June 30, 2026

• धूल से सांस लेना मुश्किल, बारिश में बनेगा दलदल।

संवाददाता

कानपुर।  शहर की सीटीआई नहर की सफाई का काम समाप्त हुए करीब दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा अब यहां के आम लोगों और राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। नहर से निकाली गई गंदगी और सिल्ट को ठिकाने लगाने के बजाय, उसे सीधे सड़क के किनारे ही डाल दिया गया है।

गंदगी का यह अंबार अब सूख चुका है, जिससे उड़ने वाली धूल ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। रोजाना इस व्यस्त मार्ग से हजारों की संख्या में राहगीर और गाड़ियां गुजरती हैं, जिन्हें न सिर्फ बदबू और धूल का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि संकरे हो चुके रास्ते के कारण हर वक्त हादसे का डर भी बना रहता है।

स्थानीय निवासी सूर्य प्रकाश शाक्य ने ग्राउंड पर बदहाली का दर्द बयां करते हुए बताया, “इस गंदगी को नहर से निकले हुए लगभग 12 से 13 दिन बीत चुके हैं। शुरुआत में यह गीली थी, लेकिन अब यह पूरी तरह से सूख चुकी है। प्रशासन चाहे तो इसे आसानी से गाड़ियों में भरकर उठवा सकता है, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।

रास्ता इतना संकरा हो गया है कि इलाके की महिलाओं को बाजार या सब्जी लेने जाने के लिए भी जगह नहीं मिल रही है। अगर वक्त रहते इसे नहीं हटाया गया, तो आने वाली बरसात में यह पूरी सड़क कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाएगी।”

नहर की गंदगी सड़क पर फैलाए जाने की वजह से जो रास्ता पहले चौड़ा था, वह अब बेहद पतला हो चुका है। भारी वाहनों के गुजरने पर पैदल चलने वालों और टू-व्हीलर चालकों के लिए किनारे होने तक की जगह नहीं बचती। सुबह और शाम के वक्त जब ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है, तो यहां जैम जैसी स्तिथि भी बन जाती है।

राहगीरों का कहना है,कि सफाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की गई है, क्योंकि नहर का कचरा सड़क पर डाल देने से समस्या खत्म होने के बजाय दोगुनी हो गई है।

गंदगी के इस तरह खुले में पड़े रहने से स्थानीय दुकानदारों और निवासियों में बीमारियों के फैलने का डर सता रहा है। तेज हवा चलने या गाड़ियां गुजरने पर सूखी मिट्टी और धूल के गुबार उड़ते हैं, जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है और आंखों में जलन की समस्या हो रही है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस सूखे कचरे को तुरंत यहां से हटाकर डंपिंग ग्राउंड भेजा जाए, ताकि लोगों को इस नारकीय स्थिति से निजात मिल सके।