
संवाददाता
कानपुर। एडवोकेट राजाराम हत्याकांड और जमीन विवाद के मामले में कोतवाली पुलिस ने जमीन का एग्रीमेंट कराने वाले एडवोकेट मनोज सक्सेना से 3 घंटे तक पूछताछ करी। इस दौरान पुलिस ने उनसे 40 सवाल पूछे। वहीं, इस मामले में बुलाए गए दूसरे एडवोकेट जितेंद्र कुमार सिंह रिश्तेदार के निधन का हवाला देकर नहीं पहुंचे। पुलिस उन्हें पूछताछ के लिए दोबारा बुलाएगी।
आईआईटी में डिप्टी रजिस्ट्रार रहे अधिवक्ता राजाराम वर्मा को 22 दिसंबर 2021 को उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राजाराम वर्मा के बेटे नरेंद्र देव ने नवाबगंज थाने में राजबहादुर और एनआरआई सिटी के मालिकों समेत चार पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नवाबगंज पुलिस ने इस मामले में चौबेपुर के शूटर दिलनियाज और रोहित यादव, हत्या की सुपारी लेने वाले फत्तेपुर के अंकित यादव और नवाबगंज भोपालपुरवा के राम खिलावन को जेल भेजा था, जबकि एफआईआर में दर्ज राजबहादुर का नाम निकाल दिया था।
मामले के विवेचक कोतवाली प्रभारी जगदीश पांडेय ने बताया कि दोनों अधिवक्ताओं को पूछताछ के लिए तलब किया गया था। नवाबगंज के सुक्खीपुरवा नई बस्ती निवासी अधिवक्ता जितेंद्र कुमार सिंह ने आने में असमर्थता जताई। वहीं क्यू ब्लॉक शारदा नगर निवासी अधिवक्ता मनोज सक्सेना को कोतवाली बुलाकर उनसे जमीन के एग्रीमेंट को लेकर कई बिंदुओं पर पूछताछ की गई।
जमीन के एग्रीमेंट के लिए रुपये कहां से आए, इस सवाल पर अधिवक्ता मनोज पहले चुप रहे, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि एग्रीमेंट के लिए उन्होंने न तो किसी को रुपये दिए और न ही कोई चेक दिया। इंस्पेक्टर के अनुसार मनोज ने बताया कि एग्रीमेंट से जुड़ी लेन-देन की प्रक्रिया साथी अधिवक्ता जितेंद्र सिंह ने रामखिलावन, राजबहादुर और अन्य लोगों के साथ मिलकर की थी।
विवेचक जगदीश पांडेय के मुताबिक अगले एक-दो दिन में जितेंद्र कुमार सिंह को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा। उन्होंने बताया कि मनोज सक्सेना और जितेंद्र सिंह ने मृतक राजाराम की छोटी बहू रेखा वर्मा से 26 दिसंबर 2018 को तीन आराजी की कुल 2.12 हेक्टेयर जमीन का एग्रीमेंट कराया था। राजाराम हत्याकांड से पहले हुए इस एग्रीमेंट के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया था।






