• हर दिन होगी जांच, विद्युत लोड का होगा निर्धारण।

संवाददाता
कानपुर। नगर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने हैलट अस्पताल और उससे जुड़े सभी बड़े अस्पतालों को आग के खतरों से सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
मेडिकल कालेज से जुड़े सभी अस्पतालों में मरीजों और उनके तीमारदारों की भारी भीड़ को देखते हुए एक हाई-लेवल ‘नेशनल फायर सेफ्टी कमेटी’ का गठन किया गया है। यह कमेटी सिर्फ कागजों पर ही काम नहीं करेगी, बल्कि हर दिन अस्पतालों में इलाज की व्यवस्थाओं के साथ-साथ फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजामों को भी परखेगी।
अस्पताल प्रशासन ने इस सुरक्षा चक्र को मजबूत करने के लिए सभी बड़े पदाधिकारियों को एक मंच दिया है। इस विशेष कमेटी में मेडिकल कॉलेज के सभी विभागाध्यक्षों को जिम्मेदारी दी गई है। उनके साथ ही हैलट अस्पताल, जच्चा-बच्चा अस्पताल, मुरारी लाल चेस्ट चिकित्सालय, संक्रामक रोग अस्पताल और अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज जच्चा-बच्चा अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षको को इसमें शामिल किया गया है ।
सभी अस्पतालों के नर्सिंग हेड और सिक्योरिटी हेड को भी इसमें शामिल किया गया है ताकि ग्राउंड लेवल पर तुरंत एक्शन लिया जा सके।
कमेटी का मुख्य फोकस अस्पताल के उन हिस्सों पर रहेगा जहां गंभीर मरीज भर्ती होते हैं और पल-पल की निगरानी जरूरी होती है। कमेटी मुख्य रूप से आईसीयू, इमरजेंसी, हाई डिपेंडेंसी यूनिट, ऑपरेशन थिएटर और नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई के लिए एक फुलप्रूफ मास्टर प्लान तैयार करेगी।
इस प्लान के तहत यह तय किया जाएगा कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में मरीजों को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाए।
हैलट अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक प्रो. सौरभ अग्रवाल ने साफ किया है कि अब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होगी। अस्पताल में आग से बचाव के जितने भी संसाधन हैं, उनकी नियमित जाँच होगी।






