
संवाददाता
कानपुर। खुद को सेना में नायब सूबेदार बताकर लोगों से सेना में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाला युवक गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मिलिट्री इंटेलीजेंस के इनपुट पर इस फर्जी सेना के अधिकारी को अरेस्ट किया है। सबसे ज्यादा चौकाने वाली बात ये है कि उसके घर-परिवार, गांव के लोग और रिश्तेदार भी उसे सेना का अफसर समझते थे। पकड़े गए आरोपी के पास सेना की वर्दी, सेना का फर्जी आईकार्ड के साथ ही कैंटीन का कार्ड समेत अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है ।
एडीसीपी ईस्ट अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि मिलिट्री इंटेलीजेंस के अफसरों को इनपुट मिला कि कोई सेना का अफसर रुपए लेकर स्पोर्ट्स कोटे से भर्ती कर रहा है। इस इनपुट पर मिलिट्री इंटेलीजेंस की टीम ने काम शुरू किया तो पता चला कि शिवम यादव उर्फ कुणाल सिंह यादव नाम का नायब सूबेदार ठगी कर रहा है। जांच की तो पता चला कि सेना में इस नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं है। इसके बाद मिलिट्री इंटेलीजेंस ने कानपुर पुलिस से यह इनपुट शेयर किया। मिलिट्री इंटेलीजेंस और पुलिस ने शातिर ठग को शनिवार को चकेरी से दिल्ली हाईवे पर नौबस्ता को जाने वाले अंडरपास के पास से अरेस्ट कर लिया।
पूछताछ में पकड़े गए शातिर की पहचान पिपरही गांव थाना पिपराइच जनपद गोरखपुर निवासी शिवम यादव उर्फ कुणाल सिंह यादव के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि पकड़ा गया शातिर शिवम यादव उर्फ कुणाल सिंह यादव खुद को आर्मी में नायब सुबेदार बताते हुए फर्जी तरीके से आर्मी की वर्दी पहनकर, सेना में खेल कोटे से नौकरी लगवाने के लिए रेसलिंग एसोसिएसन से प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर ठगी करता है।
शातिर के पास से सेना का फर्जी आईडी कार्ड, सेना की वर्दी और कई मोहरें, आर्मी कैंटीन कार्ड व मोबाइल फोन आदि कूट रचित दस्तावेज के साथ गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने खुलासा करने के बाद शातिर को जेल भेज दिया।
चकेरी पुलिस ने शातिर से पूछताछ की तो सामने आया कि शातिर शिवम यादव उर्फ कुणाल यादव खुद को नायब सूबेदार बताकर लोगों को झांसे में लेता था। लोगों को स्पोर्ट्स कोटे से नौकरी के लिए रेसलिंग का सर्टिफिकेट के नाम पर भी 10 से 20 हजार रुपए तक वसूली करता था।
पहले जाली सर्टिफिकेट बनाता इसके बाद नौकरी के नाम पर 6 से 10 लाख रुपए की वसूली करता था। शातिर ने कानपुर के चकेरी और गोरखपुर में अपना ऑफिस भी बना रखा था। जांच में सामने आया कि शातिर अब तक सैकड़ों युवाओं को सेना में नौकरी का झांसा देकर ठगी कर चुका है।
पकड़े गए शातिर के मोबाइल से उसकी सेना की वर्दी, सेना में इस्तेमाल होने वाली गन और ऑफिस की तस्वीरें बरादम हुईं। तस्वीरों को देखकर कोई भी नहीं समझ सकता कि वह अफसर नहीं है। पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो शातिर शिवम ने बताया कि उसने यह सभी तस्वीरें एआई के जरिए बनाई हैं। उसका इस तरह का कोई भी ऑफिस या सेना में इस्तेमाल होने वाली गन नहीं हैं।
पूछताछ के दौरान शिवम ने बताया कि वह स्टेट लेवल का रेसलर है। वह नेशनल लेवल की रेसलिंग की तैयारी भी कर रहा है। उसका सपना सेना में अफसर बनने का था, लेकिन उसकी सेना में भर्ती नहीं हो सकी। इसके बाद उसने फर्जी सेना का अफसर बनकर लोगों से ठगी शुरू कर दी। सेना का अफसर बना तो उसे गांव से लेकर समाज में सभी जगह तरजीह मिलने लगी और नौकरी के नाम पर लाखों रुपए भी आने लगा। इसके बाद उसका लालच बढ़ता चला गया और नौकरी के नाम पर ठगी का धंधा शुरू कर दिया।
आपको जानकर हैरत होगी कि बेखौफ शिवम यादव सिर्फ नौकरी के नाम पर लोगों से ठगी ही नहीं करता था, वह लोगों को विश्वास दिलाने के लिए अपने फर्जी आईकार्ड के जरिए कानपुर के कैंट एरिया में प्रवेश कर जाता था। इससे लोगों को भरोसा हो जाता था कि वह सेना में ही अफसर है। मिलिट्री इंटेलीजेंस को इनपुट मिलने के बाद शातिर के ठगी का खुलासा हो गया और उसे जेल भेज दिया गया।






