
संवाददाता
कानपुर। शहर और ग्रामीण इलाकों को हरा-भरा बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। इस अभियान में वन विभाग समेत कुल 28 विभाग शामिल किए गए हैं।
सभी विभागों को अपने हिस्से की जमीन चिन्हित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस बार पौधारोपण के लिए ‘मियावाकी’ जैसी आधुनिक तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे कम जगह में घना जंगल विकसित किया जा सके। वन विभाग को समय से नर्सरी तैयार रखने और पर्याप्त पौध उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अब खेत में खड़े पेड़ सिर्फ छाया और फल ही नहीं देंगे, बल्कि किसानों की आय का नया जरिया भी बनेंगे। कानपुर जनपद में पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बड़ा प्लान तैयार किया गया है। वर्ष 2026-27 में जिले के 28 सरकारी विभाग मिलकर 35 लाख 48 हजार से अधिक पौधों का रोपण करेंगे। इस बार खास फोकस ‘कार्बन क्रेडिट’ योजना पर है, जिससे किसानों को प्रति पेड़ 250 से 350 रुपए तक का अतिरिक्त लाभ मिल सकेगा।
भारत सरकार ने वर्ष 2070 तक देश को कार्बन न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसी दिशा में कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया जा रहा है।
अगर किसान अपने खेत की मेड़ या खाली जमीन पर पेड़ लगाते हैं, तो वे वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने में मदद करते हैं। इसके बदले उन्हें ‘कार्बन क्रेडिट’ मिलता है।
अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत किसानों को प्रति पेड़ 250 से 350 रुपए तक का लाभ मिल सकता है, जो उनकी नियमित खेती की आय के अलावा अतिरिक्त कमाई होगी।
योजना को प्रभावी बनाने के लिए कृषि और उद्यान विभाग को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले में ऐसे किसानों की सूची तैयार की जा रही है, जिन्होंने पहले से पेड़ लगाए हैं या जो पौधारोपण के इच्छुक हैं।
यह सूची वन विभाग को सौंपी जाएगी, ताकि उनका रजिस्ट्रेशन कर योजना से जोड़ा जा सके। प्रशासन ऐसे पौधों पर विशेष जोर दे रहा है, जो तेजी से बढ़ते हैं और जिनकी लकड़ी या फल बाजार में अच्छे दाम पर बिकते हैं।
पौधारोपण अभियान को सिर्फ पेड़ लगाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी। अधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर अभियान को सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई है। प्रशासन का लक्ष्य साफ है कि पर्यावरण को स्वच्छ बनाना और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना। इसके लिए आम लोगों और किसानों को जागरूक करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस ‘ग्रीन इकोनॉमी’ का हिस्सा बन सकें।






