April 30, 2026

संवाददाता
कानपुर।
सीएसए के कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस की ओर से फूलों, पौधों और कृषि अपशिष्ट से तैयार किए गए हर्बल रंगो ने दो दिवसीय कृषि मेले में सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह नवाचार न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि त्वचा के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।
कॉलेज की ओर से तैयार इन प्राकृतिक रंगों को हरसिंगार के फूल, गुड़हल के फूल, मूंगफली और चने के छिलके और भूसी जैसी सामग्रियों का इस्तेमाल करके बनाया गया है। इन पदार्थों से नारंगी, लाल और पीले रंग के समान आकर्षक शेड्स प्राप्त किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल कपड़ों को रंगने में किया जाएगा।

कॉलेज ऑफ कम्युनिटी साइंस डिपार्टमेंट की डॉ. अंकिता यादव ने बताया कि हमारा उद्देश्य ऐसे प्राकृतिक विकल्प तैयार करना है जो केमिकल युक्त रंगों का स्थान ले सकें। बाजार में मिलने वाले केमिकल युक्त रंग जब कपड़ों को रंगते हैं, तो वह अंततः त्वचा के संपर्क में आकर नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे त्वचा में एलर्जी, खुजली और अन्य समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन इन हर्बल रंगो से रंगे कपड़े पूरी तरह सुरक्षित हैं। 

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