• केकेआर के उपकप्तान ने अकेले पलटा मैच।

संवाददाता
लखनऊ। इस मैच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्रिकेट में एक खिलाड़ी भी विपक्षी टीम पर भारी पड़ सकता है। केकेआर के उपकप्तान रिंकू सिंह ने जिस तरह से तीनों विभागों—बल्लेबाजी, फील्डिंग और फिनिशिंग—में प्रदर्शन किया, वह उन्हें इस मैच का निर्विवाद नायक बनाता है।
लखनऊ के लिए यह हार सिर्फ एक मैच की हार नहीं थी, बल्कि एक ऐसे पल की हार थी, जहां जीत उनकी मुट्ठी में थी। वहीं केकेआर के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली और आगे के मुकाबलों के लिए प्रेरणादायक साबित होगी।क्रिकेट का मैदान अक्सर अनिश्चितताओं का खेल कहा जाता है, लेकिन रविवार की रात भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में जो कुछ हुआ, वह इस खेल के रोमांच को नई परिभाषा देता है। लखनऊ सुपर जायंट्स और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच खेला गया यह मुकाबला सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि उतार-चढ़ाव, दबाव, संघर्ष और करिश्मे की कहानी बन गया। इस कहानी के नायक बने रिंकू सिंह, जिन्होंने अपने ‘वन मैन शो’ से लखनऊ के जबड़े से जीत छीन ली।
जब हार और जीत के बीच खड़ा था रिंकू का जुनून
मैच के अंतिम क्षणों में लखनऊ की जीत लगभग तय लग रही थी। घरेलू दर्शक जश्न के लिए तैयार थे, लेकिन क्रिकेट में आखिरी गेंद तक कुछ भी संभव होता है—और इस ‘संभव’ को हकीकत में बदलने का काम किया रिंकू सिंह ने। उन्होंने पहले बल्ले से टीम को संभाला, फिर फील्डिंग में कमाल दिखाया और अंत में सुपर ओवर में मैच को खत्म कर दिया।
टॉस के बाद बल्लेबाजी करने उतरी केकेआर की शुरुआत बेहद खराब रही। शुरुआती ओवरों में ही विकेट गिरते चले गए और टीम पावरप्ले में सिर्फ 31 रन पर 3 विकेट गंवा बैठी। एक समय ऐसा लग रहा था कि टीम 130 तक भी नहीं पहुंच पाएगी।
इसी मुश्किल घड़ी में क्रीज पर आए रिंकू सिंह। उन्होंने परिस्थिति को भांपते हुए संयम और आक्रामकता का संतुलित प्रदर्शन किया। शुरुआत में उन्होंने गेंद को समझने में समय लिया, लेकिन जैसे-जैसे पारी आगे बढ़ी, उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता गया।
रिंकू सिंह ने मात्र 51 गेंदों में नाबाद 83 रन बनाए, जिसमें 5 छक्के और कई शानदार चौके शामिल थे। उनकी बल्लेबाजी का सबसे खास पहलू था—स्थिति के अनुसार खेलना। जब टीम को संभालने की जरूरत थी, उन्होंने सिंगल-डबल लिए, और जब तेजी से रन बनाने की जरूरत पड़ी, तो बड़े शॉट्स लगाए।खासतौर पर दिग्वेश राठी के ओवर में लगातार चार छक्के जड़कर उन्होंने मैच की दिशा ही बदल दी। इस एक ओवर ने केकेआर को 150 के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई और अंततः टीम 155/7 का स्कोर खड़ा करने में सफल रही।हालांकि केकेआर का स्कोर सम्मानजनक था, लेकिन इसका बड़ा श्रेय मोहसिन खान की गेंदबाजी को भी जाता है। उन्होंने 5/23 का शानदार प्रदर्शन किया, जो उनके टी20 करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा।
मोहसिन ने शुरुआत में ही अजिंक्य रहाणे को आउट कर केकेआर को झटका दिया। इसके बाद उन्होंने लगातार विकेट लेते हुए टीम की कमर तोड़ दी। उनकी गेंदों में गति, उछाल और विविधता का बेहतरीन मिश्रण था।कैमरन ग्रीन जैसे बल्लेबाज को भी उन्होंने अपनी रणनीति से फंसा लिया। शॉर्ट पिच गेंद पर ग्रीन का पुल शॉट गलत टाइमिंग के कारण सीधे विकेटकीपर के हाथों में चला गया।
मैच में एक और अनोखी घटना देखने को मिली, जब अंगकृष रघुवंशी ‘ऑब्स्ट्रक्टिंग द फील्ड’ के तहत आउट हुए। यह इस सीजन की पहली ऐसी घटना थी।रघुवंशी ने रन लेने के दौरान थ्रो को रोकने की कोशिश की, जिसे थर्ड अंपायर ने जानबूझकर की गई बाधा मानते हुए उन्हें आउट करार दिया। इस फैसले ने मैच में और रोमांच जोड़ दिया।155 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी लखनऊ की शुरुआत संतुलित रही। मिचेल मार्श और अन्य बल्लेबाजों ने टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया।ऋषभ पंत ने भी तेज रन बनाने की कोशिश की, जबकि हिम्मत सिंह ने छोटी लेकिन प्रभावी पारी खेली। अंत में मोहम्मद शमी ने 6 गेंदों में 11 रन बनाकर स्कोर बराबर कर दिया ।जब लखनऊ जीत के करीब था, तभी रिंकू सिंह ने बाउंड्री लाइन पर मिचेल मार्श का शानदार कैच लपका। यह कैच न सिर्फ तकनीकी रूप से शानदार था, बल्कि मानसिक रूप से भी केकेआर को मैच में वापस ले आया।मैच सुपर ओवर में पहुंचा, लेकिन यहां लखनऊ पूरी तरह बिखर गया। निकोलस पूरन पहली ही गेंद पर आउट हो गए, जबकि एडेन मार्करम बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए।
केकेआर को जीत के लिए सिर्फ 2 रन चाहिए थे, और रिंकू सिंह ने पहली ही गेंद पर चौका लगाकर मैच खत्म कर दिया।केकेआर के गेंदबाजों ने भी शानदार अनुशासन दिखाया। सुनील नरेन ने 3 गेंदों में ही लखनऊ को समेट दिया यही नहीं उन्होंने लगातार डॉट गेंदें डालकर दबाव बनाया। उन्होंने पूरन को आउट कर मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया।क्रिकेट के इस रोमांचक अध्याय को लंबे समय तक याद रखा जाएगा—क्योंकि यह सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि ‘रिंकू सिंह का शो’ था।






