July 21, 2024

–आबकारी विभाग की उदासीनता कहीं धधका न दें रिहायशी क्षेत्र।

— आबकारी विभाग सहित शहर की मधुशालाओं में नही हो रहा अग्निशमन नियमों का प्रयोग।

कानपुर। शहर का आबकारी विभाग शासन के बनाए उन नियमों की बेदर्दी तरीकों से धज्जियां उडाते हुए देखा जा सकता है। जिन नियमों के तहत कम से कम राजस्‍व की हानि हो या फिर बिल्‍कुल ही न हो। शासन की ओर से निर्धारित नियमों जिनमें अग्निशमन यन्त्रों का प्रयोग सभी सार्वजनिक स्थानों में किया जाना प्राथमिकता में रखा गया है। उस नियम का पालन करने और करवाने में शहर का आबकारी विभाग पूरी तरह असफल साबित हो रहा है। शहर के भीतर और उससे सटे बाहरी इलाकों में विभाग की ओर से जितनी भी मधुशालाओं को लाइसेन्स प्रदान किया गया है उसमें से अधिकतर के पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र नही है,और तो और उनके पास अग्निशमन यन्त्र भी स्थापित नही है। शहर भर की मधुशालाएं मानो आग के ढेर पर बैठीं हों क्योंकि शराब इतना ज्वलनशील पदार्थ है कि अगर एक दुकान में आग लग जाए तो उससे लगभग सौ से डेढ सौ फीट का क्षेत्र आग के तान्डव का दंश झेलने को विवश हो जाएगा जिसकी जिम्मेदारी केवल आबकारी विभाग की उदासीनता ही होगी। अभी हाल ही में जन सूचना के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त की जा सकी है कि नगर में आबकारी विभाग और नगर की मधुशालाओं में 

में अग्निशमन संसाधनों का प्रयोग और नियमों का पालन किया गया है या नही तो जिला आबकारी अधिकारी प्रगल्भ लवानियां ने गैर जिम्मेदाराना जवाब दिया कि नियमों के अंतर्गत एनओसी प्राप्त करना अनिवार्य नहीं है। जबकि आबकारी विभाग के विषय में सभी जानते है मुख्यता मदिरा से संबंधित है जो एक ज्वलनशील पदार्थ है और अक्सर शराब की बोतलें गत्ता पेटियों में भारी मात्रा में विभाग में रखी जाती है। उसी मुख्यालय में जहां जिला आबकारी अधिकारी सहित 80 कर्मचारी कार्य करने में व्यस्त रहते है। आबकारी अधिकारी द्वारा लिखित में दिया गया ये जवाब की अग्निशमन नियमों की विभाग में आवश्यकता नहीं ये दर्शाता है कि शायद अग्निदेव द्वारा विभाग को अभयदान दिया गया है कि मदिरा ज्वलनशील पदार्थ होते हुए भी वहां कोई घटना कभी घटित नही हो सकती। यही नही कार्यालय में मौजूद  80 कर्मचारियों को अग्निकवच प्रदान किया गया अतः उन्हें अग्निघटना से निश्चिंत रहने की जरूरत है न कि जागरूक होने की क्यो की विभाग को अग्निदेव से अभयदान प्राप्त है।

इसी क्रम में डीआईजी. फायर का कहना  है कि कोई भी संस्थान हो सरकारी या निजी उसको तीन माह में मॉकड्रिल करवाना अति आवश्यक साथ अग्निरोधी संसाधन भी आवश्यक है। जबकी आबकारी का कहना है की विभाग में मॉकड्रिल करवाये जाने का प्रावधान नही हैं। इसी के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा भी प्रमाण पत्र लिए जाने का प्रावधान नहीं है। जबिक उक्त कार्यालयों का कहना है कि किसी तरह की लापरवाही न की जाए जिससे कोई बड़ी घटना — घटित हो और जनहानि हो लेकिन आबकारी विभाग के डीईओ 80 कर्मचारियों सहित जीवन के साथ खिलवाड़ कर रहे है। नगर में अग्नि की बड़ी बड़ी घटनाएँ घटित हो रहीं हैं जैसे हमराज़ सहित पांच टावर, जो एक भयानक अग्निकांड था। अस्पताल भी अछूते नही है इन घटनाओं में लोग हताहत भी हो रहे है वहां पर भी जहां अग्निशमन संसाधन मौजूद है फिर उस स्थान का क्या जहां अग्निरोधी साधन मौजूद नही और यदि मौजूद भी है तो सालों से उसका परीक्षण निरीक्षण नही किया जाता। इस बारे में सामान्य नागरिकों से भी बातचीत की गयी तो उनका कहना है। कि मदिरा बहुत ही ज्वलन्तशील पदार्थ है ,मधुशालाओं में अग्निशमन यन्त्रों  के प्रयोग का होना अनिवार्य किया जाना चाहिए जिससे भविष्य में किसी भी घटना से बचा जा सके।

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