
संवाददाता
कानपुर। शहर को हराभरा और आकर्षक बनाने के उद्देश्य से मेट्रो कॉरिडोर के डिवाइडरों पर लगाए गए पौधे अब विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ते नजर आ रहे हैं। लाखों रुपये खर्च करके लगाए गए इन पौधों का समय पर रखरखाव नहीं होने से अधिकांश स्थानों पर हरियाली गायब हो चुकी है। कहीं पौधे भीषण गर्मी और पानी के अभाव में सूख गए हैं तो कहीं आवारा पशुओं ने उन्हें अपना निवाला बना लिया। नतीजतन मेट्रो मार्ग के कई डिवाइडर अब वीरान और बदहाल दिखाई दे रहे हैं।
शहर के विभिन्न हिस्सों में मेट्रो ट्रैक के नीचे बने डिवाइडरों पर सौंदर्यीकरण के तहत बड़ी संख्या में सजावटी और छायादार पौधे लगाए गए थे। शुरुआती दिनों में इनकी नियमित सिंचाई और देखरेख की गई, लेकिन कुछ ही समय बाद व्यवस्था पूरी तरह ढीली पड़ गई। कई स्थानों पर पौधों की जगह केवल सूखी टहनियां और खाली गड्ढे ही नजर आते हैं।
स्थिति यह है कि चुन्नीगंज से फूलबाग जाने वाले कारीडोर में जहां पौधे जीवित हैं, वहां भी उनके चारों ओर सुरक्षा के लिए कोई जाली या बैरिकेडिंग नहीं है। इसका फायदा उठाकर आवारा गाय और अन्य पशु पौधों को चर जाते हैं। दूसरी ओर तेज धूप और भीषण गर्मी के बीच नियमित सिंचाई नहीं होने से बड़ी संख्या में पौधे सूख चुके हैं। कई स्थानों पर खरपतवार उग आई है, जिससे डिवाइडरों की सुंदरता पूरी तरह खत्म हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधे लगाने के बाद नियमित निगरानी और देखभाल नहीं होने से पूरा अभियान केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। लोगों का आरोप है कि मेट्रो प्रशासन और संबंधित एजेंसियां रखरखाव को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही हैं। समय-समय पर सिंचाई, खाद और पौधों की सुरक्षा की व्यवस्था होती रहे तो अधिकांश पौधों को बचाया जा सकता है।
पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि शहरी क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के लिए इस तरह की परियोजनाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं, लेकिन केवल पौधे लगाकर फोटो खिंचवा लेने से उद्देश्य पूरा नहीं होता। पौधों के जीवित रहने तक उनकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
शहरवासियों ने मांग की है कि मेट्रो प्रशासन डिवाइडरों पर लगे पौधों का तत्काल सर्वे कराए, सूखे पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाए जाएं तथा नियमित सिंचाई और सुरक्षा की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अन्यथा हरियाली बढ़ाने का दावा कागजों तक ही सीमित रह जाएगा और सरकारी धन भी व्यर्थ साबित होगा।






