June 27, 2026

संवाददाता

कानपुर।   सड़क हादसों और गंभीर इमरजेंसी के वक्त मरीजों को तुरंत बेहतर इलाज देने के लिए एक बड़ा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। हादसों में घायल लोगों की जान बचाने के लिए चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों की ‘ट्रामा टास्क फोर्स’ ने एक खास योजना बनाई है। इसके तहत राज्य के प्रमुख शहरों के मेडिकल कॉलेजों में ट्रामा सेंटरों की संख्या और सुविधाओं को बड़े पैमाने पर बढ़ाया जाएगा।

इस नई योजना के तहत कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ लखनऊ के पीजीआई और राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट, आगरा के एसएनएमसी, गोरखपुर के बीआरडीएमसी, मेरठ के एलएलआरएमसी, झांसी के एमएलबीएमसी, प्रयागराज के एमएलएनएमसी, ग्रेटर नोएडा के जिम्स और सैफई के यूपीयूएमएस को अपग्रेड किया जाएगा। इन सभी 10 बड़े संस्थानों को लखनऊ के केजीएमयू की तर्ज पर ‘लेवल वन’ ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा।

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि वर्तमान में भी एलएलआर अस्पताल की इमरजेंसी एक ट्रामा सेंटर की तरह ही काम कर रही है, जहां कानपुर और आसपास के करीब 18 जिलों से आने वाले गंभीर मरीजों को 24 घंटे इलाज दिया जा रहा है।

लेकिन, ‘लेवल वन’ ट्रामा सेंटर का दर्जा मिलने के बाद यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। इसके बाद इमरजेंसी सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और अस्पताल में आधुनिक व हाईटेक उपकरणों का विस्तार किया जाएगा।

इस अपग्रेडेशन का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि मरीजों को गंभीर स्थिति में बड़े शहरों या प्राइवेट अस्पतालों की तरफ नहीं भागना पड़ेगा। लेवल-1 ट्रामा सेंटर बनते ही यहां चौबीसों घंटे सीनियर सर्जनों और सुपर स्पेशियलिटी डॉक्टरों की एक विशेष टीम तैनात रहेगी।

न्यूरोसर्जन, ऑर्थोपेडिक सर्जन और क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स की मौजूदगी से एक्सीडेंट या किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के शिकार मरीजों को ‘गोल्डन ऑवर’ में ही सबसे बेहतरीन इलाज मिल सकेगा, जिससे मौतों के आंकड़े को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।