October 9, 2026

• राज्य सीनियर बॉक्सिंग टीम के चयन ट्रायल में बदइंतजामी की खुली तस्वीर।

संवाददाता
कानपुर। खिलाड़ियों के हाथों में मुक्के हों और आंखों में राज्य का प्रतिनिधित्व करने का सपना, लेकिन जिस रिंग में उन्हें अपनी प्रतिभा साबित करनी हो, वही रिंग बदहाल और असुरक्षित हो तो सवाल उठना लाजिमी है। राज्य की सीनियर मुक्केबाजी टीम के चयन ट्रायल में खेल विभाग की कथित उदासीनता और बदइंतजामी ने खिलाड़ियों की सुरक्षा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। चयन जैसे महत्वपूर्ण ट्रायल के दौरान मुक्केबाजों को फटी हुई मैट और जर्जर रिंग में उतरकर अपना दमखम दिखाना पड़ रहा है।
ट्रायल के दौरान इस्तेमाल हो रही बॉक्सिंग रिंग की तस्वीरें व्यवस्था की बदहाली की कहानी खुद बयां कर रही हैं। रिंग की मैट कई जगह से फटी और क्षतिग्रस्त है। बॉक्सिंग जैसे खेल में जहां खिलाड़ी लगातार फुटवर्क, तेजी और संतुलन के साथ मूवमेंट करता है, वहां ऐसी सतह कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।

खिलाड़ी के पैर का संतुलन बिगड़ा तो मुकाबले का परिणाम ही नहीं, उसका पूरा खेल करियर प्रभावित हो सकता है। इसके बावजूद राज्य टीम के चयन जैसे अहम ट्रायल के लिए रिंग को सुरक्षित और मानक के अनुरूप तैयार नहीं किया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब चयन ट्रायल पहले से निर्धारित था तो रिंग और खेल उपकरणों की स्थिति की जांच ट्रायल से पहले क्यों नहीं की गई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को रिंग की बदहाली दिखाई नहीं दी या फिर दिखाई देने के बावजूद इसे नजरअंदाज कर दिया गया?
खेल जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि रिंग की खराब स्थिति के संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों को पहले भी अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई। ऐसे में सवाल सिर्फ एक रिंग की खराब हालत का नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर खेल विभाग की प्राथमिकता का भी है।
विडंबना देखिए—राज्य टीम में जगह बनाने के लिए खिलाड़ी घंटों अभ्यास कर रहे हैं, चोट और थकान की परवाह किए बिना रिंग में उतर रहे हैं, लेकिन उन्हें जिस व्यवस्था के भरोसे अपनी प्रतिभा दिखानी है, वही व्यवस्था उनके सामने जोखिम बनकर खड़ी है।
इन खिलाड़ियों के लिए यह सिर्फ एक ट्रायल नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और सपनों का इम्तिहान है। एक-एक मुकाबला उनके चयन और भविष्य से जुड़ा है। ऐसे में उन्हें सुरक्षित और मानक सुविधाएं उपलब्ध कराना खेल विभाग की जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं।

खिलाड़ी पूरी ऊर्जा के साथ मुकाबले में उतर रहे हैं और अपनी प्रतिभा के दम पर राज्य टीम में जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। खिलाड़ियों ने व्यवस्था की खामियों को पीछे छोड़ दिया, लेकिन इन तस्वीरों ने खेल विभाग की कार्यशैली पर कई सवाल जरूर छोड़ दिए हैं।
खेल विशेषज्ञों और खिलाड़ियों का कहना है कि यदि प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जाती है तो उन्हें सुरक्षित और आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। मेडल की उम्मीद करने से पहले खिलाड़ियों को सुरक्षित रिंग देना जरूरी है। जिला मुक्केबाजी संघ के सचिव संजीव दीक्षित के अनुसार उन्होंने कई बार ग्रीन पार्क के क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी से मुक्केबाजी रिंग को दुरुस्त करने प्रार्थना की गई लेकिन उन्होंने प्रशिक्षक के ऊपर मामले को तलने का काम किया जबकि प्रशिक्षक का कहना है कि बंदरों ने हालात बद से बदतर कर दिए हैं जबकि क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी कर्मवीर सिंह अपने कार्यालय पर ही मौजूद नहीं रहे जिससे उनका पक्ष जाना नहीं जा सका।

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