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बिकरू में आठ पुलिसकर्मियों के हत्या कांड के तीन वर्षों बाद गैंगस्टर कोर्ट ने दोषियों को सुनाई सज़ा।

संवाददाता।
कानपुर।
नगर के बिकरू गांव की खौफनाक घटना के 3 साल बाद मंगलवार को कानपुर देहात की गैंगस्टर कोर्ट ने पहली बार सजा सुनाई। न्यायाधीश दुर्गेश पांडेय ने विकास दुबे के खजांची जय वाजपेयी समेत 23 आरोपियों को 10-10 वर्ष की सजा और 50-50 हजार जुर्माना लगाया है। जबकि 7 आरोपियों को दोषमुक्त होने पर बरी कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि पुलिस की लचर पैरवी से गुड्‌ड त्रिवेदी समेत 7 आरोपियों को कोई सजा नहीं मिली। कोर्ट के फैसले के बाद दोष मुक्त किए गए 7 आरोपियों के परिजनों ने कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। वहीं अन्य 23 आरोपियों के परिजनों ने हाईकोर्ट में आदेश के खिलाफ अपील करने की भी बात कही है। बिकरू कांड में शामिल 45 आरोपियों को जेल भेजा गया था। इसमें से 5 को पहले ही जमानत मिल चुकी है। मामले में विकास दुबे और उसके गैंग की अब तक 72 करोड़ की संपत्ति जब्त हो चुकी है। इसके साथ ही 7 पर एनएसए और 45 पर गैंगस्टर की कार्रवाई हो चुकी है। इस हत्याकांड ने न सिर्फ प्रदेश बल्कि देश को हिला दिया। डीजीपी से लेकर कानपुर में तैनात एसएसपी दिनेश कुमार और IG मोहित अग्रवाल एक्शन में आए। विकास दुबे के गैंग के एक के बाद एक 6 बदमाशों को एनकाउंटर में मार गिराया। 45 आरोपियों को जेल भेजा गया। बिकरू कांड के बाद विकास दुबे और उसके गैंग के सदस्यों, सहयोगियों सहित 91 लोगों के खिलाफ 79 मुकदमे दर्ज किए गए। जिसमें 63 केस में चार्जशीट दाखिल की गई। 6 अपराधियों की पुलिस मुठभेड़ में मौत होने के कारण इन पर दर्ज मुकदमों में अंतिम रिपोर्ट लगाई गई। बिकरू कांड से संबंधित कोर्ट में ट्रायल चल रहा था। मुकदमे की अच्छी पैरवी करने के लिए कानपुर कमिश्नरेट की ओर से बिकरू पैरवी सेल का गठन किया गया था। ताकि मजबूत पैरवी करके अधिक से अधिक सजा दिलाई जा सके। बिकरू कांड में विकास दुबे के भतीजे अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे का भी हाथ था। खुशी को पुलिस ने जेल भेज दिया था। जनवरी 2023 में खुशी दुबे को जमानत मिल गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने खुशी दुबे को पहले नाबालिग घोषित कराया था। खुशी को जमानत दिलाने के लिए कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के बड़े अधिवक्ता विवेक तन्खा हायर कराया था। विवेक तन्खा ने सुप्रीम कोर्ट में अच्छी पैरवी के बाद खुशी को जमानत दिलाई थी। वकील और आरटीआई एक्टिविस्ट सौरभ भदौरिया ने आरोप लगाया था कि बिकरू कांड से संबंधित कई मुकदमों में जान बूझकर कोर्ट में पैरवी नहीं की जा रही है। खुशी दुबे के वकील शिवाकांत दीक्षित ने एसआईटी पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि खुशी के खिलाफ गलत तरीके से सिम इस्तेमाल मामले में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। 3 साल में इस केस में सिर्फ 4 गवाहों का एग्जामिनेशन हुआ। 6 महीने में एक भी गवाह अब तक कोर्ट में नहीं आया। बिकरू कांड में कानपुर के एसएसपी रहे आईपीएस अनंत देव पर भी विभागीय कार्रवाई हुई थी। तीन साल की जांच के बाद आईपीएस अनंत देव तिवारी को विभागीय क्लीनचिट मिल गई। लापरवाही बरतने के दोषी पाए गए 37 पुलिसवालों पर भी विभागीय एक्शन हुआ। इनमें 6 पुलिस वाले तो तीन साल तक उस वेतन पर काम करेंगे, जो उन्हें नौकरी की शुरुआत में मिलती थी। दो पुलिस वालों को बर्खास्त किया जा चुका है। एसओ विनय तिवारी और बीट चौकी इंचार्ज केके शर्मा को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। इन दोनों को अभी तक जमानत नहीं मिली है। बिकरू कांड के बाद से जेल में बंद है। एसओ विनय तिवारी और दारोगा ने दबिश की मुखबिरी की थी। 

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