March 3, 2026

संवाददाता 
कानपुर।
  अरबपति कारोबारी केके मिश्रा के बेटे ने जिस 12 करोड़ की लैंबोर्गिनी कार से 6 लोगों को टक्कर मारी थी, वह कार 8.30 करोड़ के बेल बॉन्ड  पर थाने से छूट गई।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सूरज मिश्रा की कोर्ट ने दिन में कार को रिलीज करने का आदेश दिया। आधी रात 12:30 बजे कार थाने से छुड़वाई गई।

8 फरवरी को हादसे के बाद पुलिस कार को थाने ले आई थी और कवर से ढक दिया गया था। तब से कार थाने में ही खड़ी थी।
4 दिन बाद यानी 12 फरवरी को पुलिस ने आरोपी कार मालिक शिवम को पकड़ा, लेकिन जमानती धाराओं में मुकदमा होने के चलते वह 7 घंटे में ही कोर्ट से छूट गया।
उसी दिन यानी 12 फरवरी को ही शिवम ने कार रिलीज कराने के लिए कोर्ट में एप्लीकेशन दी थी। मुकदमे की पैरवी के लिए अटॉर्नी अपने करीबी सुनील कुमार को दी थी। 

न्यायालय ने कार को रिलीज करने में ये शर्त रखी है कि 
कार न तो बेची जाएगी और न ही किसी दूसरे के नाम ट्रांसफर की जाएगी।
कार मिलने के बाद उसके रंग, इंजन नंबर या चेसिस नंबर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
जब भी कोर्ट या जांच अधिकारी कार को तलब करेंगे, आवेदक उसे अपने खर्च पर पेश करेगा।
किसी भी शर्त के उल्लंघन पर आवेदक को राज्य सरकार के पक्ष में पर्सनल बॉन्ड की राशि जमा करनी होगी।
दस्तावेजों की जांच में यदि कोई कमी पाई जाती है, तो कोर्ट के आदेश पर नई जमानत,प्रतिभूति दाखिल करनी होगी।
शिवम के वकील धर्मेंद्र सिंह धर्मू ने बताया कि बॉन्ड के तौर पर 7.50 करोड़ रुपए और 1 करोड़ रुपए कीमत की दो अलग-अलग कारों के दस्तावेज अंडरटेकिंग के रूप में दाखिल किए गए हैं। इसके बाद कोर्ट का आदेश मिलने पर देर रात ग्वालटोली थाने की पुलिस ने कार को रिलीज कर दिया।
कानपुर में वीआईपी रोड इलाके पर 8 फरवरी को करीब 14 करोड़ की लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को टक्कर मार दी थी। कार आर्यनगर में रहने वाले कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम चला रहा था। हादसे के बाद पुलिस कार को थाने ले आई। कवर से ढक दिया था।
पहले तो पुलिस ने एफआईआर  दर्ज नहीं की। मामला सुर्खियों में आया तो 6 घंटे बाद रात 8:30 बजे कार नंबर के आधार पर अज्ञात ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर  दर्ज की। बाद में अखिलेश यादव ने एक्स पर ट्वीट कर इस मामले को तूल दिया। फिर सीएम योगी ने कार्रवाई के आदेश दिए। तब पुलिस ने 24 घंटे बाद शिवम का नाम एफआईआर में जोड़ा।
10 फरवरी को कारोबारी केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे थे। दावा किया था कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, ड्राइवर मोहन कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिससे बेटे की तबीयत बिगड़ गई थी।
11 फरवरी को इस केस में बड़ा यू-टर्न हुआ था। हादसे में घायल और एफआईआर कराने वाले मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता कर लिया था। कारोबारी के वकील धर्मेंद्र सिंह ने कोर्ट में जो समझौतानामा पेश किया था, उसमें तौसीफ की ओर से कहा गया कि इलाज का खर्च दे दिया गया है। वह पूरी तरह संतुष्ट है और कोई कार्रवाई नहीं चाहता।
पीड़ित ने यह भी दावा किया था कि हादसे के वक्त गाड़ी मोहन ही चला रहा था। हालांकि, डीसीपी अतुल कुमार ने इस बात से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस को किसी तरह का कोई समझौतानामा नहीं मिला।
11 फरवरी की ही दोपहर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा की ओर से ड्राइवर मोहन अचानक कानपुर कोर्ट पहुंचा और सरेंडर कर दिया। मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी वही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। तभी हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा गया और दरवाजा खोला गया, तो कार से निकल गया था।
हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर की अर्जी खारिज कर दी। उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा- पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। कोर्ट में जब मोहन से मीडिया ने पूछा कि इस कार में कितने गियर होते हैं, तो उसने बताया कि 9 गियर होते हैं। जबकि एक्सपर्ट से बात करने पर सामने आया कि कार में 7 गियर और एक बैक गियर, यानी कुल 8 गियर होते हैं।
12 फरवरी को पुलिस ने कारोबारी के आरोपी बेटे शिवम मिश्रा को अरेस्ट किया। कोर्ट में पेश किया गया। 7 घंटे में ही शिवम रिहा हो गया। आरोपी के वकील अनंत शर्मा ने बताया- पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन की रिमांड मांगी थी। जज ने पूछा कि रिमांड क्यों चाहिए, जबकि सारी धाराएं जमानती हैं? इस पर इन्वेस्टिगेशन अफसर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। इसके चलते कोर्ट ने रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। फिर 20 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भरने के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया।