May 4, 2026

प्री मानसून जैसी हवाएं देंगी अगले 7 दिन गर्मी से राहत।




संवाददाता
कानपुर। आज सुबह से ही तेज हवा चल रही है। हवाओं की गति 8 किलोमीटर प्रति घंटा के करीब है। आसमान में हल्के बादल छाए हुए हैं। बादलों के बीच से सूरज लुकाछिपी कर रहा है। नर्म धूप भी निकली हुई है। अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के करीब है
शहर के लोगों को मई के पहले सप्ताह में भीषण गर्मी से राहत मिलने के आसार हैं। सुबह से धूप निकलने के बावजूद हल्के बादल छाए रहने और हवाएं चलने से मौसम सुहाना बना हुआ है। बीते दिनों की तुलना में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों ने राहत महसूस की। मौसम विशेषज्ञ बताते हैं कि हवाओं को रुख प्री मानसून जैसा है।
सीएसए के वेदर डिपार्टमेंट की ओर से जारी रिपोर्ट के अनुसार अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 5 डिग्री कम रहा । तापमान में आई इस गिरावट से लोगों को तपिश से राहत मिली है। बताते चलें कि अप्रैल महीने में तापमान 44.1 डिग्री तक पहुंचा था।
आज सुबह आसमान साफ रहा और तेज धूप निकली, लेकिन इसके साथ चल रही ठंडी हवाओं ने गर्मी का असर कम कर दिया। दिन में धूप के साथ 8.2 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलती रहीं। वहीं देर शाम बादल छाने और तेज हवाएं चलने से मौसम और भी खुशनुमा हो गया।
रात में भी मौसम सुहाना बना हुआ था। न्यूनतम तापमान 22.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि सामान्य से 0.2 डिग्री कम रहा। रात में तापमान कम रहने व हवाओं के चलने से मौसम राहत भरा बना हुआ है। भोर के समय मौसम हल्का ठंडक वाला बना हुआ है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन सुनील पांडेय ने बताया कि आने वाले 24 घंटे में भी धूप नरम रहेगी। इसके अलावा बादलों की आवाजाही से नमी का प्रवाह अधिक होने के साथ गर्मी और हीट इंडेक्स भी कम रहने की संभावना है। तापमान सामान्य से कम या आसपास रहने की संभावना है। चार व पांच मई को तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी, धूल भारी आंधी और कहीं कहीं ओलावृष्टि की संभावना है।
इस बार जून से सितंबर के बीच उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम. महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल के जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मॉनसून को प्रभावित कर सकती है।
डा. महापात्रा ने अल नीनो के बारे में बताया कि इसमें  समुद्र का तापमान 3-4 डिग्री बढ़ता है। इसका प्रभाव 10 साल में दो बार होता है। इससे ज्यादा बारिश वाले क्षेत्र में कम और कम बारिश वाले क्षेत्र में ज्यादा बारिश होती है।
इसी तरह से ला नीना में समुद्र का पानी तेजी से ठंडा होता है। इसका दुनियाभर के मौसम पर असर पड़ता है। आसमान में बादल छाते हैं और अच्छी बारिश होती है।

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