कोच ध्रुव सिंह ने खिलाड़ियों की तैयारी, तकनीकी सुधार और मैदान पर रणनीतिक फैसलों में क्या भूमिका निभाई। क्या टीम की क्षमता के अनुरूप योजनाएं तैयार की गईं? क्या बल्लेबाजी और गेंदबाजी संयोजन परिस्थितियों के मुताबिक प्रभावी रहे? इन पहलुओं की समीक्षा से टीम के प्रदर्शन की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
गेंदबाजी में आयुष अग्रवाल ने 10 विकेट लेकर अच्छा प्रदर्शन किया इन आंकड़ों से गेंदबाजी विभाग में मौजूद क्षमता का पता चलता है। ऐसे में यह भी समीक्षा का विषय है कि गेंदबाजों के प्रदर्शन का टीम को कितना लाभ मिला और निर्णायक मुकाबलों में रणनीति कितनी सफल रही।
टीम के प्रदर्शन के साथ यूपीसीए की चयन प्रक्रिया और सपोर्टिंग स्टाफ की जवाबदेही भी चर्चा का विषय है। चयन के दौरान खिलाड़ियों के पिछले प्रदर्शन, मौजूदा फॉर्म, तकनीकी क्षमता और टीम की जरूरतों को किन मानदंडों पर परखा गया, यह स्पष्ट होना जरूरी है।हालांकि, केवल पांच मैचों के आंकड़ों के आधार पर कोचिंग या चयन प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए पूरी मैच रिपोर्ट, चयन संबंधी मानदंडों और संबंधित अधिकारियों के पक्ष का सामने आना जरूरी है।
अब निगाहें यूपीसीए और टीम मैनेजमेंट पर हैं कि वे प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश के प्रदर्शन की समीक्षा किस तरह करते हैं। कोच ध्रुव सिंह की रणनीति, सपोर्टिंग स्टाफ के योगदान और खिलाड़ियों की तैयारी का निष्पक्ष आकलन भविष्य में टीम के प्रदर्शन को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।वीनू मांकड़ ट्रॉफी में उत्तर प्रदेश की टीम के प्रदर्शन के बाद कोच ध्रुव सिंह की नियुक्ति के मानकों पर भी सवाल उठने लगे हैं। क्रिकेट गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या कोच की नियुक्ति में अनुभव, उपलब्धियां और खिलाड़ियों को तराशने की क्षमता को प्राथमिकता दी गई, या फिर प्रभावशाली लोगों से नजदीकी भी अहम आधार रही? हालांकि, इन सवालों पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों और यूपीसीए का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ पा पाया है।





