
संवाददाता
कानपुर। विकास प्राधिकरण के ज़ोन- 1 स्थित इफ्तिखाराबाद की सड़क पर बेसमेंट समेत छह मंजिला इमारत तन रही है । आरोप है कि बिल्डर ने बेसमेंट खोदकर सार्वजनिक फुटपाथ ही निगल लिया गया है, और उसी नींव पर भूतल समेत पांच मंजिला इमारत तेजी से आसमान की ऊंचाई को छू रही है।
केडीए ज़ोन-1 स्थित इफ्तिखाराबाद की सड़क से सटे भूखंड पर हो रहे इस निर्माण स्थल पर पहली नजर में ही तस्वीरों में देखा साफ देखा जा सकता है कि नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शिकायतों के मुताबिक़ आरोप है कि जमीन के नीचे बेसमेंट खोदकर न केवल सार्वजनिक फुटपाथ को पूरी तरह निगल लिया गया है, बल्कि उसी नींव पर भूतल समेत पांच मंजिला इमारत तेजी से खड़ी की जा रही है। ऐसी स्थित में पैदल यात्रियों के लिए छोड़ी गई जगह अब नाममात्र ही नजर आ रही है, जिससे मजबूर होकर राहगीर फुटपाथ की जगह सड़क पर चलने को मजबूर हैं, जहां वाहनों की आवाजाही बेरोकटोक जारी है। आश्चर्य की बात यह है कि इसी इमारत से चंद कदमों की दूरी पर एक और निर्माण नितांत गैरकानूनी रूप से तैयार किया जा रहा है, जहां न तो कोई स्वीकृति पट्टिका दिखती है और न ही नक्शे के अनुरूप सेटबैक का पालन हो रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब एक ही रोड पर दो-दो अवैध निर्माण खुलेआम हो रहे हैं, तो निगरानी तंत्र कहां सो रहा है? चंद कदमों की दूरी पर नितांत गैरकानूनी ढंग से खड़ा किया जा रहा दूसरा ढांचा प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है, और प्रशासन की मौन सहमति ने आम नागरिक की राह और सुरक्षा, दोनों को दांव पर लगा दिया है।
इन अवैध निर्माणों ने न केवल पैदल यात्रियों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है, बल्कि यातायात पर भी भारी दबाव डाला है। चौड़ी सड़कों पर निर्माण सामग्री और मलबा बिखेरकर, घेरकर उन्हें संकरी कर दिया जाता है, जिससे आवाजाही बाधित होती है। बिना अनुमति बनी इस निर्माणाधीन पांच मंजिला इमारत में आपातकालीन निकास और अग्निशमन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, जो स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है। साथ ही बेसमेंट खोदने से आसपास की इमारतों की नींव पर संरचनात्मक जोखिम की आशंका भी बलवती हो गई है।
इफ्तिखाराबाद की सड़क पर तन रही इन बहुमंजिला इमारतों का यह मामला सिर्फ अवैध इमारतों का नहीं, बल्कि पूरे नगर में फैल रहे अवैध निर्माण के कल्चर का प्रतीक है। अगर समय रहते रोक नहीं लगी, तो आने वाले दिनों में न केवल पैदल चलने की जगह खत्म होगी, बल्कि जान-माल की सुरक्षा भी दांव पर लगेगी।






