June 22, 2024

संवाददाता।
कानपुर। नगर में आईआईटी की प्रोजेक्ट एग्जीक्यूटिव ऑफिसर पल्लवी चिल्का सुसाइड मामले में नया खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक महिला ऑफिसर का दिमागी संतुलन ठीक नहीं था। देर रात वह कमरे में चीखती-चिल्लाती थी। घंटों बैठकर पूजा-पाठ करती थी। वह भगवान से सीधे बात करने का दावा करती थी। पल्लवी की हरकतों से डर कर 10 दिन पहले उनके मकान मालिक ने पुलिस को भी सूचना दी थी। इसके बाद महिला ऑफिसर ने आईआईटी कैंपस में ही शिफ्ट होने का फैसला लिया। वह 15 दिसंबर को हॉस्टल के कमरे में साफ-सफाई के बहाने पहुंची। शिफ्ट होने से पहले ही फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। उसका शव 3 दिन तक फंदे से लटकता रहा। मंगलवार को माता-पिता और भाई ओडिशा से कानपुर पहुंचे। लेकिन उन्होंने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। पुलिस ने बताया कि कल्याणपुर थाना क्षेत्र के वसुंधरा विहार में पल्लवी चिल्का (35 वर्ष) बलवान सिंह के मकान में किराए पर रहती थी। बलवान सिंह ने बताया कि वह कभी किसी से बात नहीं करती थी। देर रात कमरे से अक्सर रोने और चीखने-चिल्लाने की आवाजें आती थी। एक बार उन्होंने पल्लवी से पूछा तो बताया कि कोई दिक्कत नहीं है। बस यूं ही रो रही थी। पल्लवी से कमरे में कभी भी कोई मिलने नहीं आता था। वह बिल्कुल अकेले रहना पसंद करती थी। कभी किसी से बात तक नहीं करती थी। बलवान सिंह ने पुलिस को बताया कि 10 दिन पहले भी पल्लवी देर रात रोने के साथ ही चीख-चिल्ला रही थी। घबराकर उन्होंने डायल-112 पर सूचना दी थी। पुलिस ने दरवाजा खुलवाया तो पल्लवी डरी-सहमी बाहर निकली। लेकिन उसने किसी भी तरह की परेशानी से इनकार कर दिया। इसके बाद मकान मालिक बलवान ने पल्लवी के माता-पिता से फोन पर बात की थी। बताया था कि बेटी की तबीयत ठीक नहीं है। इस पर परिवार ने कह दिया था कि उस पर कुछ उपरी चक्कर है। इसके बाद बलवान ने आपत्ति जताई तो पल्लवी ने आईआईटी कैंपस में शिफ्ट होने का प्लान बनाया। 15 दिसंबर को आखिरी बार कमरे में आई थी और पूरा सामान पैक किया। इसके बाद कहा था कि अब वह आईआईटी के हॉस्टल में सफाई करने जा रही है। फिर वहां शिफ्ट हो जाएगी। पल्लवी 15 दिसंबर को ही हॉस्टल के सीसीटीवी में आखिरी बार दिखी। इसके बाद 15 से 19 तक के फुटेज में वह नहीं दिखी। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि एक बार कमरे में जाने के बाद वह बाहर नहीं निकली। उसी दिन उसने जान दे दी। वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी शव के 3 दिन पुराना होने की पुष्टि हुई है। हॉस्टल का कमरा कई दिनों से अंदर से बंद था। जब 19 दिसंबर की सुबह सफाईकर्मी पहुंचा तो उसने दरवाजा खटखटाया। अंदर से कोई जवाब नहीं मिलने पर उसने खिड़की से झांककर देखा तो शव फांसी पर लटक रहा था। इसके बाद पुलिस को बुलाकर शव को उतरवाया गया। आईआईटी कानपुर में कार्यरत ओडिशा कटक निवासी पल्लवी का मंगलवार सुबह हॉस्टल के कमरे में शव लटकता मिला था। बुधवार शाम पिता मधुसूदन शेट्टी, मां अनुपमा और भाई सत्यव्रत शेट्टी गिने चुने रिश्तेदारों के साथ पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंचे। तीन डॉक्टरों डॉ. विनोद कुमार (सीएचसी भीतरगांव), डॉ. बसंतलाल (ट्रामा सेंटर) और डॉ. स्वाती कटियार (बिल्हौर सीएचसी) के पैनल से वीडियोग्राफी के साथ पल्लवी का पोस्टमॉर्टम हुआ। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हैंगिंग से मौत की पुष्टि हुई है। देर शाम पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। देर शाम शव का अंतिम संस्कार भैरव घाट पर ही कर दिया गया। परिजनों ने पुलिस को बताया कि उनका दिमागी संतुलन बिगड़ गया था। इससे पहले वह गांधीनगर में थीं। जहां उनकी हालत काफी ज्यादा खराब हो गई थी। इसके बाद वह वापस ओडिशा आई थीं। कुछ समय रहने के बाद उन्हें आईआईटी में काम करने का मौका मिला। पल्लवी के पिता ने बताया, वह मॉलिक्यूलर बायोलॉजी से पोस्ट डॉक्टरेट कर चुकी थी। इससे पहले वह अमेरिका और जापान में पढ़ाई करने के साथ ही कई साल तक रही थी। पल्लवी पढ़ने में बहुत होशियार थी। पिता ने ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया। बताया कि अगर बेटी के सुसाइड कांड की जानकारी उनके मोहल्ले में पहुंच गई तो उन्हें रहने नहीं देंगे। इसके बाद हाथ जोड़कर फफक कर रोते हुए कोई भी जानकारी देने से इनकार कर दिया। पल्लवी अगस्त 2023 में ही गांधी नगर से कानपुर आईआईटी आई थीं। 

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