March 13, 2026

संवाददाता

कानपुर।  इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 16 अगस्त शनिवार के दिन मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 15 अगस्त को रात्रि 11:49 बजे से प्रारंभ होकर 16 अगस्त को रात्रि 9:34 बजे तक रहेगी। ये जानकारी ज्योतिषाचार्य पं. गौरव तिवारी ने दी।
इस वर्ष भाद्रपद कृष्ण अष्टमी अर्ध रात्रि में तथा रोहिणी नक्षत्र का संयोग एक साथ एक ही दिन नहीं बन पा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में उदय कालिक अष्टमी तिथि की प्रधानता को शास्त्र वचनों के आधार पर 16 अगस्त दिन शनिवार को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत, पर्व सबके लिए मान्य होगा।
पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाता है।
पं. गौरव तिवारी ने बताया कि इस बार जन्माष्टमी पर अमृत सिद्धि और सर्वार्थसिद्धि का अद्भुत योग के साथ-साथ वृद्धि, ध्रुव, श्रीवत्स, गज लक्ष्मी और बुधादित्य योग बन रहा है। इस बार जन्माष्टमी पर शुक्र और गुरु दोनों एक ही राशि मिथुन में है।
इसलिए गजलक्ष्मी योग बन रहा है। इसके अलावा सूर्य और बुद्ध के एक ही राशि में होने से बुधादित्य योग बन रहा है। ये दोनों योग बहुत ही शुभ माने जाते हैं। इन योगों में पूजा अधिक फल दाई रहेगी।
ऐसे समय में श्रीकृष्ण ने जन्म लेकर न केवल कंस का अंत किया, बल्कि अपने पराक्रम और नीति से धर्म की पुनर्स्थापना की। यही कारण है कि जन्माष्टमी को केवल जन्मोत्सव नहीं, बल्कि आशा, न्याय और धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है।
भगवान कृष्ण का एक प्रमुख संदेश है कि हमें केवल अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए और उनके परिणाम की चिंता नहीं करनी चाहिए, जैसा गीता में कहा गया है, कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन इसका मतलब है कि हमें अपने काम को ईमानदारी से करना चाहिए और उसके परिणाम के बारे में सोचने की बजाय अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।