May 1, 2026

आज़ाद संवाददाता

कानपुर।  रायपुरवा थाना क्षेत्र के देव नगर निवासी प्राइवेट कमी अमित नाथ मिश्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। उन्होंने सुसाइड नोट में लिखा कि केपी ग्रुप के चार लोगों की प्रताड़ना से तंग आकर मैं यह कदम उठाने जा रहा हूं।
देव नगर निवासी अखिलेश चंद्र मिश्रा के पुत्र अमित नाथ मिश्रा पिछले 17 सालों से केपी ग्रुप में बेंगलुरु में मार्केटिंग का काम देखते थे। बड़े भाई आदित्यनाथ मिश्रा ने बताया कि परिवार में पत्नी अनुजा और डेढ़ साल का बेटा देवांश और 3 साल की बेटी पूर्वी है ।अमित का पूरा परिवार कानपुर में रहता है और अमित बेंगलुरु में नौकरी करते थे।
करीब 17 सालों से इस कंपनी के साथ जुड़कर काम कर रहे थे, लेकिन वह 20 मई को नौकरी छोड़कर घर वापस आ गया था, लेकिन उसने किसी से कुछ नहीं बताया और रात में चद्दर से फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
कमरे के अंदर मिले सुसाइड नोट में अमित ने लिखा है कि कंपनी के शशांक शुक्ला, पंकज भदौरिया, किशन तिवारी और नितेश शुक्ला की प्रताड़ना के कारण मैं सुसाइड करने जा रहा हूं।
मृतक के भाई आदित्य ने बताया कि सुसाइड नोट में यह भी लिखा है कि वह पिछले कई महीनों से उसे सैलरी नहीं दे रहे थे और अलग-अलग कारण से प्रताड़ित कर रहे थे और कहते थे कि तुमसे जूते तक साफ करवाएंगे।
आए दिन की प्रताड़ना से तंग आकर ही भाई ने नौकरी छोड़ दी, लेकिन उसने किसी से भी घर पर जिक्र तक नहीं किया।
अखिलेश चंद्र मिश्रा प्राइवेट नौकरी करते हैं। रात में पिता नौकरी करके घर लौटे तो देखा कि कमरे में अमित नाथ का शव चद्दर के सहारे पंखे से लटक रहा है। उन्होंने घटना की जानकारी अपनी बहू सपना को दी। इसके बाद पूरे घर में कोहरा मच गया। घटना के समय अमित की पत्नी बच्चों को लेकर कल्याणपुर स्थित अपने मायके गई हुई थी।

मृतक अमित ने अपने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं अमित नाथ मिश्रा जो भी कर रहा हूं अपने होशो हवास में कर रहा हूं, मेरे मरने के बाद मेरे भाई और भाभी को ना सताया जाए। मैं अपनी कंपनी केपी ग्रुप के कारण जान दे रहा हूं। मैं अमित नाथ मिश्रा जो भी कर रहा हूं वह किसी के दबाव में था, हमको चार लोगों ने प्रताड़ित किया है।

शशांक शुक्ला, पंकज भदौरिया, नीलेश शुक्ला, किशन तिवारी ने हमको इतना परेशान किया और मेरी नौकरी खाई। मैंने अपनी आवाज उठाई तो हमको संदीप तिवारी ने दबा दिया। मुझको रोज प्रताड़ित करते थे और मेरे ऊपर ब्लेम लगाकर निकाल दिया।
कृपया हमको न्याय दें। मैं राकेश मिश्रा के पास गया तो उन्होंने केवल उन्हीं का साथ दिया, क्योंकि संदीप तिवारी के सारे रिश्तेदार इस कंपनी में लगे हैं। इसीलिए हमसे वह बार-बार झगड़ा करते थे।
अरविंद तिवारी के बहन की शादी में, मनीष शुक्ला के घर पर, हमको रोज प्रताड़ित किया गया। मैं इतना परेशान हूं कि मैं आत्महत्या करने जा रहा हूं। ना इसमें मेरे भाई ना भाभी का हाथ है। ना मैं किसी से और प्रताड़ित हूं।
मैंने अपनी बात किसी से नहीं बताई, मैं बहुत परेशान हूं, जो भी कर रहा हूं इन चार लोगों के कारण कर रहा हूं। जो मेरे इंश्योरेंस में पैसा है वह मेरी पत्नी को दे देना, मेरे जाने के बाद। मेरे बच्चों को कोई भी प्रताड़ित न करें। चाचा मुझे माफ कर देना।
बस यह चार लोगों को कड़ी से कड़ी सजा हो, शशांक शुक्ला, पंकज भदौरिया, किशन तिवारी, नितेश शुक्ला जो की बेंगलुरु में केपी ग्रुप में काम करते हैं।

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