
स्वतंत्र शुक्ला
कानपुर। शहर में एक तम्बाकू कारोबारी केके मिश्रा परिवार के लिए लग्ज़री सुपरकार लैंबोर्गिनी की सवारी बेहद महंगी साबित हुई। करोड़ों रुपये कीमत वाली सुपरकार लैंबोर्गिनी से हुए एक्सीडेंट के बाद उनके पुत्र के सुरक्षा कर्मियों से जनता का विवाद और पुलिस कार्रवाई के बाद आखिरकार अदालत के आदेश पर देर रात वाहन को थाने से रिहा किया गया। लगभग 15 से भी अधिक दिनों तक थाने की शोभा बढ़ाने वाली सुपर कार को छुड़ाने के लिए परिवार को भारी जमानत राशि लगभग 8 करोड़ के आसपास जमा करनी पड़ी, जो लगभग गाड़ी की कीमत के बराबर बताई जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने शहर में चर्चा का विषय बना दिया है।
जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले मिश्रा परिवार की इस लग्ज़री सुपरकार ने कुछ लोगों को सड़क पर घायल कर दिया था ।
प्रारंभिक जांच में कई आवश्यक दस्तावेजों और अनुमति जुड़े सवाल सामने आए, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कार को जब्त कर थाने में खड़ा करा दिया। घटना के बाद से ही यह मामला शहर में सुर्खियों में बना रहा और लोग महंगी कार के थाने में खड़े होने की चर्चा करते रहे।
बताया जा रहा है कि वाहन की जब्ती के बाद मिश्रा परिवार ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। अदालत में सुनवाई के दौरान वाहन को सुपुर्दगी में देने को लेकर लंबी बहस चली। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद सशर्त आदेश जारी किया कि निर्धारित जमानत राशि जमा कराने पर वाहन को छोड़ा जा सकता है। अदालत के आदेश के बाद परिवार ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और भारी जमानत राशि जमा कराई।कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद देर रात थाने में हलचल बढ़ गई। संबंधित दस्तावेजों की जांच और आदेश की पुष्टि के बाद पुलिस ने कार को सुपुर्दगी में सौंपने की प्रक्रिया शुरू की। देर रात करीब आधी रात के आसपास कागजी कार्यवाही पूरी होने पर लग्ज़री कार थाने के परिसर से बाहर निकाली गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में इस तरह की महंगी कार का थाने में खड़ा होना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया था। कई लोग केवल कार को देखने के लिए भी थाने के आसपास पहुंच रहे थे। सोशल मीडिया पर भी इस घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होती रहीं, जिनमें सुपरकार को पुलिस थाने में खड़ा देखा जा सकता था।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून सभी के लिए समान है और नियमों का पालन करना हर वाहन चालक की जिम्मेदारी है, चाहे वाहन साधारण हो या करोड़ों की कीमत वाली लग्ज़री कार। अधिकारियों के अनुसार, वाहन से जुड़े कागजात और नियमों के उल्लंघन की जांच के आधार पर ही कार्रवाई की गई थी। अदालत के आदेश के बाद विधिक प्रक्रिया के तहत वाहन को सुपुर्द किया गया है।
इस पूरे मामले ने शहर में एक संदेश भी दिया है कि सड़कों पर ट्रैफिक नियमों और कानूनी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य है। लग्ज़री कार होने के बावजूद नियमों से छूट नहीं मिल सकती। मिश्रा परिवार के लिए यह अनुभव काफी महंगा साबित हुआ, क्योंकि कार की सुपुर्दगी के लिए बड़ी जमानत राशि जमा करनी पड़ी और कई दिनों तक वाहन थाने में ही खड़ा रहा। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद कार परिवार को मिल चुकी है, लेकिन इस घटना ने शहर में चर्चा छेड़ दी है कि नियमों की अनदेखी किसी के लिए भी भारी पड़ सकती है। पुलिस भी ऐसे मामलों में सख्ती बरतने के संकेत दे चुकी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।






