• शव पहुंचते ही बिलख पड़े परिजन।

संवाददाता
कानपुर। लखनऊ में हुए अग्निकांड में कानपुर के संयम विज और सूरजभान सिंह की जलकर मौत हो गई। दोनों के पिता का पहले ही निधन हो चुका है। गोविंद नगर निवासी संयम विज और बर्रा निवासी सूरजभान सिंह लखनऊ स्थित एक एनीमेशन स्टूडियो में काम करते थे। साथ काम करने की वजह से दोनों के बीच गहरी दोस्ती भी थी।
मंगलवार सुबह दोनों के शव कानपुर पहुंचे। शव देखते ही परिजनों में कोहराम मच गया। दोनों की मांए अपने बेटों के शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगीं। वह बार-बार अपने बेटों का चेहरा देखतीं और बिलख उठतीं। परिवार के अन्य सदस्य उन्हें ढांढस बंधाने की कोशिश करते रहे।
मृतक सूरज के बड़े भाई सुधीर ने बताया कि मेरा भाई 4 सालों से 3डी एनीमेशन का काम करता था। मेरा छोटा भाई हमें छोड़कर चला गया। हमें सरकार से उम्मीद है कि मामले की निष्पक्ष जांच करके दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गोविंद नगर ब्लॉक-11 निवासी संयम विज की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। करीब 10 दिन पहले उनकी दादी का निधन हुआ था और मंगलवार को उनकी तेरहवीं होनी थी। परिवार के लोग संयम का इंतजार कर रहे थे, लेकिन उससे पहले ही उनकी मौत की खबर पहुंच गई।
संयम के मामा मोनू सेठी ने बताया कि दादी के निधन के बाद वह घर आए थे और तेरहवीं में शामिल होने के लिए मंगलवार को दोबारा आने वाले थे। इससे पहले ही हादसे में उनकी मौत हो गई।
संयम के पिता पुष्पराज का करीब 15 वर्ष पहले निधन हो गया था। लाटूश रोड पर उनका पुली का कारोबार था। पिता की मौत के पांच साल बाद उनकी मां सोनिया ने सीमू देसाई से दूसरी शादी कर ली थी। परिवार में बड़े भाई शुभम हैं, जो गुरुग्राम में नौकरी करते हैं और पत्नी पलक के साथ वहीं रहते हैं।
संयम के मामा सौरभ दुआ ने बताया कि जिस कॉम्प्लेक्स में उनका भांजा काम करता था, वहां सेंसर युक्त गेट लगे थे। आग लगने के बाद सेंसर ने काम करना बंद कर दिया, जिससे गेट नहीं खुल सका। हादसे के दौरान कई लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन गेट बंद होने और धुएं से दम घुटने के कारण संयम समेत कई लोगों की मौत हो गई। अगर कॉम्प्लेक्स में सेंसर वाला गेट नहीं होता या समय रहते गेट खुल जाता, तो इतनी जानें नहीं जातीं। संयम अच्छी नौकरी कर रहा था। परिवार उसके विवाह के लिए लड़की देख रहा था।
बर्रा-7 निवासी सूरजभान सिंह की मौत ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। उनके पिता शिवराम का पहले ही निधन हो चुका है। सूरजभान नौकरी के सिलसिले में लखनऊ में रहते थे, लेकिन हर शनिवार घर आते और रविवार शाम को वापस लौट जाते थे।
उनके भतीजे करन ने बताया- रविवार को ही वह काम के लिए लखनऊ गए थे, लेकिन किसी को अंदाजा भी नहीं था कि यह उनकी अंतिम विदाई साबित होगी। सूरजभान के परिवार में मां मीरा और छोटा भाई सम्राट हैं। वह ऋषिकेश गए हुए थे। घटना की सूचना मिलते ही वह तुरंत कानपुर के लिए रवाना हो गए।
दोनों युवकों के परिजनों ने बताया कि वह हंसमुख, जिंदादिल और हमेशा लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे। एक ओर जहां घर में तेरहवीं की तैयारी थी, वहीं अब अंतिम संस्कार की तैयारी ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया है।






