
संवाददाता
कानपुर। रामबाग चौराहे पर पीपीपी मॉडल से बने डीलक्स जनसुविधा सुलभ शौचालय के शिलापट पर नाम न लिखे जाने पर सपा विधायक नसीम सोलंकी भड़क गईं।
नाराज नसीम ने कहा कि हारे हुए भाजपा प्रत्याशी सुरेश अवस्थी का नाम पत्थर पर है, लेकिन मेरा क्यों नहीं है। शासन के आदेश का पालन नहीं किया जा रहा, लेकिन मैं किससे कहूं? सरकार इनकी है, प्रशासन भी इनका है। जिनके नाम लिखे हैं, वे लोग भी इनके हैं, तो फरियाद किससे करें। इनको तो जनता जवाब देगी।
बीजेपी पार्षद आलोक पांडेय ने नसीम के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने कहा- विधायक पहले यह बताएं कि अपनी निधि से होने वाले कामों के शिलापट पर पूर्व विधायक पति इरफान सोलंकी का नाम क्यों लिखवा रही हैं। यह गलत है, क्योंकि पूर्व विधायक पर मुकदमा चल रहा है। उन्हें सात साल की सजा भी हो चुकी है। ऐसे में उनके नाम के आगे ‘माननीय’ लिखवाना गलत है।
बीजेपी पार्षद ने कहा- मैं सीएम योगी और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से लिखित शिकायत करूंगा। जरूरत पड़ी तो कोर्ट में रिट भी दाखिल करूंगा।
सीसामऊ विधानसभा में रामबाग चौराहे पर पीपीपी मॉडल पर डीलक्स जनसुविधा सुलभ शौचालय बनाया गया है। यहां लगे शिलापट पर सांसद रमेश अवस्थी, मेयर प्रमिला पांडेय, सीसामऊ से बीजेपी के पूर्व प्रत्याशी सुरेश अवस्थी और स्थानीय पार्षद आलोक पांडेय का नाम लिखा है।
इस पर नसीम सोलंकी ने कहा- जो गाइडलाइन है, उसके अनुसार मेरा यानी विधायक का नाम होना चाहिए। मुझे लगता है कि यहां के पूर्व प्रत्याशी को सरकार या प्रशासन ने गोद ले रखा है, क्योंकि हर जगह उनकी बात मानी जा रही है। कुछ दिन पहले सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी के मामले में भी उन्हें हाइलाइट किया गया था।
पूर्व विधायक इरफान सोलंकी का नाम अपने साथ शिलापट पर लिखवाने के सवाल पर नसीम ने कहा-इससे पहले मेरे ससुर हाजी मुश्ताक सोलंकी का नाम पत्थरों पर लिखा जाता रहा। वह पूर्व विधायक हो गए, तब भी नाम लिखा जाता था। मेरे पति इरफान विधायक रहे और अब मैं विधायक हूं। इसलिए जब मेरे पति पूर्व विधायक हैं, तो उनका नाम लिखाने में दिक्कत क्या है? यह हमारी परंपरा है। मुझे तो जवाब चाहिए कि यहां मौजूदा विधायक का नाम ही शिलापट पर नहीं लिखा गया, जबकि जो प्रत्याशी थे, उनका नाम लिखा हुआ है। इसका जवाब कौन देगा?
जवाहर नगर से बीजेपी पार्षद आलोक पांडेय ने कहा- नसीम सोलंकी पत्थर की राजनीति करती हैं। पहली बात यह कि जो सुलभ शौचालय बना है, वह नगर निगम की निधि से नहीं बना है। यह एक निजी संस्था की ओर से बनाया गया है। इसमें कोई शासनादेश लागू नहीं होता।
बीजेपी पार्षद आलोक पांडेय ने कहा- नसीम जिन विकास कार्यों का शिलान्यास या लोकार्पण करती हैं, उनमें शिलापट पर अपने पति और पूर्व विधायक इरफान सोलंकी का नाम लिखवाती हैं। इसका मतलब यह हुआ कि वह खुद ही प्रोटोकॉल और शासनादेश का उल्लंघन कर रही हैं।
नियमों में साफ लिखा है कि अगर किसी अपराध से जुड़े व्यक्ति का नाम सरकारी धन से किए गए प्रचार-प्रसार में इस्तेमाल किया जाता है, तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है।
बीजेपी पार्षद ने कहा- नसीम जिन विकास कार्यों का शिलान्यास या लोकार्पण करती हैं, उनमें शिलापट पर अपने पति और पूर्व विधायक इरफान सोलंकी का नाम लिखवाती हैं।






